दिल्ली में शिक्षा सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ Cockroach Janta Party (CJP) का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को पुलिस कार्रवाई के बाद मंगलवार को भी हजारों की संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर युवाओं की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया, जबकि विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
सोमवार को राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र और युवा संसद की ओर मार्च करने के लिए एकत्र हुए थे। हालांकि प्रशासन ने पहले ही इस तरह के किसी भी मार्च पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में कम से कम 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर सामने आई। कई लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि कुछ को अस्पताल भी भेजा गया। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए मंच और अस्थायी टेंट भी पुलिस द्वारा हटा दिए गए।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस झड़प में उनके 118 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने और सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश की थी, जिसके कारण बल प्रयोग करना पड़ा।
हालांकि पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय बल प्रयोग कर रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें “भारत का सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री” बताया।
मंगलवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों और पार्टी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। उनका कहना था कि सरकार को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और जवाबदेही स्वीकार नहीं करना चाहती।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि सरकार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। गृह मंत्रालय के अधीन ही दिल्ली पुलिस काम करती है, इसलिए विपक्ष गृह मंत्री को भी इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है।
जिस संगठन के बैनर तले यह आंदोलन चल रहा है, उसका नाम Cockroach Janta Party (CJP) है। यह एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जिसने हाल के महीनों में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। इस आंदोलन की शुरुआत उस समय हुई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया था।
बताया जाता है कि मुख्य न्यायाधीश ने एक टिप्पणी के दौरान बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में “Cockroach” शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर व्यापक आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे युवाओं का अपमान बताया। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय केवल उन लोगों से था जिनके पास “फर्जी और अवैध डिग्रियां” हैं। इसके बावजूद यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और विरोध का प्रतीक बन गई।
इसी पृष्ठभूमि में Cockroach Janta Party नामक आंदोलन सामने आया, जिसने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, रोजगार के अवसर बढ़ाने और छात्रों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन का कहना है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था युवाओं की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है और इसके कारण बड़ी संख्या में छात्र बेरोजगारी तथा भविष्य की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल शिक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं की व्यापक सामाजिक और आर्थिक चिंताओं का भी प्रतीक बनता जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं की भागीदारी यह संकेत देती है कि शिक्षा, रोजगार और अवसरों से जुड़े मुद्दे देश में गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन चुके हैं।
फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस आंदोलन और शिक्षा सुधार की मांगों पर क्या रुख अपनाती है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी भी अपने आंदोलन को जारी रखने के संकेत दे रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और युवाओं से जुड़े विमर्श का एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।



