दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान सोमवार को भी जारी रहा। इसी बीच मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इमारत के कथित मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस बंसल को दिल्ली लेकर आई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम किस तरह कराया जा रहा था और क्या इस दौरान सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया था। हादसे के बाद इमारत के निर्माण, उपयोग और मरम्मत से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
कौन हैं हरिराम बंसल?
हरिराम बंसल का नाम इस मामले में उस इमारत के कथित मालिक के तौर पर सामने आया है, जिसमें लड़कों के लिए किराये पर आवास की व्यवस्था की गई थी। पुलिस ने हादसे के संबंध में बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने उनकी तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया था।
पुलिस ने बंसल के देश से बाहर जाने की संभावना को रोकने के लिए उनके खिलाफ देश छोड़ने से रोकने संबंधी परिपत्र भी जारी किया था। इसके बाद उन्हें पकड़ने के लिए दस पुलिस दल गठित किए गए। इन दलों में स्थानीय जिला पुलिस के साथ विशेष दल और अन्य अभियान इकाइयों के अधिकारी शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, बंसल की तलाश दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर भी की जा रही थी। आखिरकार उन्हें राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे से पहले और बाद में उनकी गतिविधियां क्या थीं तथा इमारत के रखरखाव और मरम्मत को लेकर उनकी क्या भूमिका थी।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने बंसल और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 290 और 125-ए के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत ऐसे कृत्यों से संबंधित आरोप शामिल हैं, जिनमें किसी की मृत्यु के लिए आपराधिक उत्तरदायित्व, भवन के निर्माण, मरम्मत या तोड़फोड़ में लापरवाही तथा किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना या गिरफ्तारी होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्य और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी निर्धारित होती है।
कैसे हुआ सत्य निकेतन इमारत हादसा?
जानकारी के अनुसार, सत्य निकेतन इलाके में स्थित पांच मंजिला इमारत का इस्तेमाल लड़कों के लिए किराये के आवास के रूप में किया जा रहा था। इमारत को कथित तौर पर ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था। यहां कई विद्यार्थी रह रहे थे।
बताया जा रहा है कि हादसे के समय इमारत के तहखाने में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान पूरी इमारत ढह गई और उसके मलबे में कई लोग फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया गया।
इमारत के अचानक ढहने से आसपास के क्षेत्र में भी अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल ने भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की सहायता से मलबे को हटाकर लोगों की तलाश शुरू की। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
इमारत की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद दिल्ली में किराये के आवास और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से उन इमारतों को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी और कामकाजी लोग रहते हैं।
प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि सत्य निकेतन की संबंधित इमारत के निर्माण और उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इमारत में किए जा रहे मरम्मत कार्य के दौरान संरचनात्मक सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान रखा गया था या नहीं।
हादसे के बाद आसपास की अन्य इमारतों की स्थिति की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अन्य बहुमंजिला इमारतों में भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही या चूक सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने दिल्ली में नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए अवैध पांच मंजिला भवनों की जांच के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों को ऐसे भवनों की पहचान करने और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उन्हें सील करने के निर्देश दिए गए हैं।
आसपास के आवासों की भी होगी जांच
सत्य निकेतन की घटना के बाद प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती ऐसे भवनों की पहचान करना है, जिनमें नियमों की अनदेखी कर विद्यार्थियों या अन्य लोगों को किराये पर रखा जा रहा है। राजधानी के कई इलाकों में छोटे मकानों और बहुमंजिला भवनों को किराये के आवास में बदलकर बड़ी संख्या में लोगों को ठहराया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे भवनों में नियमित संरचनात्मक जांच, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था का होना बेहद महत्वपूर्ण है। सत्य निकेतन हादसे ने इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच की जरूरत को और बढ़ा दिया है।
इस बीच बचाव दल मलबे की अंतिम जांच और संभावित फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे। घटना को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की गई है, जिसमें इमारतों की सुरक्षा और हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने की मांग की गई है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। हरिराम बंसल से पूछताछ के अलावा अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इमारत के ढहने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और सुरक्षा नियमों में किस स्तर पर चूक हुई। हादसे में सात लोगों की मौत ने दिल्ली में भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी सामने रख दी है।


