Thursday, November 5, 2026

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भारत ने पाकिस्तान के ‘Youm-e-Istehsal’ अभियान को किया सिरे से खारिज, जम्मू-कश्मीर पर दोहराया अपना अडिग रुख

भारत सरकार ने 5 अगस्त को पाकिस्तान द्वारा मनाए जाने वाले तथाकथित ‘Youm-e-Istehsal’ (डे ऑफ एक्सप्लॉइटेशन) को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे पूरी तरह निराधार, राजनीतिक रूप से प्रेरित और भारत विरोधी दुष्प्रचार करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं तथा इनसे जुड़े सभी संवैधानिक निर्णय भारत के आंतरिक विषय हैं, जिन पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पाकिस्तान हर वर्ष 5 अगस्त को ‘Youm-e-Istehsal’ मनाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करने की कोशिश करता है। हालांकि, ऐसे प्रयास पूरी तरह विफल हैं क्योंकि पूरी दुनिया पाकिस्तान के वास्तविक इरादों और उसके रिकॉर्ड से परिचित है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को लिया गया निर्णय पूरी तरह संवैधानिक था। इसी दिन केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया था तथा तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया था।

पाकिस्तान इस निर्णय का लगातार विरोध करता रहा है और हर वर्ष 5 अगस्त को ‘Youm-e-Istehsal’ के रूप में मनाकर इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास करता है। इस वर्ष भी पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि भारत के इस कदम से दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है।

भारत ने इन टिप्पणियों को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के स्थायी और अभिन्न हिस्से हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान को भारत के संवैधानिक और प्रशासनिक निर्णयों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास, सुशासन और लोकतांत्रिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। सरकार द्वारा आधारभूत ढांचे के विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में कई नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसके साथ ही स्थानीय निकायों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी अधिक सशक्त बनाया गया है।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह भारत के खिलाफ दुष्प्रचार इसलिए करता है ताकि दुनिया का ध्यान अपने देश और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से हटाया जा सके।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है और वह आज भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों में शामिल माना जाता है। ऐसे में भारत पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को अपने यहां की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विशेष रूप से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हाल के सप्ताहों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा कठोर कार्रवाई की गई है। भारत के अनुसार, नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, गिरफ्तारियां और प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो गंभीर चिंता का विषय हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है तथा स्थानीय जनता की आवाज को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए गए हैं। भारत का कहना है कि ऐसे कदम पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर करते हैं, क्योंकि एक ओर वह मानवाधिकारों की बात करता है और दूसरी ओर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नागरिकों के अधिकारों का दमन करता है।

रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक नाटक करने के बजाय अपने यहां सक्रिय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस, विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमापार आतंकवाद लंबे समय से क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह भारत के उन क्षेत्रों को खाली करे जिन पर उसका अवैध और बलपूर्वक कब्जा है। साथ ही आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान के ऐसे प्रचार अभियानों से भ्रमित नहीं होता। दुनिया पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड, आतंकवाद के मुद्दे और उसके दोहरे रवैये से भली-भांति परिचित है।

भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े सभी निर्णय पूरी तरह संवैधानिक, लोकतांत्रिक और भारत की संप्रभुता के अनुरूप हैं। सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में विकास, निवेश, पर्यटन और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय ने अंत में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान को निराधार आरोप लगाने के बजाय अपने देश और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था, मानवाधिकार और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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