पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने NEET विवाद और देशभर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से अधिक महत्वपूर्ण देश के युवाओं की आकांक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि Gen Z को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इस पीढ़ी को विरोध करने के बजाय समझने की जरूरत है।
संबलपुर स्थित GM University में छात्रों और शिक्षकों से बातचीत के दौरान प्रधान ने अपने इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रम पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क कर अपने पद से हटने की पेशकश की थी। उनका कहना था कि उस समय देशभर में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर छात्रों के बीच असंतोष था और कुछ लोगों ने कथित तौर पर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की।
‘Gen Z हमारे बच्चे हैं, उन्हें समझना जरूरी’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि Gen Z आज समाज और देश की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण पीढ़ी है। उनके मुताबिक, इस पीढ़ी के युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा देश के भविष्य की नींव हैं और उनके सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
प्रधान के अनुसार, भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चों का जन्म होता है। पिछले एक दशक में 15 से 20 वर्ष की उम्र के लगभग 20 करोड़ युवा देश में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं के अपने सपने और आकांक्षाएं हैं और यही पीढ़ी भारत को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए केंद्रीय मंत्री का पद सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं था। युवा वर्ग के भविष्य और देश की प्रतिष्ठा को उन्होंने पद से अधिक महत्वपूर्ण बताया।
NEET विरोध के बीच दिया था इस्तीफा
NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों के बीच व्यापक विरोध देखने को मिला था। इसी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
प्रधान ने अब अपने बयान में कहा है कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी के सामने पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस समय परिस्थितियां व्यक्तिगत विवाद की वजह से नहीं, बल्कि व्यापक छात्र असंतोष और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के कारण गंभीर हुई थीं।
उनके बयान से यह स्पष्ट करने की कोशिश भी नजर आई कि उनका इस्तीफा केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए स्वयं जिम्मेदारी लेने का निर्णय किया था।
नवीन पटनायक पर भी साधा निशाना
एक अलग कार्यक्रम में रायराखोल में बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के प्रमुख नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। यह प्रतिक्रिया उस विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आई, जिसमें BJD की युवा और छात्र इकाई के कार्यकर्ताओं ने एयरपोर्ट के पास उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था।
प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर ‘धर्मेंद्र प्रधान गो बैक’ जैसे नारे लगाए थे। इसके जवाब में प्रधान ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तो भी वह वापस आएंगे।
प्रधान ने नवीन पटनायक की कथित आलोचना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें राज्य के लोगों के लिए ‘अपमान’ और ‘खराब व्यक्ति’ तक कहा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में युवाओं को शामिल किया गया। हालांकि, BJD के संबलपुर जिला अध्यक्ष रोहित पुजारी ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि भाजपा नेता को सरकार द्वारा Gen Z विरोध को संभालने के तरीके के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा।
‘क्या मैंने ओडिशा को शर्मिंदा किया है?’
धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो। मौजूद लोगों से उन्होंने इस सवाल का जवाब भी मांगा, जिस पर कथित तौर पर लोगों ने ‘नहीं’ में प्रतिक्रिया दी।
प्रधान ने कहा कि हो सकता है कि वह राज्य के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल न कर पाए हों, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा काम नहीं किया जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा होना पड़े। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का अवसर भगवान जगन्नाथ और देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से मिला था।
जुलाई 2021 में संभाली थी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी
धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में National Education Policy 2020 के कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया।
जून 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के साथ प्रधान ने दोबारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 25 जुलाई 2026 को देशभर में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।
अब धर्मेंद्र प्रधान की अगली भूमिका क्या होगी?
शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान की अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो सकती हैं। भाजपा के भीतर उनके लंबे संगठनात्मक और चुनावी अनुभव को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि पार्टी उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में इस्तेमाल कर सकती है।
उन्हें पार्टी संगठन में नई भूमिका मिलने या किसी राज्यस्तरीय जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चाएं हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल उनकी अगली आधिकारिक जिम्मेदारी को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक अनुभव, संगठन में उनकी भूमिका और चुनावी मामलों की समझ उन्हें भाजपा के लिए महत्वपूर्ण नेता बनाती है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय से उनका इस्तीफा उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं, बल्कि एक नई भूमिका की शुरुआत हो सकता है।
नोट: यह लेख उपलब्ध कराए गए समाचार विवरण के आधार पर पुनर्लिखित है। राजनीतिक बयानों और आरोपों को संबंधित नेताओं के दावों के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।


