एयर इंडिया के एक विमान में पिछले महीने 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान कुछ ही सेकंड के भीतर उसकी तीनों द्रवचालित प्रणालियों के दबाव में कमी आने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई। विमान में चालक दल सहित कुल 145 लोग सवार थे। यह विमान फुकेत से नई दिल्ली जा रहा था। घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव आया और कुछ समय के लिए नियंत्रण व्यवस्था भी प्रभावित हुई। इस घटना में लगभग दो दर्जन यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट में घटना से जुड़े तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच जारी होने की बात कही गई है। हालांकि, रिपोर्ट में विमान की तकनीकी समस्या और विमान के मुख्य पायलट के नशीले या मन:प्रभावी पदार्थ की जांच में सकारात्मक पाए जाने के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
जांच ब्यूरो ने मुख्य पायलट की जांच में मन:प्रभावी पदार्थ की पुष्टि को गंभीर चिंता का विषय बताया है और उसके खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के तुरंत बाद एयर इंडिया ने मुख्य पायलट की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं।
एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि सुरक्षा, शारीरिक और मानसिक रूप से उड़ान के लिए उपयुक्त होने तथा नियामकीय आवश्यकताओं के उल्लंघन के प्रति उसकी कोई सहनशीलता नहीं है। इसी नीति के तहत संबंधित पायलट की नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई।
उड़ान के दौरान चार सेकंड में बिगड़ी स्थिति
विमान ने चार अगस्त की सुबह भारतीय समयानुसार करीब 7 बजकर 11 मिनट पर फुकेत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान जब विमान कोलकाता उड़ान सूचना क्षेत्र में पहुंचा, तब हवाई यातायात नियंत्रण ने उसे 34 हजार फीट से बढ़ाकर 36 हजार फीट की ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट के अनुसार सुबह 9 बजकर 32 मिनट 43 सेकंड पर विमान 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इसी समय विमान की उड़ान नियंत्रण प्रणाली ने हरे रंग वाली द्रवचालित प्रणाली में दबाव समाप्त होने का संकेत दर्ज किया।
इसके करीब चार सेकंड बाद नीले और पीले रंग वाली दोनों अन्य द्रवचालित प्रणालियों में भी दबाव खत्म होने का संकेत मिला। इसके ठीक एक सेकंड बाद स्वचालित उड़ान नियंत्रण व्यवस्था अलग हो गई और लगातार दोहराई जाने वाली चेतावनी ध्वनि सुनाई देने लगी।
इसके कुछ ही क्षण बाद विमान की गति और उड़ान स्थिति से संबंधित चेतावनी भी सक्रिय हो गई। यह चेतावनी करीब दो सेकंड तक जारी रही। अचानक हुई इस स्थिति के कारण विमान की ऊंचाई में तेज बदलाव आया और यात्रियों को झटका महसूस हुआ।
विमान पहले ऊपर उठा, फिर नीचे आया
घटना के समय विमान का संचालन सह-पायलट कर रहा था। स्थिति बिगड़ने के बाद उसने विमान को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसके बाद मुख्य पायलट ने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान पहले अपनी निर्धारित ऊंचाई से करीब 372 फीट ऊपर चला गया। इसके बाद उसने लगभग 292 फीट की ऊंचाई खो दी। कुछ ही समय बाद नीली द्रवचालित प्रणाली फिर से सक्रिय हो गई और अन्य दोनों प्रणालियों की स्थिति भी कुछ सेकंड में स्थिर हो गई।
तीनों प्रणालियों के दोबारा सामान्य स्थिति में आने से विमान को सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सका। हालांकि, अचानक हुई ऊंचाई की कमी और विमान के भीतर यात्रियों की गतिविधियों के कारण केबिन में काफी नुकसान हुआ।
विमान के भीतर टूट-फूट, यात्रियों को चोटें
घटना के दौरान सीट बेल्ट के संकेत बंद थे। अचानक विमान की उड़ान स्थिति बदलने से यात्रियों और चालक दल के कई सदस्य अपनी सीटों या केबिन के अन्य हिस्सों से टकरा गए।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार विमान के अंदर छत के कुछ पैनल टूट गए। ऊपर सामान रखने वाली कई अलमारियां अपनी जगह से हट गईं। पकड़ने के लिए लगे कुछ सहारे भी क्षतिग्रस्त हुए। चालक दल की एक सीट और आपातकालीन निकास से संबंधित एक हैंडल को भी नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद केबिन पर्यवेक्षक ने कॉकपिट में मौजूद पायलटों को यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के घायल होने की जानकारी दी। पायलटों ने स्थिति का आकलन किया और विमान को निकटतम हवाई अड्डे की ओर मोड़ने के बजाय नई दिल्ली तक उड़ान जारी रखने का निर्णय लिया।
बाद में चालक दल ने नई दिल्ली के हवाई यातायात नियंत्रण से चिकित्सा प्राथमिकता देने का अनुरोध किया। दिल्ली पहुंचने पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई और विमान सुरक्षित रूप से उतर गया।
उड़ान से पहले विमान को उड़ान योग्य घोषित किया गया था
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फुकेत से उड़ान भरने से पहले विमान की उड़ान के लिए अनुमति दी गई थी। यानी उड़ान शुरू होने से पहले विमान को ऐसी स्थिति में नहीं पाया गया था जिसके आधार पर उसे उड़ान से रोका जाता।
तीनों द्रवचालित प्रणालियों में लगभग एक साथ आई समस्या के तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच अभी जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि तीनों प्रणालियों में दबाव कम होने की घटना किस वजह से हुई।
जांच एजेंसी ने कहा है कि तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही घटना के मूल कारणों के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
पायलटों की नशीले पदार्थों की जांच में क्या सामने आया
घटना के बाद दोनों पायलटों की चिकित्सकीय जांच की गई। दिल्ली पहुंचने पर दोनों का श्वास विश्लेषण परीक्षण कराया गया, जिसके परिणाम संतोषजनक पाए गए।
इसके बाद दोनों पायलटों के शरीर में मन:प्रभावी पदार्थों की मौजूदगी की जांच की गई। सह-पायलट इस जांच में नकारात्मक पाया गया, जबकि मुख्य पायलट के शुरुआती नमूने में ऐसा परिणाम आया जिसे आगे पुष्टि के लिए भेजना जरूरी था।
इसके बाद मुख्य पायलट के रक्त का नमूना प्रयोगशाला में भेजा गया। वहां की पुष्टि जांच में भी परिणाम नकारात्मक नहीं, बल्कि संदिग्ध रूप से सकारात्मक पाया गया। हालांकि, जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि पायलट के नमूने में किस पदार्थ की मौजूदगी पाई गई थी।
जांच एजेंसी ने इस तथ्य को गंभीर चिंता का विषय माना है। साथ ही, रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि पायलट द्वारा किसी मन:प्रभावी पदार्थ के इस्तेमाल के कारण ही विमान में तकनीकी या उड़ान संबंधी घटना हुई।
अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
यह घटना विमानन सुरक्षा के लिहाज से कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां विमान की तीनों द्रवचालित प्रणालियों में कुछ ही सेकंड के अंतराल में दबाव की समस्या सामने आई, वहीं दूसरी ओर मुख्य पायलट की चिकित्सकीय जांच में मन:प्रभावी पदार्थ की पुष्टि ने सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर अलग चिंता पैदा की है।
फिलहाल विमान की तकनीकी खराबी और पायलट की जांच के परिणाम को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है। अंतिम जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि द्रवचालित प्रणालियों में एक साथ आई समस्या का वास्तविक कारण क्या था और क्या किसी रखरखाव, प्रणालीगत या अन्य तकनीकी पहलू ने इसमें भूमिका निभाई।
इस घटना के बाद एयर इंडिया द्वारा मुख्य पायलट की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय भी विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन को लेकर कंपनी की सख्त नीति को दर्शाता है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।


