मासिक धर्म के दौरान पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन, थकान और मनोदशा में बदलाव जैसी समस्याएं कई महिलाओं और किशोरियों के लिए परेशानी का कारण बनती हैं। कई लोग इन लक्षणों से राहत पाने के लिए दर्द निवारक दवाओं का सहारा लेते हैं। हालांकि, खान-पान में कुछ पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकते हैं और मासिक धर्म के दौरान होने वाली कुछ सामान्य परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या मासिक धर्म के दौरान शरीर को बेहतर तरीके से संभालने में मदद कर सकती है। केले, तरबूज, सूखे मेवे, बीज, खट्टे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अदरक और हल्दी जैसे खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। हालांकि, इनका प्रभाव हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और अत्यधिक दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
केला मांसपेशियों की ऐंठन में कर सकता है मदद
मासिक धर्म के दौरान केला एक उपयोगी फल हो सकता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर में द्रव संतुलन बनाए रखने और मांसपेशियों के सामान्य कार्य में मदद करता है।
मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने और मांसपेशियों में खिंचाव की शिकायत भी हो सकती है। केले में मौजूद पोषक तत्व ऐसे लक्षणों को संभालने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा, इसमें विटामिन बी-6 भी पाया जाता है, जो शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
केला ऊर्जा देने वाला फल भी है। मासिक धर्म के दौरान थकान महसूस करने वाली महिलाओं के लिए भोजन के बीच एक केला आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकता है।
तरबूज शरीर में पानी की कमी पूरी करने में सहायक
मासिक धर्म के दौरान कई महिलाओं को पेट फूलने की समस्या होती है। शरीर में पानी की कमी होने पर यह परेशानी और अधिक महसूस हो सकती है। ऐसे में अधिक मात्रा में पानी वाले फलों को भोजन में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
तरबूज में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और इसमें कुछ आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। इसका सेवन शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर को जल्दी ऊर्जा भी प्रदान करती है।
हालांकि, केवल तरबूज पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पीना भी जरूरी है।
बादाम, अखरोट और बीज पोषण से भरपूर
सूखे मेवे और बीज केवल मासिक धर्म के दिनों में ही नहीं, बल्कि पूरे महीने के संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज में मैग्नीशियम, विटामिन ई और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। मैग्नीशियम शरीर में मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कार्य में भूमिका निभाता है।
विटामिन ई सहित कई पोषक तत्व शरीर की सामान्य सूजन संबंधी प्रक्रियाओं और कोशिकाओं की सुरक्षा में योगदान करते हैं। इसलिए सीमित मात्रा में सूखे मेवे और बीज नियमित भोजन में शामिल करना पौष्टिक विकल्प हो सकता है।
इनका सेवन करते समय अत्यधिक नमक या चीनी वाले प्रसंस्कृत विकल्पों के बजाय प्राकृतिक और कम प्रसंस्कृत विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर है।
संतरे और नींबू बढ़ा सकते हैं लौह तत्व का अवशोषण
मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव होने के कारण भोजन से पर्याप्त लौह तत्व प्राप्त करना महत्वपूर्ण हो सकता है। संतरा, नींबू और मौसमी जैसे खट्टे फलों में विटामिन सी पाया जाता है, जो भोजन से लौह तत्व के अवशोषण में सहायता करता है।
हरी पत्तेदार सब्जियों या अन्य लौह तत्व वाले खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन सी से भरपूर फल लेना शरीर को लौह तत्व उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है।
खट्टे फलों में पानी और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, इसलिए ये शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति और संतुलित आहार बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं
मासिक धर्म के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन का हिस्सा बनाना लाभकारी हो सकता है। पालक, मेथी, सरसों का साग और अन्य हरी सब्जियों में लौह तत्व, कैल्शियम, मैग्नीशियम, रेशा और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
लौह तत्व शरीर में रक्त निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि कैल्शियम और मैग्नीशियम मांसपेशियों तथा हड्डियों के सामान्य स्वास्थ्य में भूमिका निभाते हैं।
इसलिए मासिक धर्म के दौरान भोजन में पर्याप्त मात्रा में हरी सब्जियां शामिल करना पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इन्हें दाल, रोटी, चावल या अन्य संतुलित भोजन के साथ लिया जा सकता है।
अदरक पेट दर्द और मितली में दे सकता है राहत
अदरक का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता रहा है। इसमें ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें सूजन कम करने और शरीर में ऑक्सीकरण से होने वाले नुकसान से बचाव करने वाले गुण माने जाते हैं।
मासिक धर्म के दौरान होने वाली पेट की ऐंठन, मितली और असहजता में कुछ लोगों को अदरक से राहत मिल सकती है। अदरक को चाय या हल्के काढ़े के रूप में लिया जा सकता है।
हालांकि, बहुत अधिक मात्रा में अदरक का सेवन करने के बजाय संतुलित मात्रा रखना बेहतर है। जिन लोगों को किसी विशेष बीमारी के कारण आहार संबंधी प्रतिबंध हैं, उन्हें चिकित्सक से सलाह लेकर इसका सेवन करना चाहिए।
हल्दी भी हो सकती है उपयोगी
हल्दी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख मसाला है। इसमें करक्यूमिन नामक प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है, जिसमें सूजन कम करने वाले गुणों पर वैज्ञानिक शोध हुआ है।
मासिक धर्म के दौरान होने वाली असहजता में हल्दी का सेवन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। पारंपरिक रूप से हल्दी को दूध में मिलाकर पीने का चलन भी है। रात में एक गिलास गर्म दूध में थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाकर लिया जा सकता है।
हालांकि, हल्दी किसी गंभीर या लगातार बने रहने वाले मासिक धर्म दर्द का चिकित्सकीय उपचार नहीं है। यदि दर्द असामान्य रूप से अधिक हो, हर महीने बढ़ रहा हो या सामान्य दैनिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा हो तो चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है।
केवल खान-पान पर निर्भर न रहें
मासिक धर्म के दौरान संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त नींद, हल्की शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। बहुत अधिक नमक, अत्यधिक तला हुआ भोजन और जरूरत से ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कुछ लोगों में पेट फूलने और असहजता को बढ़ा सकता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर महिला के शरीर में मासिक धर्म के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। किसी एक खाद्य पदार्थ से सभी को समान राहत मिले, यह जरूरी नहीं है।
यदि मासिक धर्म का दर्द बहुत तेज हो, अत्यधिक रक्तस्राव हो, बार-बार चक्कर आएं, बेहोशी जैसी स्थिति बने या दर्द सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करे, तो इसे केवल सामान्य मासिक धर्म की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से उचित चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।


