नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार (28 जुलाई 2026) को इसकी आधिकारिक जानकारी दी। चार्जशीट में शामिल सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। CBI का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर उसे लाभार्थी अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया था।
यह चार्जशीट ऐसे समय में दाखिल की गई है जब हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा पिछले एक महीने से अधिक समय तक चले विरोध-प्रदर्शनों और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच आया। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने देशभर में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
इन धाराओं के तहत दर्ज किए गए आरोप
CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए हैं।
एजेंसी के अनुसार, इस चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों तथा 43 भौतिक साक्ष्यों (Material Objects) का उल्लेख किया गया है। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका को मजबूत तरीके से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
12 मई को दर्ज हुआ था मामला
CBI ने इस मामले की जांच उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मई 2026 को दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के संचालन के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं और प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को बाद में रद्द कर दिया गया, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ी। इस फैसले के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच व्यापक नाराजगी देखने को मिली।
72 अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों की टीम ने की जांच
CBI ने इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए 72 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कई विशेष टीमों का गठन किया। इनके साथ आठ साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया ताकि डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके।
जांच के दौरान दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कुल 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इन तलाशी अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
CBI ने बताया कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक इमेजिंग और विस्तृत तकनीकी जांच की गई, जिससे पेपर लीक की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।
पेपर लीक की पूरी चेन का हुआ खुलासा
जांच एजेंसी के अनुसार, उसने प्रश्नपत्र लीक होने के स्रोत से लेकर लाभार्थी छात्रों तक पहुंचने वाली पूरी कड़ी का पता लगा लिया है। CBI का दावा है कि लीक के मूल स्रोत की पहचान कुछ ही सप्ताह में कर ली गई थी।
एजेंसी ने बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को की गई थी। इसके बाद लगातार जांच आगे बढ़ती गई और एक-एक कर कई आरोपियों की पहचान होती गई।
NTA के तीन विशेषज्ञ भी गिरफ्तार
चार्जशीट में जिन प्रमुख आरोपियों का उल्लेख किया गया है, उनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
इनमें—
रसायन विज्ञान विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी
जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंडारे
भौतिकी विशेषज्ञ मनीषा संजय हवेलदार
का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों की भूमिका प्रश्नपत्र से संबंधित गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग में सामने आई है।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में
CBI की जांच में महाराष्ट्र के लातूर स्थित RCC Coaching Institute के मालिक एवं प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर का नाम भी प्रमुख आरोपी के रूप में सामने आया है।
इसके अलावा पुणे स्थित APMA Coaching Institute के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) और फिजिक्स फैकल्टी तेजस हर्षदकुमार शाह को भी गिरफ्तार किया गया है।
एजेंसी का आरोप है कि कई मध्यस्थों ने प्रश्नपत्र हासिल कर उसे छात्रों तक पहुंचाने और आर्थिक लाभ कमाने का काम किया।
फोरेंसिक रिपोर्ट ने मजबूत किए आरोप
CBI ने बताया कि डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और शैक्षणिक विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था।
इन वैज्ञानिक रिपोर्टों ने आरोपियों की भूमिका को प्रमाणित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, हालांकि मामले की जांच अभी भी जारी है।
आगे भी हो सकती हैं नई गिरफ्तारियां
CBI के अनुसार, जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों, आर्थिक लेन-देन और लाभार्थियों की भी जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां तथा पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई इस कथित गड़बड़ी ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और CBI की आगे की जांच पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।


