पुणे/मुंबई: देशभर में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मनाई जा रही थीं, लेकिन महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव के दौरान हुए दो अलग-अलग हादसों ने जश्न का माहौल गम में बदल दिया। पुणे के ओल्ड सांगवी इलाके में दही हांडी कार्यक्रम के लिए लगाए गए लोहे के अस्थायी ढांचे के गिरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं, मुंबई के अलग-अलग इलाकों में दही हांडी फोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाने के दौरान कम से कम 22 गोविंद घायल हो गए।
पुणे में हुई घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। दही हांडी का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजन स्थल पर लगाए गए लोहे के ढांचे को मजदूर हटाने और खोलने का काम कर रहे थे। इसी दौरान ढांचे का भारी हिस्सा अचानक गिर गया और वहां मौजूद 45 वर्षीय महिला सलमा सलाहुद्दीन पठान उसकी चपेट में आ गईं।
लोहे का भारी ढांचा गिरने से महिला की मौत
हादसे में सलमा पठान के सिर पर गंभीर चोट आई। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने महिला की स्थिति की जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बताया गया है कि सलमा पठान का बेटा दही हांडी कार्यक्रम आयोजित करने वाले विघ्नहर्ता मंडल से जुड़ा हुआ था। घटना के बाद परिवार ने आयोजनकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। परिवार ने पुलिस से यह अनुरोध भी किया कि घटना को लेकर उसकी ओर से स्वतः मामला दर्ज न किया जाए।
पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है और लोहे के ढांचे के गिरने की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ढांचे को हटाने के दौरान सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
हादसे के कारणों की जांच के साथ यह भी देखा जा रहा है कि कार्यक्रम के लिए लगाए गए अस्थायी ढांचे की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के लिए जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
मुंबई में 22 गोविंद घायल
पुणे की घटना के बीच मुंबई में भी दही हांडी उत्सव के दौरान कई गोविंदों के घायल होने की खबर सामने आई। शनिवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में दही हांडी फोड़ने के लिए कई स्तर वाले मानव पिरामिड बनाए जा रहे थे। इसी दौरान कम से कम 22 गोविंद घायल हो गए।
दही हांडी उत्सव में युवा और श्रद्धालु एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर ऊंचा मानव पिरामिड बनाते हैं और सबसे ऊपर मौजूद व्यक्ति दही से भरी हांडी को फोड़ने का प्रयास करता है। ऊंचाई अधिक होने और संतुलन बिगड़ने के कारण कई बार प्रतिभागियों के गिरने से चोट लगने की घटनाएं सामने आती हैं।
अधिकारियों के अनुसार घायल हुए 21 लोगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पूर्वी उपनगर में घायल हुए एक अन्य गोविंद को भी उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। पश्चिमी उपनगर में घायल हुआ एक गोविंद फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन बताया गया है।
मुंबई पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था
जन्माष्टमी और दही हांडी उत्सव को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी थी। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
दही हांडी के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। प्रमुख स्थानों पर आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर पुलिस की विशेष निगरानी रहती है। मानव पिरामिड बनाने वाले गोविंदों की सुरक्षा भी इस दौरान महत्वपूर्ण विषय रहती है।
मुंबई में दही हांडी उत्सव वर्षों से बड़े उत्साह और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया जाता है। कई स्थानों पर बड़े स्तर पर आयोजन किए जाते हैं और बड़ी संख्या में गोविंदा पथक इनमें हिस्सा लेते हैं।
नगरपालिका ने अस्पतालों में तैयार रखे बिस्तर
मुंबई महानगरपालिका ने भी दही हांडी उत्सव के दौरान घायल होने वाले गोविंदों के उपचार के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। नगरपालिका की ओर से शुक्रवार को जारी जानकारी में बताया गया था कि घायल गोविंदों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शहर के 16 नगरपालिका संचालित अस्पतालों में 100 से अधिक बिस्तर तैयार रखे गए थे।
इन व्यवस्थाओं में सायन स्थित लोकमान्य तिलक नगरपालिका सामान्य अस्पताल, परेल स्थित केईएम अस्पताल और मुंबई सेंट्रल स्थित नायर अस्पताल भी शामिल थे। इन अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने और घायल लोगों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी।
नगरपालिका की ओर से अस्पतालों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, ताकि उत्सव के दौरान घायल होने वाले लोगों को उपचार के लिए अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े।
जन्माष्टमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
दही हांडी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी से जुड़े प्रमुख पारंपरिक आयोजनों में से एक है। महाराष्ट्र, विशेष रूप से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में इसका विशेष महत्व है। उत्सव के दौरान विभिन्न स्थानों पर दही हांडी बांधी जाती है और गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ने का प्रयास करते हैं।
इस वर्ष भी मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में दही हांडी उत्सव को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। धार्मिक कार्यक्रमों, संगीत और सांस्कृतिक आयोजनों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा इसमें शामिल हुए।
हालांकि पुणे में महिला की मौत और मुंबई में गोविंदों के घायल होने की घटनाओं ने उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। दही हांडी जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ और ऊंचाई से जुड़े जोखिमों को देखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।
पुणे में पुलिस द्वारा हादसे की परिस्थितियों की जांच जारी है, जबकि मुंबई में घायल हुए अधिकांश गोविंदों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। इन घटनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों के दौरान उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।


