महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में मोबाइल फोन को लेकर शुरू हुआ एक पारिवारिक विवाद शुक्रवार को बेहद दुखद घटना में बदल गया। तिसगांव क्षेत्र की पहाड़ी पर हुई इस घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 48 वर्षीय मुरलीधर चांगुडे, उनकी पत्नी संगीता और 19 वर्षीय बेटे कुणाल के रूप में हुई है। परिवार जाल्टा फाटा क्षेत्र में रहता था।
पुलिस के अनुसार, यह घटना वाळुज औद्योगिक क्षेत्र थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कुणाल अपने माता-पिता से नया मोबाइल फोन लेने की मांग कर रहा था। इसी बात को लेकर घर में विवाद हुआ। विवाद के बाद वह नाराज होकर तिसगांव क्षेत्र की पहाड़ी पर चला गया। बेटे के इस तरह अकेले चले जाने से चिंतित माता-पिता भी उसके पीछे पहाड़ी पर पहुंच गए।
मोबाइल फोन की मांग को लेकर हुआ विवाद
बताया गया है कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे कुणाल अपने माता-पिता से विवाद के बाद घर से निकलकर पहाड़ी की ओर चला गया। मोबाइल फोन को लेकर हुई बहस के बाद वह काफी नाराज था। परिवार को आशंका थी कि भावनात्मक स्थिति में वह अपने लिए कोई खतरनाक कदम उठा सकता है।
कुणाल के पहाड़ी पर पहुंचने के बाद उसके माता-पिता मुरलीधर और संगीता भी वहां पहुंच गए। दोनों का उद्देश्य बेटे को समझाना और उसे सुरक्षित घर वापस लाना था। वे उससे बातचीत कर स्थिति शांत करने की कोशिश कर रहे थे।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस और अग्निशमन दल के कर्मचारी भी बचाव कार्य के लिए वहां पहुंचे। स्थिति को देखते हुए कुणाल को सुरक्षित स्थान पर लाने का प्रयास शुरू किया गया।
पहाड़ी के किनारे पहुंचा युवक
बचाव दल ने कुणाल को सुरक्षित निकालने के लिए पहाड़ी के नीचे सुरक्षा जाल लगाने का प्रयास किया। हालांकि, वह लगातार पहाड़ी के किनारे अपनी स्थिति बदलता रहा। इससे बचाव दल के लिए उसके पास पहुंचना और उसे सुरक्षित पकड़ना मुश्किल हो गया।
मौके पर मौजूद लोग लगातार उसे समझाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस और अग्निशमन दल के कर्मचारी भी सावधानी से स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे थे। काफी देर तक बचाव प्रयास जारी रहे, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके।
दोपहर करीब एक बजे स्थिति अचानक गंभीर हो गई। बताया गया कि मुरलीधर अपने बेटे को समझाने और उसे सुरक्षित पीछे लाने के उद्देश्य से उसके और करीब पहुंचे। इसी दौरान कुणाल ने पहाड़ी से छलांग लगा दी।
बेटे को बचाने की कोशिश में पिता भी गिरे
बेटे को गिरते देखकर मुरलीधर ने उसे बचाने के लिए तत्काल हाथ बढ़ाया। उन्होंने कुणाल को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन इस प्रयास में दोनों अपना संतुलन खो बैठे। इसके बाद पिता और पुत्र दोनों पहाड़ी से नीचे गिर गए।
बचाव दल ने तुरंत दोनों को तलाशने और बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। लेकिन हादसे में दोनों की जान जा चुकी थी। घटना के इस मोड़ ने मौके पर मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया।
मुरलीधर ने अपने बेटे को बचाने के लिए अंतिम क्षण तक प्रयास किया, लेकिन वह स्वयं भी हादसे का शिकार हो गए। घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में शोक की स्थिति पैदा हो गई।
पति और बेटे को गिरते देख मां ने भी गंवाई जान
घटना का सबसे दुखद हिस्सा इसके कुछ ही क्षण बाद सामने आया। संगीता ने अपने पति और बेटे को पहाड़ी से गिरते हुए देखा। पुलिस के अनुसार, इस दृश्य से वह बेहद विचलित हो गईं और कुछ ही देर बाद उन्होंने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी।
इस तरह कुछ ही समय के अंतराल में परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। जिस पहाड़ी पर परिवार अपने बेटे को समझाने और उसे सुरक्षित घर वापस लाने के लिए पहुंचा था, वहीं पूरा परिवार एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।
घटना के बाद पुलिस और अग्निशमन दल ने तीनों शवों को बरामद किया। शवों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया। पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है और घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों तथा अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
परिवार और स्थानीय लोगों में शोक
घटना की खबर सामने आने के बाद परिवार के परिचितों और स्थानीय लोगों में शोक फैल गया। एक छोटे से पारिवारिक विवाद के बाद घटनाओं ने जिस तरह भयावह रूप लिया, उसने क्षेत्र के लोगों को झकझोर दिया है।
ऐसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ आमतौर पर परिवार के सदस्यों से भावनात्मक संकट में मौजूद व्यक्ति को अकेला न छोड़ने, शांतिपूर्वक बातचीत करने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपात सहायता लेने की सलाह देते हैं। विशेष रूप से जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को लेकर गंभीर संकेत दे रहा हो, तब स्थिति को सामान्य पारिवारिक विवाद समझने के बजाय तत्काल सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी होता है।
छत्रपति संभाजीनगर की यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि किसी भी पारिवारिक विवाद के दौरान भावनात्मक स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो सकती है। ऐसे समय में धैर्य, सुरक्षित दूरी, प्रशिक्षित बचावकर्मियों की सहायता और तत्काल सुरक्षा उपाय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
पुलिस द्वारा शवों को आवश्यक प्रक्रिया के लिए भेजे जाने के बाद मामले की आगे की जांच जारी है। अधिकारियों द्वारा घटना के प्रत्येक पहलू की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पहाड़ी पर घटनाक्रम किस क्रम में हुआ और बचाव के दौरान किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।


