नेपाल मंगलवार रात एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया। देश में विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ से हुई भारी तबाही और बड़े पैमाने पर जारी खोज एवं बचाव अभियान के बीच 5.0 तीव्रता के भूकंप ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। भूकंप के झटके मंगलवार रात भारतीय समयानुसार 9 बजकर 38 मिनट पर दर्ज किए गए।
भूकंपीय जानकारी के अनुसार, यह भूकंप रात 9 बजकर 38 मिनट 39 सेकंड पर आया। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर लगभग 143 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है। इसका स्थान राजधानी काठमांडू से लगभग 196 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में दर्ज किया गया। भूकंपीय अभिलेख में भूकंप का अक्षांश 29.022 डिग्री उत्तर और देशांतर 83.978 डिग्री पूर्व दर्ज किया गया है। घटना की स्थिति की समीक्षा भी की गई है।
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब नेपाल पहले से ही एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। 26 अगस्त को आई आकस्मिक बाढ़ ने देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
5.0 तीव्रता के भूकंप से हिली धरती
मंगलवार रात दर्ज किया गया भूकंप 5.0 तीव्रता का था। इसका केंद्र सतह से काफी नीचे, लगभग 143 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। राजधानी काठमांडू से करीब 196 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित क्षेत्र को भूकंप के केंद्र के आसपास बताया गया है।
गहरी गहराई पर आए इस भूकंप का प्रभाव अलग-अलग स्थानों पर अलग स्तर का हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर भूकंप से हुए किसी बड़े अतिरिक्त नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, पहले से बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए किसी भी नए प्राकृतिक झटके ने चिंता बढ़ा दी है।
नेपाल भौगोलिक रूप से भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। हिमालयी क्षेत्र में भूगर्भीय गतिविधियां अक्सर दर्ज होती रहती हैं। ऐसे में बाढ़ जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद भूकंप का आना राहत और बचाव कार्यों में लगे अधिकारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।
बाढ़ में मृतकों की संख्या 1,357 तक पहुंची
नेपाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के अनुसार, मंगलवार तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,357 हो गई थी। इसके अलावा 5,326 लोगों की तलाश अभी जारी बताई गई है। राहत एवं बचाव दल अब तक 13,583 लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं।
बाढ़ ने केवल लोगों के घरों और संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने, पुलों के बह जाने और पहाड़ी इलाकों में मलबा जमा होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश
बचाव अभियान का एक बड़ा हिस्सा जलविद्युत परियोजनाओं पर केंद्रित है। आशंका है कि कई श्रमिक भूमिगत सुरंगों में फंसे हो सकते हैं। तीन अलग-अलग परियोजनाओं की सुरंगों में 121 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका बताई गई है।
बाढ़ के दौरान पानी, कीचड़ और मलबे का तेज प्रवाह कई निर्माण स्थलों और परियोजना क्षेत्रों तक पहुंच गया। सुरंगों में पानी और मलबा भर जाने के कारण वहां फंसे लोगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बेहद कठिन चुनौती बन गया है।
अधिकारी प्रभावित इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। लापता लोगों के परिजनों को अब भी उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद है।
हिमनद टूटने से आई तबाही
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे नेपाल-चीन सीमा के निकट एक हिमनद के टूटने को प्रमुख कारण बताया गया है। इसके बाद बड़ी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहा और त्रिशूली घाटी के कई इलाकों में तबाही मचा दी।
तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों और अन्य संरचनाओं को प्रभावित किया। कम से कम 11 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने राहत अभियान को और मुश्किल बना दिया है। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट गए हैं, जबकि मलबे के कारण सामान्य आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
एक के बाद एक प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ी चुनौती
नेपाल के सामने इस समय दोहरी प्राकृतिक चुनौती है। एक ओर हजारों लोगों की तलाश जारी है और दूसरी ओर बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत एवं पुनर्वास का काम चल रहा है। इसी बीच भूकंप के झटके ने स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को अतिरिक्त सतर्क कर दिया है।
बाढ़ से पहले ही हजारों परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है। कई क्षेत्रों में बिजली, सड़क संपर्क और आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे समय में किसी नए प्राकृतिक झटके से राहत अभियान की प्राथमिकताएं और अधिक जटिल हो सकती हैं।
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराना है। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को बहाल करने की कोशिश भी जारी है।
राहत और बचाव अभियान पर सबकी नजर
मंगलवार रात आए भूकंप के बाद नेपाल में अधिकारी और आम नागरिक दोनों सतर्क हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में किसी बड़े अतिरिक्त नुकसान की जानकारी सामने आती है या नहीं।
पहले से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। लापता लोगों की संख्या अधिक होने के कारण तलाश अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।
नेपाल के लिए यह समय बेहद कठिन है। एक ओर विनाशकारी बाढ़ से हुई मानवीय क्षति का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी ओर प्राकृतिक गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब प्रशासन का ध्यान राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने पर है।


