Sunday, September 20, 2026

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भारत से रिश्ते खराब नहीं करना चाहते: बांग्लादेश का बड़ा बयान

भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह भारत के साथ अपने रिश्तों को किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने देना चाहती। यह बयान ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़े एक कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने मंगलवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि ढाका भारत के साथ अच्छे और स्थिर संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच वर्षों से सहयोग और मित्रता का रिश्ता रहा है तथा उनकी सरकार भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है।

शेख हसीना के कार्यक्रम को लेकर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली में 5 अगस्त को एक विशेष मीडिया कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वर्चुअल माध्यम से शामिल होने वाली हैं। यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसे बांग्लादेश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अगस्त 2024 में बड़े छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद सत्ता से हटने के पश्चात यह शेख हसीना की पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी। कार्यक्रम में उनके देश की वर्तमान स्थिति, भविष्य की राजनीतिक रणनीति तथा बांग्लादेश को लेकर उनकी सोच पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

भारत ने कार्यक्रम से बनाई दूरी

इस कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद के बीच भारत सरकार ने साफ कर दिया कि उसका इस आयोजन से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यह पूरी तरह एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम है और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन भारत सरकार नहीं करती। विदेश मंत्रालय का यह बयान उस समय आया जब बांग्लादेश की ओर से इस मामले में भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई थी।

बांग्लादेश ने जताई सकारात्मक रिश्तों की इच्छा

विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ “फॉरवर्ड-लुकिंग” यानी भविष्य को ध्यान में रखकर संबंधों को मजबूत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास बना रहना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश नहीं चाहता कि किसी निजी कार्यक्रम या राजनीतिक गतिविधि के कारण दोनों देशों के रिश्तों पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े। उनके अनुसार, भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं है और वे उम्मीद करती हैं कि दोनों देशों के संबंध पहले की तरह मजबूत बने रहेंगे।

शेख हसीना कर सकती हैं बड़ी घोषणा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में शेख हसीना अपने “घर वापसी” की योजना और बांग्लादेश के भविष्य को लेकर अपना विज़न साझा कर सकती हैं। माना जा रहा है कि यह संबोधन बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।

इस कार्यक्रम में शेख हसीना के बेटे सजीब वाज़ेद जॉय भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी इसमें भाग लेने वाले हैं। इनमें पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नवफेल सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल बताए जा रहे हैं।

2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं और तब से नई दिल्ली में रह रही हैं।

करीब दो वर्षों बाद उनका यह पहला सार्वजनिक संबोधन माना जा रहा है। इसलिए इस कार्यक्रम पर केवल बांग्लादेश ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस संबोधन के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बनी रहेगी नजर

दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा, जल साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार संवाद चलता रहा है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत और बांग्लादेश दोनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे आपसी सहयोग और कूटनीतिक संबंधों को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

अब सभी की निगाहें नई दिल्ली में होने वाले इस कार्यक्रम और उसमें शेख हसीना के संभावित संबोधन पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके बयान का बांग्लादेश की घरेलू राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर आगे क्या प्रभाव पड़ता है।

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