राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के परिणाम सामने आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि मतगणना अभी जारी है और सभी सीटों के अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन अब तक सामने आए आंकड़ों ने सत्तारूढ़ दल के लिए उत्साह बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व को भी दिया है। इन चुनाव परिणामों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्थान में कुल 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कराए गए हैं। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इन सभी निकायों में कुल 10,245 पार्षद पदों पर चुनाव हुआ है। पार्षद पदों के परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जा रहे हैं। मतगणना जारी रहने के कारण अभी किसी एक दल को पूरे प्रदेश में अंतिम विजेता घोषित करना जल्दबाजी होगी।
अब तक घोषित 1,707 सीटों के आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 708 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस ने 613 सीटों पर जीत दर्ज की है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 386 सीटों पर कब्जा जमाया है। इस तरह घोषित परिणामों में भाजपा सबसे आगे है, लेकिन कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने कई क्षेत्रों में मुकाबले को रोचक बनाए रखा है।
बड़े शहरों में भाजपा का प्रदर्शन
राजस्थान के प्रमुख शहरों में भारतीय जनता पार्टी ने कई स्थानों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। राजधानी जयपुर में भाजपा को अब तक 20 वार्डों में जीत मिली है, जबकि कांग्रेस सात वार्डों में विजयी रही है। जयपुर राज्य का सबसे बड़ा शहरी निकाय है और यहां कुल 150 वार्ड हैं। इसलिए राजधानी के परिणामों को प्रदेश की शहरी राजनीतिक स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक के तौर पर देखा जा रहा है।
उदयपुर में भी भाजपा ने बढ़त बनाई है। यहां भाजपा ने 10 वार्डों में जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को पांच वार्डों में सफलता मिली है। उदयपुर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और व्यापारिक शहर में भाजपा का प्रदर्शन पार्टी के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।
हालांकि सभी क्षेत्रों में भाजपा को समान सफलता नहीं मिली है। झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यहां कांग्रेस ने कुल 45 वार्डों में से 29 पर जीत हासिल की है। भाजपा को 13 वार्डों में सफलता मिली, जबकि तीन वार्ड निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए। झालावाड़ को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुराने राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में यहां कांग्रेस की बड़ी जीत को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
आबूरोड में मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 11-11 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर मतदाताओं का रुझान कई जगहों पर दलगत राजनीति के बजाय स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों से भी प्रभावित हुआ है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर
इन चुनावों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के लिए पहली बड़ी स्थानीय राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद हुए इन निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री ने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में व्यापक प्रचार किया। उन्होंने राज्य के 10 शहरों में प्रचार अभियान और रोड शो किए थे।
मुख्यमंत्री ने चुनावी अभियान के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भी प्रमुखता से सामने रखा। परिणाम आने के बाद उन्होंने भाजपा के प्रदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता की महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात कही है।
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ का आकलन इन परिणामों से किया जा सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस के प्रदर्शन से विपक्ष की जमीनी स्थिति का भी संकेत मिलेगा। आने वाले दिनों में राजनीतिक दल इन परिणामों का विश्लेषण कर अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं।
मतदान प्रतिशत में हुआ इजाफा
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में मतदाताओं ने भी उत्साह दिखाया। मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को कराया गया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बार कुल मतदान लगभग 73.5 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले चुनाव में मतदान प्रतिशत 71.8 प्रतिशत था।
पहले चरण में मतदान 76.4 प्रतिशत रहा, जबकि दूसरे चरण में 70.68 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी को राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। अधिक मतदान कई बार सत्ता विरोधी या सत्ता समर्थक रुझान की ओर संकेत कर सकता है, लेकिन केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर चुनावी परिणामों का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
अंतिम तस्वीर के लिए करना होगा इंतजार
हालांकि शुरुआती और घोषित परिणामों में भाजपा बढ़त पर है, लेकिन मतगणना पूरी होने तक राजस्थान के सभी 309 शहरी स्थानीय निकायों की अंतिम राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी। अलग-अलग नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में परिणामों का संतुलन अलग दिखाई दे रहा है।
इन चुनावों के बाद 10 शहरी स्थानीय निकायों में उपचुनाव 21 सितंबर को होंगे। इसके बाद उपमहापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित हैं। इसलिए पार्षदों के परिणामों के साथ-साथ आगे होने वाले पदाधिकारियों के चुनाव भी स्थानीय सत्ता के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों में भाजपा सबसे आगे है, लेकिन कांग्रेस ने भी कई क्षेत्रों में मजबूत चुनौती पेश की है। निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत ने भी यह स्पष्ट किया है कि राजस्थान की स्थानीय राजनीति में केवल दो प्रमुख दलों के बीच मुकाबला नहीं है। मतगणना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शहरी राजस्थान में किस दल को वास्तविक बढ़त हासिल हुई है और स्थानीय निकायों की सत्ता के गठन में कौन निर्णायक भूमिका निभाएगा।


