महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मुंबई के बांद्रा स्थित प्रतिष्ठित ओटर्स क्लब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मंगलवार, 18 अगस्त को की गई जांच के बाद सामने आई, जिसमें क्लब के भोजनालय में ‘रेगुलर पनीर’ के नाम से रखा गया एक उत्पाद अधिकारियों को कथित तौर पर एनालॉग पनीर मिला। अधिकारियों के अनुसार, यह उत्पाद पंजाब सिंध डेयरी से आपूर्ति किया गया था और क्लब में पनीर से बनने वाले व्यंजनों की तैयारी में इस्तेमाल किया जा रहा था।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच केवल पनीर तक सीमित नहीं रही। निरीक्षण के दौरान क्लब के भोजनालय और पेय पदार्थ परोसने वाले हिस्से में स्वच्छता तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कमियां भी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार, परिसर में फर्श क्षतिग्रस्त और अस्वच्छ स्थिति में था। प्रशीतन उपकरणों के रबर किनारे और अंदरूनी परतें भी खराब पाई गईं। इसके अलावा, पानी की निकासी का मार्ग आंशिक रूप से अवरुद्ध था और प्रशीतक के दरवाजे ठीक से बंद नहीं हो रहे थे।
जांच के दौरान खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता से संबंधित आवश्यक अभिलेख भी उपलब्ध नहीं पाए गए। अधिकारियों ने बताया कि कुल ध्रुवीय यौगिकों की जांच से संबंधित कोई अभिलेख मौजूद नहीं था। खाना पकाने के तेल की बार-बार उपयोग की स्थिति में उसकी गुणवत्ता की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि खराब तेल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
एनालॉग पनीर पर महाराष्ट्र में सख्ती
ओटर्स क्लब के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर सरकार ने एक वर्ष के लिए रोक लगाई है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे की ओर से जारी आदेश के बाद खाद्य कारोबारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर सख्ती बढ़ गई है। आदेश का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाना है, जिन्हें वास्तविक दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कारावास और आर्थिक दंड का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे मामलों में छह महीने तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। इसी वजह से होटल, भोजनालय, खानपान सेवा देने वाले प्रतिष्ठान और घर से भोजन उपलब्ध कराने वाले कारोबार भी खाद्य विभाग की जांच के दायरे में आए हैं।
मुंबई में हाल के दिनों में कई अन्य भोजनालयों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान कहीं खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण, कहीं कीट नियंत्रण में कमी और कहीं स्वच्छता संबंधी गंभीर खामियां मिलने की बात सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य कारोबारियों को उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना आवश्यक है।
ओटर्स क्लब ने कार्रवाई पर जताई आपत्ति
खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद ओटर्स क्लब प्रबंधन ने आदेश पर असहमति जताई है। क्लब की ओर से कहा गया कि वह इस कार्रवाई से हैरान है। प्रबंधन का दावा है कि क्लब ने जो पनीर खरीदा था, वह भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से प्रमाणित था। क्लब के अनुसार, उत्पाद की पैकेजिंग पर उसे ‘विशेष खाद्य पदार्थ’ के रूप में बताया गया था और उसे सीधे तौर पर एनालॉग पनीर नहीं कहा गया था।
क्लब ने यह भी सवाल उठाया कि यदि उत्पाद वैध रूप से प्रमाणित था, तो उसे एनालॉग पनीर मानकर कार्रवाई किस आधार पर की गई। दूसरी ओर, खाद्य अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान मिला उत्पाद नियामकीय दृष्टि से एनालॉग या विशेष श्रेणी के खाद्य पदार्थ के रूप में पहचाना गया।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि निरीक्षण के समय यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी कि मौके पर मौजूद उसी उत्पाद का इस्तेमाल उसी समय भोजन बनाने में किया जा रहा था या नहीं। इसके बावजूद, उत्पाद की मौजूदगी और प्रतिष्ठान में पाई गई अन्य खाद्य सुरक्षा संबंधी कमियों को कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर सामान्य दूध से बनने वाले पारंपरिक पनीर से अलग होता है। इसे तैयार करने में दूध के स्थान पर या दूध के प्रमुख घटक के स्थान पर वनस्पति वसा, तेल, स्टार्च और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य अक्सर पनीर जैसी बनावट, रंग और स्वाद तैयार करना होता है।
ऐसे उत्पाद देखने में वास्तविक पनीर जैसे लग सकते हैं। उनकी कीमत भी कई बार पारंपरिक दूध से बने पनीर की तुलना में कम हो सकती है। यही कारण है कि बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने वाले कारोबारों के लिए ऐसे विकल्प आर्थिक रूप से आकर्षक हो सकते हैं।
हालांकि, मुख्य चिंता तब पैदा होती है जब उपभोक्ता को यह स्पष्ट जानकारी न दी जाए कि वह वास्तविक दूध से बना पनीर खरीद रहा है या किसी अन्य सामग्री से तैयार पनीर जैसा उत्पाद। उपभोक्ता के लिए उत्पाद की सही पहचान और पैकेजिंग पर स्पष्ट जानकारी इसलिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
असली और संदिग्ध पनीर की पहचान कैसे करें?
उपभोक्ताओं के लिए केवल देखकर असली और नकली पनीर के बीच अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता। पनीर खरीदते समय सबसे पहले पैकेट पर लिखी सामग्री, उत्पाद की श्रेणी और निर्माता की जानकारी देखनी चाहिए। यदि उत्पाद में दूध के बजाय वनस्पति वसा, तेल या अन्य विकल्पों का उल्लेख है, तो उसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के समान नहीं माना जाना चाहिए।
पनीर की बनावट और स्वाद भी कुछ संकेत दे सकते हैं। बहुत अधिक रबड़ जैसी बनावट, असामान्य चिकनापन या स्वाद में बड़ा अंतर संदेह पैदा कर सकता है। हालांकि, केवल स्वाद या बनावट के आधार पर किसी उत्पाद को नकली घोषित करना उचित नहीं है।
कुछ घरेलू परीक्षणों के बारे में भी लंबे समय से दावे किए जाते रहे हैं। उदाहरण के लिए, गर्म करने पर पानी का अत्यधिक निकलना या असमान तरीके से पिघलना उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। इसी तरह, सोयाबीन के आटे से संबंधित कुछ घरेलू जांचों के बारे में भी जानकारी प्रसारित होती रही है। लेकिन ऐसे घरेलू परीक्षण वैज्ञानिक रूप से हर मामले में निर्णायक प्रमाण नहीं माने जा सकते।
किसी उत्पाद में यूरिया, डिटर्जेंट या अन्य मिलावट की पुष्टि के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच अधिक विश्वसनीय तरीका है। इसलिए उपभोक्ताओं को केवल घरेलू परीक्षणों पर निर्भर रहने के बजाय विश्वसनीय ब्रांड, सही लेबल और प्रमाणित स्रोत से पनीर खरीदने पर ध्यान देना चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
ओटर्स क्लब पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि भोजनालयों में इस्तेमाल होने वाले दूध उत्पादों की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ की खरीद करते समय उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर दी गई जानकारी ध्यान से पढ़नी चाहिए और संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को शिकायत करनी चाहिए।
वहीं, खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्हें केवल आपूर्तिकर्ता के दावे पर निर्भर रहने के बजाय खरीदे गए खाद्य उत्पादों की श्रेणी, प्रमाणन, लेबल और गुणवत्ता संबंधी दस्तावेजों की उचित जांच करनी चाहिए। मुंबई में चल रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर महाराष्ट्र प्रशासन अब पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना रहा है।


