दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले अपने आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए अभिजीत दिपके अब महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। उनके आंदोलन की सफलता के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की उनसे मुलाकात और बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्वयं अभिजीत दिपके को फोन कर उनके आंदोलन की सफलता पर बधाई दी और मुंबई स्थित अपने निवास ‘मातोश्री’ आने का निमंत्रण भी दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दिपके के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनीतिक मुलाकातों ने अटकलों को और तेज कर दिया है।
उद्धव ठाकरे ने फोन पर दी बधाई
जानकारी के अनुसार, यह बातचीत शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत खैरे की मौजूदगी में हुई। गुरुवार को खैरे ने औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) के बजाज नगर स्थित अभिजीत दिपके के घर जाकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की।
इसी दौरान उन्होंने फोन के माध्यम से अभिजीत दिपके की बात उद्धव ठाकरे से कराई। बातचीत के दौरान ठाकरे ने दिपके को उनके आंदोलन की सफलता पर शुभकामनाएं दीं और उनके संघर्ष की सराहना की।
इस मुलाकात और फोन कॉल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर अभिजीत दिपके की मां भी उद्धव ठाकरे से बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार से भी की बातचीत
फोन पर हुई बातचीत केवल अभिजीत दिपके तक सीमित नहीं रही। उद्धव ठाकरे ने उनके माता-पिता से भी बात की और परिवार का हालचाल जाना।
बताया जा रहा है कि उन्होंने दिपके की तबीयत, उनके निजी जीवन और आंदोलन के बाद की परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान ठाकरे ने पूरे परिवार को मुंबई आने और मातोश्री में मुलाकात करने का निमंत्रण दिया।
इस आत्मीय बातचीत को राजनीतिक से अधिक व्यक्तिगत मुलाकात के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि ठाकरे ने दिपके के परिवार के प्रति भी संवेदना और सम्मान व्यक्त किया।
शादी को लेकर भी हुई चर्चा
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके की शादी का विषय भी सामने आया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जंतर-मंतर आंदोलन के बाद देशभर से उनके लिए विवाह प्रस्ताव आने लगे हैं। इसी विषय पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में चर्चा हुई। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मातोश्री आने का निमंत्रण स्वीकार
उद्धव ठाकरे के निमंत्रण पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि वे सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलने के लिए तैयार हैं और किसी से मिलने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे निश्चित रूप से मुंबई आएंगे और मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे।
दिपके ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न नेताओं से मुलाकात का मतलब किसी राजनीतिक दल में शामिल होना नहीं है। फिलहाल उनका उद्देश्य सभी पक्षों की बात सुनना और अपने सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाना है।
चंद्रकांत खैरे की मौजूदगी रही खास
दिपके के घर हुई इस मुलाकात के दौरान उनके माता-पिता ने चंद्रकांत खैरे के संसदीय कार्यकाल को भी याद किया।
परिवार ने उनके पुराने कार्यों का उल्लेख करते हुए उनसे आत्मीय बातचीत की। इस मुलाकात का माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण बताया गया, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक दोनों विषयों पर चर्चा हुई।
आंदोलन के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
36 दिनों तक चले जंतर-मंतर आंदोलन के बाद अभिजीत दिपके लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनके आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने के बाद अब विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से उनसे संपर्क किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी सामाजिक आंदोलन का प्रभाव व्यापक होता है, तो राजनीतिक दल ऐसे चेहरों से संवाद स्थापित करने का प्रयास करते हैं। इसी कारण दिपके से लगातार मुलाकातों और संपर्कों का सिलसिला जारी है।
हालांकि अभी तक किसी भी पार्टी ने उनके शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है और स्वयं दिपके ने भी इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी चर्चा
उद्धव ठाकरे द्वारा मातोश्री आने का निमंत्रण दिए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की संभावित राजनीतिक रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अभिजीत दिपके अन्य दलों के नेताओं से भी मुलाकात करते हैं, तो उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें और तेज हो सकती हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिजीत दिपके ने किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने केवल इतना कहा है कि वे सभी नेताओं से मिलने के इच्छुक हैं और विभिन्न विचारों को सुनना चाहते हैं।
ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। हालांकि इतना तय है कि जंतर-मंतर आंदोलन के बाद अभिजीत दिपके अब केवल एक आंदोलनकारी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। आने वाले दिनों में उनकी मुलाकातें और फैसले राज्य की राजनीति में नई दिशा दे सकते हैं.


