बेंगलुरु में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक बार फिर ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल की रहने वाली 32 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर सानी कृष्णा ने बाइक टैक्सी एग्रीगेटर रैपिडो (Rapido) से 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है। उनका आरोप है कि कंपनी ने दुर्घटना के बाद न तो पर्याप्त आर्थिक सहायता दी और न ही उनकी अपेक्षा के अनुरूप सहयोग किया।
सानी का कहना है कि यह हादसा उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देने वाला साबित हुआ। दुर्घटना में उन्हें कई गंभीर चोटें आईं, जिनका इलाज अभी भी जारी है। उनके परिवार का दावा है कि अब तक इलाज पर 25 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं और आने वाले समय में यह राशि और बढ़ सकती है।
काम पर जाते समय हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, 17 जून की सुबह सानी कृष्णा ने बेंगलुरु के बायरसंद्रा स्थित अपने घर से डोमलूर स्थित कार्यालय जाने के लिए रैपिडो बाइक टैक्सी बुक की थी। उनका आरोप है कि यात्रा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद बाइक चालक तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहा था।
बैगमने टेक पार्क के पास चालक ने एक ट्रैक्टर को ओवरटेक करने की कोशिश की। इसी दौरान बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दुर्घटना हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि सानी सड़क पर गिर गईं और उन्हें कई गंभीर चोटें आईं।
सात पसलियां टूटीं, तिल्ली निकालनी पड़ी
दुर्घटना के बाद सानी को पहले पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनकी कई सर्जरी की गईं। बाद में बेहतर देखभाल के लिए उन्हें केरल के कोझिकोड स्थित मिथ्रास अस्पताल स्थानांतरित किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, हादसे में उनकी सात पसलियां टूट गईं, कंधे की हड्डी फ्रैक्चर हो गई, चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण प्लास्टिक सर्जरी करनी पड़ी। सबसे गंभीर बात यह रही कि अंदरूनी चोटों के कारण उनकी तिल्ली (Spleen) निकालनी पड़ी।
परिवार का कहना है कि सानी अभी भी बिस्तर पर हैं और पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से उबरने के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद भी ले रही हैं।
20 लाख से अधिक का मेडिकल बिल
सानी और उनके परिवार के अनुसार, इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक मेडिकल बिल 20 लाख रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि उनके चचेरे भाई अद्वैत पी का कहना है कि कुल खर्च 25 लाख रुपये पार कर चुका है।
परिवार का कहना है कि आने वाले महीनों में पुनर्वास, दवाइयों, फिजियोथेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य उपचार पर भी भारी खर्च होने की संभावना है।
महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर उठाए सवाल
सानी कृष्णा ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए रैपिडो के महिला सुरक्षा संबंधी दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा वाले फीचर को ध्यान में रखते हुए सेवा का चयन किया था, लेकिन हादसे के बाद उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी अपने प्रचार में महिला सुरक्षा की बात करती है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उनके अनुसार, दुर्घटना के बाद कंपनी की ओर से संवेदनशीलता और जवाबदेही का अभाव देखने को मिला।
परिवार ने मांगा उचित मुआवजा
सानी के परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार रैपिडो से संपर्क किया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला। उनका दावा है कि कंपनी द्वारा दुर्घटना बीमा और मेडिकल सहायता की बात कही जाती है, लेकिन अब तक किसी ठोस वित्तीय सहायता या मुआवजे पर सहमति नहीं बनी है।
सानी के भाई ने बताया कि वह आमतौर पर अपनी कार से यात्रा करती थीं, लेकिन घटना वाले दिन उन्होंने पहली बार बाइक टैक्सी सेवा का उपयोग किया था। परिवार का कहना है कि उनकी मांग केवल इलाज का खर्च नहीं, बल्कि उचित जवाबदेही भी है।
रैपिडो ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद रैपिडो ने एक बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि वह सानी और उनके परिवार के लगातार संपर्क में है और अपनी ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, परिवार का कहना है कि अब तक किसी प्रकार का स्पष्ट मुआवजा या आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए वे कंपनी से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
पुलिस जांच जारी
सानी की एक मित्र द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर जीवन भीमा नगर ट्रैफिक पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने ट्रैक्टर चालक परशुराम आचारी और बाइक चालक आसिस बैग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125(बी) और 281 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में लापरवाही से वाहन चलाने और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसे आरोप शामिल हैं।
जांच एजेंसियों ने दुर्घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज भी अपने कब्जे में ले लिए हैं। हालांकि परिवार का आरोप है कि उन्हें अभी तक फुटेज देखने की अनुमति नहीं दी गई है और जांच की प्रगति भी काफी धीमी है।
बाइक टैक्सी सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डिजिटल सुरक्षा फीचर पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि चालकों का बेहतर प्रशिक्षण, नियमित निगरानी, दुर्घटना के बाद तत्काल सहायता और पारदर्शी बीमा प्रक्रिया भी उतनी ही आवश्यक है।
यात्रियों का विश्वास बनाए रखने के लिए कंपनियों को केवल तकनीकी सुविधाओं का प्रचार करने के बजाय वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। विशेष रूप से महिला यात्रियों के लिए भरोसेमंद और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता बन गया है।
न्याय और जवाबदेही की लड़ाई
सानी कृष्णा का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी अन्य यात्री को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उनका मानना है कि यदि कंपनियां दुर्घटनाओं के बाद जिम्मेदारी से काम करें और यात्रियों को समय पर सहायता दें, तो लोगों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं तथा पीड़िता को न्याय और उचित मुआवजा कब तक मिल पाता है।


