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सोना चांदी आज सस्ता क्यों हुआ जानिए ताजा भाव

त्योहारी मौसम की शुरुआत के बीच सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 4 सितंबर को अचानक गिरावट देखने को मिली। इससे एक दिन पहले दोनों कीमती धातुओं में जोरदार तेजी आई थी, लेकिन अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों में संभावित बदलाव को लेकर बदली उम्मीदों ने शुक्रवार को बाजार का रुख बदल दिया।

वायदा बाजार में सोने की कीमत एक समय करीब 1,170 रुपये तक गिर गई, जबकि चांदी में लगभग 2,824 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ दोनों धातुओं ने अपने कुछ नुकसान की भरपाई कर ली। इस उतार-चढ़ाव ने उन निवेशकों का ध्यान खींचा है जो त्योहारी खरीदारी के लिए सोने और चांदी के भाव पर नजर रख रहे हैं।

इससे ठीक एक दिन पहले, 3 सितंबर को सोने की कीमत में करीब 3,500 रुपये की तेजी आई थी। वहीं चांदी भी लगभग 5,000 रुपये महंगी हो गई थी। करीब दस दिनों तक कमजोरी के बाद अचानक आई इस तेज बढ़त ने बाजार में उत्साह पैदा किया था। लेकिन अगले ही दिन अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की धारणा बदल दी और कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया।

अमेरिकी आंकड़ों से क्यों बदली बाजार की चाल

सोने की कीमतों पर वैश्विक स्तर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का काफी प्रभाव पड़ता है। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से अधिक मजबूत दिखाई देती है, तो वहां केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती किए जाने की संभावना कम हो सकती है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सामान्य तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि कम ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों, जैसे सोने, की मांग बढ़ सकती है।

लेकिन जब अमेरिकी आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं और ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना घटती है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी मुद्रा में मजबूती और सरकारी ऋण-पत्रों पर बढ़ती प्रतिफल दर भी सोने के आकर्षण को प्रभावित कर सकती है।

यही कारण है कि 4 सितंबर को एक दिन पहले की तेज तेजी के बाद सोने और चांदी में मुनाफावसूली तथा गिरावट देखने को मिली।

एक दिन पहले सोने में क्यों आई थी इतनी तेजी

3 सितंबर को वैश्विक बाजार में धारणा में सुधार और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कारण कीमती धातुओं की मांग बढ़ी थी। सोने की कीमत एक ही दिन में करीब 3,500 रुपये बढ़ गई थी, जबकि चांदी में लगभग 5,000 रुपये की तेजी आई।

करीब दस दिनों तक लगातार कमजोरी झेलने के बाद आई इस तेजी को निवेशकों ने काफी महत्वपूर्ण माना था। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में संभावित नरमी की उम्मीद ने सोने को समर्थन दिया।

हालांकि, 4 सितंबर को सामने आए नए अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने तस्वीर बदल दी। निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपनी अपेक्षाओं का पुनर्मूल्यांकन किया और इसके परिणामस्वरूप सोने तथा चांदी में दबाव देखने को मिला।

भारत में सोने की मांग पर भी असर

घरेलू बाजार में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल से प्रभावित नहीं होती। स्थानीय मांग, मुद्रा विनिमय दर, आयात शुल्क और त्योहारों के दौरान खरीदारी जैसे कई कारक भी इसकी कीमत को प्रभावित करते हैं।

वस्तु बाजार विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार भारतीय बाजार में सोने की छूट बढ़कर करीब 135 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है। यह लगभग तीन महीने में सबसे बड़ी छूट बताई गई है। पिछले सप्ताह यह छूट करीब 65 डॉलर प्रति औंस थी।

इस बढ़ती छूट को कमजोर घरेलू मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही बाजार में इस चर्चा ने भी असर डाला है कि सरकार हाल में बढ़ाए गए सोने के आयात शुल्क में दोबारा बदलाव पर विचार कर सकती है।

आयात शुल्क की चर्चा क्यों महत्वपूर्ण है

सोने की घरेलू कीमत पर आयात शुल्क का सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए आयात पर लगने वाले शुल्क में बदलाव होने पर घरेलू बाजार में सोने की कीमत प्रभावित हो सकती है।

हाल में आयात शुल्क में वृद्धि की चर्चा के बाद बाजार में कीमतों को लेकर पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई थी। अब शुल्क में संभावित पुनर्विचार की अटकलों ने बाजार के कारोबारियों और निवेशकों का ध्यान और बढ़ा दिया है।

हालांकि, केवल ऐसी अटकलों के आधार पर सोने की भविष्य की कीमत को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी मुद्रा, ब्याज दरों की दिशा और घरेलू मांग आने वाले दिनों में कीमतों के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।

त्योहारों से पहले खरीदार क्या करें

भारत में सितंबर से त्योहारों का मौसम धीरे-धीरे तेज होने लगता है। आने वाले महीनों में गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे अवसरों पर सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ सकती है।

ऐसे में एक दिन में हजारों रुपये की तेजी या गिरावट देखकर घबराने के बजाय खरीदारों को कीमतों के व्यापक रुझान पर ध्यान देना चाहिए। आभूषण खरीदते समय केवल सोने के मूल भाव को देखना पर्याप्त नहीं है। शुद्धता, आभूषण बनाने का शुल्क, कर और विक्रेता द्वारा लगाए जाने वाले अन्य शुल्क भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।

निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वाले लोगों के लिए भी एकमुश्त खरीदारी के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

चांदी में भी रहा तेज उतार-चढ़ाव

चांदी की कीमत में 4 सितंबर को सोने की तुलना में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। एक समय चांदी करीब 2,824 रुपये तक सस्ती हुई। हालांकि बाद में इसमें भी कुछ सुधार देखा गया।

इससे पहले 3 सितंबर को चांदी लगभग 5,000 रुपये महंगी हुई थी। यानी दो कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत में बेहद तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

चांदी पर औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और ब्याज दरों में बदलाव का असर इस धातु पर भी पड़ सकता है।

आगे कैसी रह सकती है कीमतों की दिशा

4 सितंबर की गिरावट को एक दिन पहले आई तेज तेजी के बाद हुआ सुधार माना जा रहा है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बदलने के कारण सोने और चांदी पर दबाव आया है।

फिर भी कीमती धातुओं का बाजार कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होता है। इसलिए एक दिन की गिरावट को लंबी अवधि की तेजी या मंदी का अंतिम संकेत मानना सही नहीं होगा।

त्योहारी मौसम में घरेलू मांग बढ़ने की संभावना और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों से जुड़ी अपेक्षाएं आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। खरीदारों और निवेशकों के लिए बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए सावधानी के साथ निर्णय लेना बेहतर होगा।

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