स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों, संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण, युवा शक्ति, आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराया।
राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ ही घंटों बाद देश स्वतंत्रता प्राप्ति के 80वें वर्ष में प्रवेश करेगा। भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीय इस राष्ट्रीय पर्व को उत्साह और गर्व के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, जिसे हर भारतीय अत्यंत सम्मान के साथ फहराता है।
स्वतंत्रता का अर्थ अवसर और आकांक्षाओं की पूर्ति
राष्ट्रपति ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत ने पराधीनता की बेड़ियों से मुक्ति पाई और देश का प्रत्येक नागरिक अपने स्वतंत्र राष्ट्र के भविष्य का निर्माता बना। उनके अनुसार स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब प्रत्येक नागरिक को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समान अवसर मिलें और वह देश को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान दे सके।
उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, अभियंताओं, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों और किसानों सहित राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे विभिन्न वर्गों का विशेष रूप से उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने खिलाड़ियों, शिल्पकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों, प्रशासनिक अधिकारियों, निवेशकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका की भी सराहना की।
उन्होंने स्वच्छता अभियान से जुड़े सफाई मित्रों को भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला अग्रिम पंक्ति का कार्यबल बताया। साथ ही तीनों सेनाओं, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की। विदेशों में रहने वाले भारतीयों और भारतीय दूतावासों में कार्यरत अधिकारियों के योगदान को भी उन्होंने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला बताया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी पूरी करेगा और तब तक विकसित भारत का निर्माण करना देश का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने अंत्योदय की भावना के अनुरूप विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों को साथ लेकर आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। वैदिक संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र सेवा के लिए सदैव सजग और तत्पर रहने की भावना अपनाने का आह्वान किया।
स्वतंत्रता सेनानियों और विभाजन पीड़ितों को नमन
राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न विचारधाराओं के बावजूद देशवासियों के एकजुट होकर स्वतंत्रता के साझा लक्ष्य के लिए संघर्ष करने को भारत की बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन में वंदे मातरम् की भूमिका और महात्मा गांधी के नेतृत्व में असंख्य भारतीयों के स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल होने का उल्लेख किया।
उन्होंने सामाजिक सुधार, समानता और देशभक्ति के क्षेत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान को भी याद किया और स्वतंत्रता तथा राष्ट्र निर्माण के लिए योगदान देने वाले सभी महान सपूतों और वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद करते हुए राष्ट्रपति ने विभाजन के दौरान मारे गए लाखों लोगों और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले परिवारों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान और जीवन मूल्यों को नहीं छोड़ा।
सरदार पटेल के योगदान को किया याद
स्वतंत्रता के समय भारत के सामने रियासतों के एकीकरण की बड़ी चुनौती थी। राष्ट्रपति ने कहा कि 550 से अधिक रियासतों को नवस्वतंत्र भारत में एकीकृत करना असाधारण कार्य था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस चुनौती का समाधान करते हुए रियासतों के एकीकरण और आधुनिक भारत की एकता को मजबूत आधार दिया।
राष्ट्रपति ने आधुनिक भारत की एकता के शिल्पकार लौह पुरुष सरदार पटेल की स्मृति को नमन किया।
संविधान और जनभागीदारी पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान जनता की भागीदारी की भावना पर आधारित है। लोकतंत्र की जन्मभूमि माने जाने वाले भारत में जनभागीदारी की परंपरा सदियों से दिखाई देती रही है। आज भी नागरिक विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों और विकास कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर इस परंपरा को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान समान दर्जे, समान अवसर और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को महत्वपूर्ण आदर्श मानता है। आज सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि आज के भारत में प्रत्येक व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
राष्ट्रपति ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की आकांक्षाओं को आवाज देना है, कार्यपालिका का कर्तव्य जनहितकारी नीतियों को लागू करना है और न्याय व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों की कमी के कारण किसी व्यक्ति को न्याय से वंचित न होना पड़े।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण की उपलब्धियां
राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक से अधिक समय में देश में हुए तेज और समावेशी विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विरासत और विकास के बीच संतुलन बनाने तथा लंबे समय से चली आ रही विकास संबंधी बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया गया है।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में ज्योतिबा फुले तथा क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा किया गया है। जन धन योजना के माध्यम से लगभग 59 करोड़ खाताधारकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं। 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराने तथा 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क स्वास्थ्य कवच की सुविधा मिलने का भी उल्लेख किया गया।
किसान सम्मान निधि और किसान ऋण कार्ड के माध्यम से खेती, दुग्ध उत्पादन, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों से जुड़े किसानों को सहायता मिलने की बात भी राष्ट्रपति ने कही।
डिजिटल व्यवस्था और आधारभूत ढांचे का विस्तार
राष्ट्रपति ने भारत की डिजिटल व्यवस्था को देश के विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि छोटे ग्रामीण दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंच चुकी है। उनके अनुसार दुनिया के आधे से अधिक वास्तविक समय वाले डिजिटल लेनदेन भारत में हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से नागरिकों तक पहुंचाना संभव हुआ है। इसके साथ ही राजमार्गों, जलमार्गों, रेलमार्गों और हवाई संपर्क के विस्तार ने नए उद्यमों, रोजगार और निवेश के लिए अवसर पैदा किए हैं।
अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता पर विश्वास
दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया और कहा कि आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान को आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव बताया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में देश की प्रगति पर प्रकाश डाला।
विदेश नीति में शांति और सहयोग पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय हित भारत की विदेश नीति का आधार है। शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना इसके प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का उल्लेख किया।
भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रपति ने नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में वैश्विक समुदाय के उचित प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों का अधिकार बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपने कार्यों से उनके अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। उन्होंने प्रकृति संरक्षण को भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताया।
संताली भाषा के प्रसिद्ध कवि पंडित रघुनाथ मुर्मू की रचना का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रकृति और मानवीय मूल्यों के बीच संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सूखते पेड़ को देखकर दुखी होने वाले पक्षी की पीड़ा हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि मानव संस्कृति और प्रकृति के विनाश पर मनुष्य क्यों न दुखी हो।
उन्होंने एक पेड़ मां के नाम और पर्यावरण के लिए जीवनशैली जैसे अभियानों से प्रेरणा लेकर प्रत्येक नागरिक से व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।
महिला शक्ति को राष्ट्र की बड़ी ताकत बताया
राष्ट्रपति ने शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय बेटियों की बढ़ती उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में योगदान देने वाली ड्रोन दीदियों से लेकर वायुसेना में युद्धक भूमिका निभाने वाली महिलाओं तक की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि हाल में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से आठ महिलाओं ने जीते। दस करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल हो चुका है और अब तीन करोड़ नई लखपति दीदियां बनाने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।
महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व में उनकी बढ़ती भूमिका को भी राष्ट्रपति ने लोकतंत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके उद्देश्यों की पूर्ति से विधानमंडलों में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।
युवा शक्ति को बताया भारत की सबसे बड़ी पूंजी
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा आबादी देश की सबसे मूल्यवान शक्ति है। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा, कौशल, नवाचार और जमीनी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने की क्षमता की सराहना की।
उन्होंने युवा वैज्ञानिकों द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल की जा रही उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी आत्मनिर्भर रोजगार के साथ-साथ रोजगार सृजन की संस्कृति को भी अपना रही है। देश में मजबूत नव उद्यमिता व्यवस्था विकसित हो रही है और भारतीय युवाओं को वैश्विक संस्थाओं में नेतृत्व की जिम्मेदारियां मिल रही हैं।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को भारत के भविष्य का निर्माता बताते हुए सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी परिवार और समाज की भी है।
खेलों के माध्यम से युवा विकास
राष्ट्रपति ने खेलों को युवा विकास और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने देशभर में जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेल व्यवस्था मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि खेलों में निवेश बढ़ने और सुविधाओं के विस्तार से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। युवा खिलाड़ियों की बढ़ती उपलब्धियां देश के आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही हैं।
साथ ही, बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग छह करोड़ वरिष्ठ नागरिक प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने समाज से वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और अपनत्व बनाए रखने की अपील की।
आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ दृढ़ संदेश
राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और अभियान सिंदूर का उल्लेख करते हुए सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को नमन किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध की गई निर्णायक कार्रवाई ने भारतीय सशस्त्र बलों की सटीक क्षमता को प्रदर्शित किया और आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने के निर्णय को राष्ट्रीय हित, विशेषकर किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास और उत्साह का वातावरण दिखाई दे रहा है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्थानीय खिलाड़ियों तथा कलाकारों की भागीदारी को उन्होंने समावेशी विकास का उदाहरण बताया।
विरासत और गौरव को मिली वैश्विक पहचान
राष्ट्रपति ने भारतीय विरासत के संरक्षण और वैश्विक पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 किलों के विश्व विरासत सूची में शामिल होने तथा सारनाथ को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिलने की बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत की धरती एक ओर भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक विरासत को संजोए हुए है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय गौरव और अपनी परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष की ऐतिहासिक गाथाओं को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
विकसित भारत के लिए सामूहिक संकल्प
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक भारतीय का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने तेलुगु के राष्ट्रवादी कवि गुरजाडा अप्पाराव की पंक्तियों का भावार्थ प्रस्तुत करते हुए कहा कि राष्ट्र केवल उसकी भूमि नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले सभी लोग हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के प्रयासों और समाज की सक्रिय भागीदारी से भारत के प्रत्येक गांव, कस्बे और घर में रहने वाले लोग अधिक स्वस्थ, खुशहाल और समृद्ध बनेंगे।
उन्होंने देशवासियों से स्वतंत्र भारत को विकसित भारत में बदलने के पवित्र राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए मिलकर समर्पित होने का आह्वान किया। संबोधन का समापन उन्होंने जय हिंद और जय भारत के उद्घोष के साथ किया।


