Thursday, September 17, 2026

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विशाखा राउत छह साल के लिए अयोग्य, विपक्ष को बड़ा झटका

मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष को बड़ा झटका देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की वरिष्ठ पार्षद और मुंबई की पूर्व महापौर विशाखा राउत को छह वर्षों के लिए पार्षद चुने जाने से अयोग्य घोषित कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग की ओर से 1 सितंबर को जारी शासन निर्णय में यह आदेश दिया गया। यह कार्रवाई पालघर की जाति प्रमाणपत्र जांच समिति द्वारा 21 अगस्त को विशाखा राउत का अन्य पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के बाद की गई है।

सरकार के इस फैसले के बाद मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विशाखा राउत दक्षिण-मध्य मुंबई के बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले वार्ड संख्या 191 का प्रतिनिधित्व करती थीं। इस वार्ड में शिवाजी पार्क और दादर पश्चिम का प्रमुख इलाका शामिल है। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां होने वाले चुनावों पर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रहती है।

चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले के बाद मिली थी जीत

जनवरी में हुए मुंबई महानगरपालिका चुनाव में वार्ड संख्या 191 को अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित किया गया था। विशाखा राउत ने इस सीट से शिंदे गुट की शिवसेना उम्मीदवार प्रिया सर्वणकर गुरव के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

प्रिया सर्वणकर गुरव पूर्व विधायक और शिवसेना नेता सदा सर्वणकर की बेटी हैं। इस कारण यह मुकाबला पहले से ही राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। चुनाव परिणाम में विशाखा राउत ने प्रिया सर्वणकर गुरव को महज 167 मतों के अंतर से हराया था।

विशाखा राउत को कुल 13,236 मत मिले थे। बेहद कम अंतर से मिली इस जीत ने वार्ड संख्या 191 के चुनाव को मुंबई महानगरपालिका के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल कर दिया था। अब जाति प्रमाणपत्र रद्द होने और उसके आधार पर अयोग्यता की कार्रवाई के बाद उनकी चुनावी जीत पर भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

गलत क्षेत्राधिकार में प्रमाणपत्र जमा करने का आरोप

पालघर की जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने 21 अगस्त को विशाखा राउत का अन्य पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया था। समिति की कार्रवाई का आधार प्रमाणपत्र के लिए गलत क्षेत्राधिकार में आवेदन किए जाने से जुड़ा बताया गया है।

इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने 1 सितंबर को शासन निर्णय जारी करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए पार्षद चुने जाने के अयोग्य घोषित कर दिया। सरकारी आदेश के अनुसार यह अयोग्यता 20 अगस्त 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

सरकारी आदेश में कहा गया कि विशाखा राउत को मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की संबंधित धारा के तहत पार्षद पद के लिए अयोग्य ठहराया गया है। इसके परिणामस्वरूप उनका पार्षद पद रिक्त हो गया है। सरकार ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें छह वर्षों की अवधि के लिए चुनाव लड़ने या पार्षद बनने से रोक दिया है।

विपक्षी खेमे से अयोग्य होने वाली पांचवीं पार्षद

विशाखा राउत विपक्षी खेमे से अयोग्य घोषित की जाने वाली पांचवीं पार्षद हैं। हालांकि, उनके मामले को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें नगर विकास विभाग ने सीधे अयोग्यता का आदेश जारी किया है।

इससे पहले जून और जुलाई के दौरान विपक्ष के कम से कम चार पार्षदों को उनके जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित होने के बाद पद से अयोग्य किया गया था। इन सभी मामलों में जाति प्रमाणपत्र जांच समितियों के फैसले महत्वपूर्ण रहे थे।

18 जून को भांडुप के वार्ड संख्या 111 से शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के पार्षद दीपक सावंत की सदस्यता समाप्त हो गई थी। जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने उनके अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया था। सावंत ने जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते समय इस प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया था।

अन्य दलों के पार्षद भी कार्रवाई की चपेट में

22 जून को वार्ड संख्या 137 के अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पार्षद समीर रमजान पटेल को भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उनके मामले में भी जाति प्रमाणपत्र को लेकर जांच समिति के फैसले के बाद पार्षद पद से अयोग्य घोषित किया गया।

इसके बाद 10 जुलाई को मुंबई की तत्कालीन महापौर ऋतु तावड़े ने दो और पार्षदों के अयोग्य होने की घोषणा की थी। इनमें अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की वार्ड संख्या 138 से पार्षद रोशन शेख और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कुर्ला पूर्व स्थित वार्ड संख्या 170 से पार्षद बुशरा नदीम मलिक शामिल थीं।

दोनों पार्षदों के जाति प्रमाणपत्र जांच के दौरान अमान्य पाए गए थे। इसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की गई।

मुंबई महानगरपालिका की राजनीति पर असर

विशाखा राउत की अयोग्यता का असर मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष की स्थिति पर पड़ना तय माना जा रहा है। राउत लंबे समय से मुंबई की राजनीति में सक्रिय रही हैं और महापौर के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। शिवाजी पार्क और दादर पश्चिम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के कारण उनकी राजनीतिक भूमिका भी काफी अहम रही है।

उनकी सदस्यता समाप्त होने के बाद वार्ड संख्या 191 की सीट रिक्त हो गई है। अब इस सीट के भविष्य को लेकर आगे की चुनावी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही, इस फैसले के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर भी राजनीतिक चर्चा बढ़ सकती है।

जाति प्रमाणपत्र जांच बनी महत्वपूर्ण मुद्दा

मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद कई पार्षदों के खिलाफ जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई होने से यह विषय महानगरपालिका की राजनीति में महत्वपूर्ण बन गया है। आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र आवश्यक होता है। यदि जांच के दौरान प्रमाणपत्र अमान्य पाया जाता है, तो उम्मीदवार की पात्रता और उसके निर्वाचित पद पर भी सवाल खड़ा हो सकता है।

विशाखा राउत के मामले में भी जाति प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद उनकी सदस्यता पर कार्रवाई की गई। महाराष्ट्र सरकार के आदेश ने इस कार्रवाई को औपचारिक रूप दे दिया है।

इस घटनाक्रम के बाद मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष के भीतर राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो सकते हैं।

फिलहाल विशाखा राउत की अयोग्यता महाराष्ट्र की महानगरपालिका राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है। छह वर्षों की अयोग्यता का यह फैसला न केवल उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष की रणनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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