दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नागरिक सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और काम में हो रही देरी को लेकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और लंबे समय से चल रहे कार्यों की स्थिति को लेकर जवाब मांगा। इस दौरान मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
मुख्यमंत्री की यह सख्ती ऐसे समय सामने आई है, जब सत्य निकेतन में एक पुरानी इमारत के ढहने की घटना के बाद राजधानी में जर्जर और जोखिम वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासन और नागरिक निकायों की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से नागरिक कार्यों के लिए आवंटित 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि जब इतने बड़े स्तर पर धनराशि उपलब्ध कराई गई है, तो निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता खराब क्यों दिखाई दे रही है और काम समय पर पूरा क्यों नहीं किया जा रहा।
एक सप्ताह का समय मांगने पर नाराज हुईं मुख्यमंत्री
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कुछ काम पूरा करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। मुख्यमंत्री ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अधिकारियों को क्षतिग्रस्त पट्टियों की मरम्मत 24 घंटे के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद उसकी तस्वीरें उपलब्ध कराने को भी कहा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्देशों का वास्तव में पालन किया गया है।
सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित वीडियो में मुख्यमंत्री अधिकारियों से काम में हो रही देरी और धन के इस्तेमाल को लेकर तीखे सवाल करती हुई दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर इतना पैसा कहां जा रहा है और सार्वजनिक कार्यों की ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है।
मुख्यमंत्री की नाराजगी का मुख्य कारण निर्माण कार्यों की खराब गुणवत्ता और समय पर काम पूरा नहीं होना बताया गया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को चेतावनी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की स्थिति पर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि खतरनाक इमारतों की पहचान समय रहते की जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का जोर केवल हादसे के बाद राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहने, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से कदम उठाने पर है।
सत्य निकेतन हादसा स्थल का भी मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
इससे पहले मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन में ढही इमारत के घटनास्थल का निरीक्षण किया था और वहां चल रहे बचाव अभियान की स्थिति की जानकारी ली थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, हादसे के बाद मलबे का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हटाया जा चुका था। हालांकि, तहखाने में जमा मलबे को हटाने का काम जारी था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तहखाने में पानी जमा था। उनके अनुसार, पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य और तहखाने में जमा पानी की स्थिति ने मिलकर इमारत के ढहने में भूमिका निभाई हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया था, जिनमें छह लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि अन्य छह लोगों की हालत स्थिर बताई गई। घायलों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन पीड़ितों के परिवारों के संपर्क में है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सरकार की नजर
मुख्यमंत्री ने बताया कि घायलों के उपचार की निगरानी की जा रही है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार की प्राथमिकता घायलों को समय पर और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
हादसे के बाद बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया। तहखाने में पानी जमा होने के कारण बचाव कार्य में अतिरिक्त चुनौती सामने आने की बात भी कही गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर भी मामले की निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय से भी मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
खतरनाक इमारतों का होगा संरचनात्मक परीक्षण
सत्य निकेतन हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने राजधानी की खतरनाक और जर्जर इमारतों को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी इमारत को नहीं छोड़ा जाएगा, जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
उन्होंने सभी खतरनाक इमारतों का संरचनात्मक परीक्षण कराने की बात कही। इस परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि किसी इमारत की स्थिति रहने या उपयोग करने के लिहाज से सुरक्षित है या नहीं।
जिन इमारतों में गंभीर खामियां पाई जाएंगी, उनके संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य संभावित हादसों को पहले ही रोकना बताया गया है।
मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
मुख्यमंत्री की अधिकारियों को फटकार का एक प्रमुख कारण मरम्मत और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी रही। यदि सार्वजनिक धन से किए जा रहे कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं होते हैं, तो इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि काम केवल कागजों पर पूरा नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीन पर उसकी गुणवत्ता भी दिखाई देनी चाहिए। क्षतिग्रस्त पट्टियों की मरम्मत को 24 घंटे के भीतर पूरा करने का निर्देश इसी सख्त रवैये का हिस्सा माना जा रहा है।
मरम्मत के बाद तस्वीरें प्रस्तुत करने के निर्देश से भी यह संकेत मिलता है कि सरकार अब काम की निगरानी और जवाबदेही को अधिक गंभीरता से लेने की तैयारी में है।
हादसे के बाद बढ़ी प्रशासनिक जवाबदेही
सत्य निकेतन इमारत हादसे ने राजधानी में भवन सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। पुरानी इमारतों में मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन कितना किया जाता है, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार हादसे की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर भी ध्यान दे रही है।
फिलहाल बचाव अभियान, घायलों का उपचार, मलबा हटाने और घटनास्थल की जांच जैसे काम जारी हैं। साथ ही राजधानी की अन्य जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री की अधिकारियों को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नागरिक कार्यों की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है और खतरनाक इमारतों की पहचान एवं संरचनात्मक परीक्षण की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की जवाबदेही को लेकर सरकार के इस सख्त रुख पर अब लोगों की भी नजर रहेगी।


