महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट पर रोक लगाने के लिए देश में अपनी तरह का पहला वर्षभर चलने वाला उत्सव प्रवर्तन कैलेंडर शुरू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग त्योहारों के दौरान बाजार, मिठाई की दुकानों, खानपान केंद्रों, सामुदायिक भोजन स्थलों, मांस विक्रेताओं, भंडारण केंद्रों और ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी एक त्योहार या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। निगरानी पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक और सामाजिक अवसरों के दौरान की जाएगी। गणेशोत्सव, नवरात्रि, दीपावली, ईद और क्रिसमस सहित अन्य प्रमुख त्योहारों के आसपास खाद्य सुरक्षा जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक त्योहार के लिए प्रवर्तन अभियान त्योहार से 21 दिन पहले शुरू होगा और उसके बाद 30 दिनों तक जारी रहेगा। इसका उद्देश्य केवल त्योहार के दिनों में जांच करने के बजाय खरीदारी, भंडारण, उत्पादन और बिक्री की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना है।
मिठाई और खोया खरीदते समय रहें सावधान
त्योहारों के दौरान मिठाई और खोया की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने उपभोक्ताओं से खरीदारी करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
मिठाई की दुकान पर खरीदारी करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वहां खाद्य सुरक्षा लाइसेंस संख्या स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की गई है या नहीं। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां खाद्य सुरक्षा संपर्क व्यवस्था के संकेतक को देखकर दुकान से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।
ग्राहकों को प्रत्येक खरीदारी की रसीद या बिल अवश्य लेना चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर बाद में शिकायत करनी पड़े तो यही खरीद का प्रमाण बन सकता है।
प्रशासन मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंगों और मिलावटी चांदी के वर्क की भी जांच करेगा। विशेष रूप से यह पता लगाया जाएगा कि कहीं असली चांदी के वर्क के स्थान पर एल्युमिनियम की पतली परत तो नहीं बेची जा रही है।
मिठाई या खोया को अखबार में लपेटकर बेचने पर भी कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं को ऐसी पैकिंग वाली खाद्य सामग्री खरीदने से बचना चाहिए।
बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल पर नजर
दीपावली और दशहरा जैसे त्योहारों में तली हुई खाद्य सामग्री की बिक्री बढ़ जाती है। इसी कारण खाद्य प्रशासन इस बार खाना पकाने के तेल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देगा।
जांच के दौरान तेल में मौजूद कुल ध्रुवीय यौगिकों की मात्रा मापी जाएगी। यह मात्रा इस बात का महत्वपूर्ण संकेत देती है कि तेल को बार-बार गर्म करने के कारण वह कितना खराब हो चुका है।
यदि किसी तेल में इन यौगिकों की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है तो उसे असुरक्षित माना जाएगा और प्रशासन उसे मौके पर ही नष्ट कर सकता है।
इसका सीधा असर उन दुकानों और ठेलों पर पड़ेगा जहां एक ही तेल को लंबे समय तक बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए ग्राहकों को अत्यधिक काला, गाढ़ा या जला हुआ तेल दिखाई देने पर ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
व्रत के सामान की भी होगी जांच
नवरात्रि और महाशिवरात्रि के दौरान व्रत में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री भी बढ़ जाती है। इस दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, राजगीरा और भगर जैसे उत्पाद बड़ी मात्रा में खरीदे जाते हैं।
खाद्य प्रशासन इन खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनमें फफूंद से उत्पन्न विषैले तत्वों की जांच करेगा। खराब परिस्थितियों में लंबे समय तक रखे गए आटे और अनाज में ऐसे विषैले तत्व विकसित हो सकते हैं।
इसलिए उपभोक्ताओं को खुले में रखे, बिना नाम-पते वाले या बिना पहचान के खाद्य पदार्थ खरीदने के बजाय प्रतिष्ठित और लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से सामान लेने की सलाह दी गई है।
व्रत और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवों पर भी विशेष निगरानी रहेगी। इनमें अनुचित भंडारण के कारण विकसित होने वाले अफ्लाटॉक्सिन जैसे विषैले तत्वों की जांच की जाएगी।
ईद के दौरान मांस और बर्फ की भी जांच
ईद के आसपास मांस और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने को देखते हुए मांस की शीत-श्रृंखला, वधशालाओं और बिक्री केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
मांस को सुरक्षित तापमान पर रखने की व्यवस्था, स्वच्छता और भंडारण की स्थिति जांच के प्रमुख बिंदु होंगे। इसके अलावा मांस के भंडारण में इस्तेमाल होने वाली बर्फ और पैक किए गए पेयजल को भी उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई मांग के बीच खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता न हो।
भंडारे, इफ्तार और सामुदायिक भोजन भी दायरे में
त्योहारों के दौरान आयोजित होने वाले सामुदायिक भोजन कार्यक्रम भी इस अभियान का हिस्सा होंगे। महाप्रसाद, इफ्तार आयोजन, अन्नछत्र, लंगर और भंडारे जैसी व्यवस्थाओं पर खाद्य सुरक्षा नियम लागू होंगे।
यदि किसी इमारत, मंडल, संस्था या सामाजिक समूह की ओर से सामूहिक भोजन का आयोजन किया जा रहा है तो प्रशासन ने लाइसेंस प्राप्त भोजन आपूर्तिकर्ता का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
आयोजकों को कार्यक्रम की सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को कम से कम सात दिन पहले देनी होगी। भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से खरीदने और उसकी खरीद संबंधी बिलों को एक वर्ष तक सुरक्षित रखने को कहा गया है।
ऑनलाइन त्योहारों की खरीदारी पर भी नजर
त्योहारों के दौरान अब बड़ी संख्या में लोग मिठाई, सूखे मेवे, चॉकलेट और उपहार सामग्री घर बैठे मंगाते हैं। इसी वजह से खाद्य प्रशासन की निगरानी केवल पारंपरिक दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी।
ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति केंद्रों, त्वरित आपूर्ति गोदामों, त्योहारों के उपहार पैकेटों और आयातित खाद्य सामग्री की भी जांच की जाएगी।
इसका मतलब है कि ऑनलाइन मंगाए गए विदेशी चॉकलेट के डिब्बे, सूखे मेवों के उपहार पैकेट और अन्य खाद्य सामग्री भी खाद्य सुरक्षा जांच के दायरे में आएंगी।
संदिग्ध खाद्य सामग्री मिले तो शिकायत करें
यदि किसी उपभोक्ता को खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता, मिलावट, गलत पैकिंग या अस्वच्छ बिक्री व्यवस्था को लेकर संदेह है तो वह इसकी शिकायत खाद्य एवं औषधि प्रशासन से कर सकता है।
इसके लिए विभाग ने शिकायत व्यवस्था और 1800-222-365 टोल-फ्री दूरभाष सेवा उपलब्ध कराई है। उपभोक्ताओं को शिकायत करते समय दुकान का नाम, खरीद की तारीख, बिल और संभव हो तो खाद्य पदार्थ की तस्वीर जैसी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए।
खाद्य प्रशासन के अनुसार जांच व्यवस्था को तेज करने के लिए चार नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। मौजूदा प्रयोगशालाओं को भी उन्नत किया जाएगा, ताकि खाद्य नमूनों की जांच में होने वाली देरी कम हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और अभियोजन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
त्योहारों के मौसम में खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी जांच की जिम्मेदारी नहीं है। उपभोक्ताओं की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। लाइसेंस देखकर खरीदारी करना, बिल लेना, संदिग्ध पैकिंग से बचना और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की सूचना देना मिलावट के खिलाफ इस अभियान को अधिक प्रभावी बना सकता है।


