हिमालया वेलनेस कंपनी ने पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी के अनुसार, भारतभर के 66,928 चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवरों ने एक महीने तक चलाए गए वृक्षारोपण अभियान में भाग लेकर नया गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह अभियान चिकित्सक दिवस, 1 जुलाई 2026 से शुरू किया गया था।
इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने पहले दर्ज 53,201 प्रतिभागियों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बनाया गया है, जब जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ रही है। अभियान का उद्देश्य केवल अधिक से अधिक पेड़ लगाना नहीं था, बल्कि चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से आगे लाना भी था।
66,928 चिकित्सकों ने लिया अभियान में हिस्सा
हिमालया वेलनेस कंपनी के अनुसार, भारत के अलग-अलग हिस्सों से कुल 66,928 चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों ने इस पहल में भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने हाथों में एक संदेश प्रदर्शित करते हुए तस्वीरें साझा कीं। इस संदेश का भाव था कि स्वास्थ्य और हरित भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
इन सभी तस्वीरों को निर्धारित नियमों के अनुसार जांचा गया। प्रत्येक प्रविष्टि की समीक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संख्या तय की गई। इसके आधार पर कंपनी को सबसे अधिक लोगों के संदेश प्रदर्शित करने वाले ऑनलाइन फोटो संग्रह की श्रेणी में गिनीज विश्व रिकॉर्ड का खिताब मिला।
यह उपलब्धि विशेष इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इसमें देश के स्वास्थ्य सेवा समुदाय की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। चिकित्सकों का पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय से जुड़ना लोगों के बीच प्रकृति और स्वास्थ्य के संबंध को लेकर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस अभियान के पीछे कंपनी की सोच है कि मानव जीवन की देखभाल और पृथ्वी की देखभाल एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकती। बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण, खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां, संक्रामक रोगों का प्रसार और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों में शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में लगभग 3.6 अरब लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। अत्यधिक गर्मी, प्रदूषित हवा, खाद्य असुरक्षा और संक्रामक बीमारियों जैसी समस्याएं सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं और बदलती जलवायु परिस्थितियों से स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता भी प्रभावित हो सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण जैसी गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। पेड़ वायु गुणवत्ता सुधारने, कार्बन अवशोषित करने, मिट्टी के संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान देते हैं।
स्थिरता को कंपनी की दीर्घकालिक सोच का हिस्सा बताया
हिमालया वेलनेस कंपनी की मुख्य वित्तीय और परिचालन अधिकारी जयश्री उल्लाल ने इस उपलब्धि को कंपनी की दीर्घकालिक पर्यावरणीय सोच से जोड़ा। उनके अनुसार, स्थिरता कंपनी की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है और प्रत्येक निर्णय में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को स्थान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें लोगों, पृथ्वी और साझेदारियों की देखभाल से जुड़ी कंपनी की सोच एक साथ दिखाई देती है। उनके अनुसार, चिकित्सकों के साथ सहयोग ने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करने वाले संदेश को और मजबूत किया है।
कंपनी का कहना है कि प्रकृति को वापस देना उसके लिए केवल किसी एक अभियान तक सीमित गतिविधि नहीं है। पर्यावरण संरक्षण को लंबे समय से उसकी विरासत और भविष्य की प्रतिबद्धता का हिस्सा माना जाता रहा है।
वर्ष 2030 तक पांच करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य
हिमालया वेलनेस कंपनी ने वर्ष 2030 तक कम से कम 50 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी के अनुसार, अब तक वह पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 20 लाख से अधिक पेड़ लगा चुकी है।
इस काम में गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय समुदायों और किसानों के साथ सहयोग किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कंपनी की पर्यावरणीय गतिविधियां केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं हैं। देशभर के किसानों के साथ मिलकर औषधीय और उपयोगी पौधों की टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया जा रहा है। किसानों को जैविक खाद तैयार करने और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से जुड़े प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं।
किसानों और स्थानीय समुदायों को जोड़ने पर जोर
टिकाऊ खेती की पद्धतियां पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में भी मदद कर सकती हैं। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, जैविक प्रक्रियाओं और वैकल्पिक आय के साधनों से जोड़ने की पहल लंबे समय में स्थानीय समुदायों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
हिमालया का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसानों, स्थानीय समुदायों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग आवश्यक है। इसी सामूहिक भागीदारी को कंपनी अपने व्यापक पर्यावरणीय प्रयासों का आधार बता रही है।
चिकित्सकों के योगदान को बताया ऐतिहासिक
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के व्यवसाय निदेशक विकास बंसी ने कहा कि स्वस्थ लोगों के लिए स्वस्थ पृथ्वी का होना आवश्यक है। उनके अनुसार, यह पहल केवल विश्व रिकॉर्ड हासिल करने के उद्देश्य से नहीं की गई थी, बल्कि देश के चिकित्सा समुदाय को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट करने का प्रयास भी थी।
शिशु देखभाल विभाग के निदेशक चक्रवर्ती एन.वी. ने भी चिकित्सकों और कंपनी की टीम के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास, चिकित्सकों के विश्वास और अभियान से जुड़े कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है।
कंपनी के अनुसार, चिकित्सकों के साथ लंबे समय से बने संबंधों ने इस अभियान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हजारों स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण को स्वास्थ्य सेवा के व्यापक उद्देश्य से जोड़ने का अवसर दिया।
विश्व रिकॉर्ड से आगे पर्यावरणीय प्रतिबद्धता
हिमालया वेलनेस कंपनी के लिए यह विश्व रिकॉर्ड उसके व्यापक पर्यावरणीय प्रयासों की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कंपनी का कहना है कि जैव विविधता संरक्षण, टिकाऊ कृषि, वृक्षारोपण और स्थानीय समुदायों के सहयोग से जुड़े प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
इस अभियान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि स्वस्थ समाज के निर्माण में स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। चिकित्सकों की इतनी बड़ी भागीदारी इस विचार को आम लोगों तक पहुंचाने में प्रभावी माध्यम बन सकती है।
कंपनी के अनुसार, भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित और स्वस्थ वातावरण तैयार करना किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए नागरिकों, चिकित्सकों, किसानों, सामाजिक संगठनों और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा। 66,928 स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की भागीदारी वाला यह अभियान इसी सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।


