Monday, November 2, 2026

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तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी पर विचार, मिड-डे मील योजना में बड़ा बदलाव संभव

तमिलनाडु सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए मिड-डे मील (दोपहर भोजन) योजना में एक बड़ा बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत सप्ताह में एक दिन छात्रों को चिकन बिरयानी परोसी जा सकती है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह तमिलनाडु की स्कूल पोषण योजना के इतिहास में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाएगा।

मंत्री राजमोहन का कहना है कि तमिलनाडु हमेशा से देश में स्कूली बच्चों के पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य रहा है। समय-समय पर अलग-अलग सरकारों ने इस योजना को और अधिक प्रभावी एवं पोषणयुक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका मानना है कि अब समय आ गया है कि छात्रों को अधिक पौष्टिक, स्वादिष्ट और आकर्षक भोजन उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिले।

राजमोहन ने इस प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि तमिलनाडु के हर बड़े राजनीतिक दौर ने स्कूल पोषण कार्यक्रम को नई दिशा दी है। उन्होंने याद दिलाया कि सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज ने 1950 के दशक में मिड-डे मील योजना की शुरुआत की थी। यह पहल उस समय गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को स्कूल से जोड़ने तथा कुपोषण की समस्या को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने इस योजना में अंडे शामिल कर बच्चों के भोजन को अधिक पौष्टिक बनाया। बाद में एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) ने इस योजना को और व्यापक रूप देते हुए इसे न्यूट्रिशियस मील प्रोग्राम का स्वरूप प्रदान किया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने पूरे सप्ताह अंडों के वितरण को सुनिश्चित कर बच्चों को बेहतर प्रोटीन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंत्री राजमोहन ने कहा कि उनकी इच्छा है कि सरकारी स्कूलों में सप्ताह में कम से कम एक दिन छात्रों को चिकन बिरयानी परोसी जाए। उनका मानना है कि यह भोजन बच्चों को आवश्यक प्रोटीन, ऊर्जा और पोषण प्रदान करेगा। साथ ही स्वादिष्ट भोजन मिलने से छात्रों की स्कूल आने की रुचि भी बढ़ेगी और उनकी उपस्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव फिलहाल मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विचाराधीन है। सरकार विभिन्न पहलुओं जैसे बजट, पोषण मानकों, आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों का मूल्यांकन कर रही है। अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन शिक्षा विभाग इस योजना को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है।

तमिलनाडु लंबे समय से देश में स्कूली पोषण कार्यक्रमों का अग्रणी राज्य माना जाता है। यहां की मिड-डे मील योजना को कई अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना, शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना और स्कूल छोड़ने की दर में कमी लाना रहा है। वर्षों के दौरान सरकारों ने भोजन की गुणवत्ता, विविधता और पोषण स्तर में लगातार सुधार किया है।

सितंबर 2022 में तत्कालीन डीएमके सरकार ने मुख्यमंत्री नाश्ता योजना शुरू की थी, जिसे बाद में पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम नाम दिया गया। इस योजना के तहत प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को सुबह पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया जाने लगा। इस पहल ने मिड-डे मील योजना के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि बच्चों को स्कूल के दौरान दो समय का संतुलित भोजन मिल सके।

अब राज्य सरकार केवल चिकन बिरयानी पर ही नहीं, बल्कि पूरे स्कूल भोजन मेन्यू में बदलाव करने की भी योजना बना रही है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रति छात्र लगभग 15 रुपये का बजट निर्धारित है। सरकार इस बजट का अधिक प्रभावी उपयोग करते हुए ऐसे भोजन शामिल करना चाहती है जो बच्चों को अधिक पसंद आएं और साथ ही बेहतर पोषण भी प्रदान करें।

राजमोहन ने यह भी कहा कि मौजूदा नाश्ते में बार-बार परोसे जाने वाले गेहूं और रवा उपमा जैसे व्यंजनों की जगह अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प शामिल किए जाएंगे। उनका मानना है कि यदि बच्चों को विविध और संतुलित भोजन मिलेगा तो उनकी शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास और पढ़ाई में प्रदर्शन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चिकन बिरयानी जैसी प्रोटीन युक्त डिश सप्ताह में एक बार शामिल की जाती है, तो इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो सकता है। हालांकि इसके साथ स्वच्छता, खाद्य गुणवत्ता, आपूर्ति श्रृंखला, लागत और सभी जिलों में समान वितरण जैसी चुनौतियों पर भी सरकार को विशेष ध्यान देना होगा।

यदि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो तमिलनाडु एक बार फिर देश में स्कूल पोषण योजनाओं के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकता है। यह पहल न केवल बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण को मजबूत करने वाली राज्य सरकार की दीर्घकालिक नीति का भी हिस्सा मानी जाएगीI

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