दुनिया भर में मौसम के बदलते स्वरूप को लेकर वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसी बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization – WMO) ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। संगठन के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर के बीच सुपर एल नीनो (Super El Niño) और पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (Positive Indian Ocean Dipole – IOD) का संयुक्त प्रभाव दुनिया के कई हिस्सों में तापमान, वर्षा और चरम मौसमी घटनाओं को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार विकसित हो रहा एल नीनो सामान्य एल नीनो की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकता है। यदि मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह पिछले लगभग 150 वर्षों के सबसे मजबूत एल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। इसके साथ ही हिंद महासागर में विकसित हो रहा पॉजिटिव आईओडी भी वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करेगा।
क्या है एल नीनो?
एल नीनो, एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) नामक जलवायु प्रणाली का गर्म चरण होता है। इस दौरान पूर्वी और मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) की सतह और उसके नीचे का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।
जब समुद्र का तापमान बढ़ता है, तो व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) कमजोर पड़ जाती हैं या कई बार अपनी सामान्य दिशा के विपरीत भी बहने लगती हैं। इसका सीधा असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है।
आमतौर पर एल नीनो के कारण—
वैश्विक औसत तापमान बढ़ जाता है।
कई देशों में हीटवेव की घटनाएं बढ़ती हैं।
सूखा और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ता है।
समुद्री हीटवेव और कोरल ब्लीचिंग जैसी घटनाएं होती हैं।
भारत सहित कई क्षेत्रों में मानसून प्रभावित हो सकता है।
इस बार क्यों माना जा रहा है सुपर एल नीनो?
अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने 11 जून 2026 को एल नीनो की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद से इसकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान 1997-98 के ऐतिहासिक सुपर एल नीनो से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि अगस्त से अक्टूबर के बीच यह एल नीनो अपने सबसे शक्तिशाली चरण में पहुंच सकता है।
मौसम वैज्ञानिक आंद्रेज फ्लिस के अनुसार, इस बार समुद्र की सतह ही नहीं, बल्कि लगभग 500 मीटर की गहराई तक का पानी भी सामान्य से काफी अधिक गर्म हो चुका है। कुछ स्थानों पर तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है, जो इस एल नीनो की असाधारण तीव्रता को दर्शाता है।
WMO ने क्या चेतावनी दी?
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर के बीच एल नीनो मजबूत रूप ले सकता है। संगठन का कहना है कि प्रमुख वैश्विक मौसम मॉडलों के संयुक्त पूर्वानुमानों के अनुसार समुद्री सतह के तापमान में औसतन 2.9 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
कुछ विश्लेषणों में अगस्त महीने के दौरान ही तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान जताया गया है। यह असामान्य स्थिति है क्योंकि अधिकांश एल नीनो घटनाओं का चरम प्रभाव सामान्यतः नवंबर से फरवरी के बीच देखा जाता है।
क्या है इंडियन ओशन डाइपोल (IOD)?
एल नीनो के साथ-साथ इस वर्ष पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी विकसित हो रहा है।
आईओडी एक समुद्री-वायुमंडलीय प्रणाली है, जिसमें हिंद महासागर के पश्चिमी भाग का पानी सामान्य से अधिक गर्म और पूर्वी भाग का पानी अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है।
इस स्थिति के कारण—
पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में वर्षा बढ़ सकती है।
पूर्वी क्षेत्रों में वर्षा कम हो सकती है।
भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून को अतिरिक्त नमी मिल सकती है।
एल नीनो के कारण होने वाली वर्षा की कमी की आंशिक भरपाई हो सकती है।
यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक भारत के मानसून पर इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।
दुनिया भर में क्या हो सकते हैं प्रभाव?
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, सुपर एल नीनो और पॉजिटिव आईओडी का संयुक्त प्रभाव कई क्षेत्रों में मौसम की चरम घटनाओं को और अधिक तीव्र बना सकता है।
संभावित प्रभावों में शामिल हैं—
लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव
सूखे की स्थिति
अत्यधिक वर्षा और बाढ़
जंगलों में आग लगने का बढ़ता खतरा
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव
कृषि उत्पादन पर प्रभाव
जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों जलवायु प्रणालियों का संयुक्त असर हिंद महासागर क्षेत्र सहित दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग रूपों में दिखाई दे सकता है।
सर्दियों के मौसम पर भी पड़ सकता है असर
मौसम विशेषज्ञ आंद्रेज फ्लिस का मानना है कि सुपर एल नीनो और पॉजिटिव आईओडी केवल मानसून ही नहीं, बल्कि आने वाली सर्दियों के मौसम को भी प्रभावित कर सकते हैं।
उनके अनुसार, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में उठने वाली गर्म वायु वैश्विक वायुमंडलीय धाराओं (Jet Streams) को प्रभावित कर सकती है। इससे उत्तर अमेरिका सहित दुनिया के कई हिस्सों में तूफानों का मार्ग बदल सकता है और मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
WMO महासचिव की अपील
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि एल नीनो दुनिया की सबसे अधिक निगरानी की जाने वाली जलवायु घटनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि केवल मौसम पूर्वानुमान तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकारों और समुदायों को समय रहते तैयारी करनी होगी।
उनके अनुसार, वर्तमान में एल नीनो ऐसे समय विकसित हो रहा है जब वैश्विक महासागर पहले से ही असामान्य रूप से गर्म हैं। इसलिए समय रहते जोखिमों का आकलन करना और आवश्यक कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
सुपर एल नीनो और पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल का एक साथ सक्रिय होना वैश्विक मौसम प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने संकेत दिया है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच इन दोनों जलवायु प्रणालियों का संयुक्त प्रभाव तापमान, वर्षा, सूखा, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, किसी विशेष क्षेत्र पर इसका वास्तविक प्रभाव स्थानीय मौसम परिस्थितियों और अन्य जलवायु कारकों पर भी निर्भर करेगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में जारी आधिकारिक पूर्वानुमानों पर नजर रखना और संभावित जोखिमों के प्रति पहले से तैयार रहना आवश्यक होगा।


