भारतीय मुद्रा ने शुक्रवार को लगातार मजबूती का रुख बनाए रखते हुए अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले आठ पैसे की बढ़त दर्ज की। कारोबार समाप्त होने पर रुपया 94.43 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रवाह और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से आने वाले समय में भी रुपये को सहारा मिल सकता है।
हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रुपये की मजबूती पर रोक लगा सकते हैं। वैश्विक स्तर पर किसी भी बड़े तनाव से निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे अमेरिकी मुद्रा को मजबूती मिल सकती है और भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया 94.53 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान घरेलू मुद्रा ने 94.43 रुपये प्रति डॉलर का ऊपरी स्तर छुआ, जबकि 94.53 रुपये प्रति डॉलर का निचला स्तर दर्ज किया। अंत में रुपया 94.43 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में इसमें आठ पैसे की बढ़त दर्ज की गई।
इससे पहले गुरुवार को भी रुपये ने मजबूती का सिलसिला जारी रखा था। गुरुवार को भारतीय मुद्रा 22 पैसे की बढ़त के साथ 94.51 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। इसके साथ ही रुपये ने लगातार कई कारोबारी सत्रों में लाभ दर्ज किया है। बुधवार को भी रुपया 22 पैसे मजबूत होकर 94.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मंगलवार को रुपये में 27 पैसे की मजबूती दर्ज की गई थी और यह 94.95 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले सोमवार और शुक्रवार को भी घरेलू मुद्रा ने क्रमशः 21 पैसे और दो पैसे की बढ़त हासिल की थी। इस प्रकार रुपये ने लगातार कई सत्रों से मजबूती का प्रदर्शन किया है।
बाजार विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख, विदेशी पूंजी का प्रवाह और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने रुपये को मजबूती प्रदान की। वैश्विक बाजारों में बेहतर जोखिम भावना का भी घरेलू मुद्रा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल और जोखिम लेने की बेहतर प्रवृत्ति के कारण रुपये में आगे भी मजबूती की संभावना बनी हुई है। विदेशी पूंजी का लगातार प्रवाह घरेलू मुद्रा के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कम होती उम्मीदें भी रुपये के पक्ष में जा सकती हैं।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारी क्रिस्टोफर वालर की अपेक्षाकृत नरम टिप्पणियों के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कमजोर हुई है। इससे अमेरिकी मुद्रा पर कुछ दबाव बन सकता है और उभरते बाजारों की मुद्राओं को लाभ मिल सकता है। हालांकि, आने वाले दिनों में अमेरिका के रोजगार संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से जुड़ी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव बनने की संभावना रहती है।
शुक्रवार को डॉलर सूचकांक 99.11 पर कारोबार कर रहा था और इसमें 0.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी मुद्रा को सहारा मिला। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत भी ऊंचे स्तर पर बनी रही। ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कारोबार में 95.53 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यदि तेल आपूर्ति में वास्तविक व्यवधान आता है, तो भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है।
घरेलू शेयर बाजार में भी शुक्रवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 362.57 अंक की बढ़त के साथ 76,515.43 अंक पर बंद हुआ। वहीं, राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 24.25 अंक बढ़कर 23,897.70 अंक पर पहुंच गया। शेयर बाजारों में मजबूती से भी रुपये को सकारात्मक धारणा मिली।
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 3,111.94 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह रुपये के लिए कुछ हद तक नकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने मजबूती बनाए रखी।
भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भी देश को बड़ी राहत मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 अरब डॉलर बढ़कर 740.803 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान करती है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षा कवच का काम करती है।
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। विदेशी पूंजी प्रवाह, भारतीय शेयर बाजार की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी मुद्रा की मजबूती, अमेरिकी रोजगार संबंधी आंकड़े और अमेरिका-ईरान तनाव रुपये के लिए प्रमुख निर्धारक बने रहेंगे।
बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का तत्काल कारोबार 94.15 से 94.75 रुपये के दायरे में रह सकता है। यदि विदेशी निवेश बढ़ता है और वैश्विक जोखिम भावना मजबूत बनी रहती है, तो रुपये को और मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल या पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में रुपये की बढ़त सीमित हो सकती है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय मुद्रा के लिए सकारात्मक रहा। लगातार मजबूती, विदेशी पूंजी का समर्थन, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू बाजारों में सकारात्मक धारणा रुपये के लिए उत्साहजनक संकेत हैं। फिर भी वैश्विक घटनाक्रम और तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है।


