दिल्ली के समग्र और संतुलित विकास को नई दिशा देने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 को एक दीर्घकालिक विकास खाके के रूप में सामने रखा गया है। इस योजना में राजधानी के परिवहन तंत्र, आवासीय क्षेत्रों, व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक क्षेत्रों, हरित क्षेत्रों, सांस्कृतिक विरासत और सार्वजनिक सुविधाओं को व्यापक रूप से विकसित करने की परिकल्पना की गई है। योजना का उद्देश्य बढ़ती आबादी, यातायात दबाव, पर्यावरणीय चुनौतियों और भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और टिकाऊ महानगर बनाना है।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली की लगातार बढ़ती आबादी और समग्र विकास की आवश्यकता को देखते हुए यह मास्टर प्लान राजधानी के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इसे विकसित दिल्ली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि योजना के माध्यम से भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक व्यवस्थित, सुविधाजनक और बेहतर राजधानी तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
कर्तव्य पथ को मिलेगा नया स्वरूप
मास्टर प्लान में दिल्ली के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कर्तव्य पथ के आसपास के क्षेत्र को विश्वस्तरीय सार्वजनिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही लगभग 1.25 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रस्तावित युगे युगीन राष्ट्रीय संग्रहालय को राजधानी की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए लगभग 1,500 विरासत संपत्तियों के संरक्षण का प्रस्ताव है। पुरानी ऐतिहासिक इमारतों का उनके मूल स्वरूप और चरित्र को सुरक्षित रखते हुए नए उपयोग के लिए इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। ऐसी इमारतों को संग्रहालय, पुस्तकालय, होटल, कार्यालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नरेला बनेगा शिक्षा का प्रमुख केंद्र
मास्टर प्लान में नरेला को राजधानी के प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए लगभग 138 हेक्टेयर भूमि सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के विकास के लिए आरक्षित की गई है। प्रस्तावित शिक्षा केंद्र में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों के विकास पर जोर दिया जाएगा।
इस पहल से दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए नए अवसर पैदा होने के साथ रोजगार और आवासीय विकास को भी गति मिलने की संभावना है। नरेला के योजनाबद्ध विकास से राजधानी के उत्तरी हिस्से में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के विस्तार का रास्ता खुल सकता है।
द्वारका को मिलेगा निवेश केंद्र का दर्जा
द्वारका को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार और नए निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां सूचना प्रौद्योगिकी, औद्योगिक क्षेत्रों, आंकड़ा केंद्रों और नए उद्यमों से जुड़ी गतिविधियों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के उपयोग से जुड़े नियमों को अधिक लचीला बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत बड़े खुदरा प्रतिष्ठानों, भंडारण केंद्रों, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार, साझा कार्यस्थलों और आंकड़ा केंद्रों जैसी गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इससे नए व्यवसायों और निवेश को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
600 किलोमीटर सड़क नेटवर्क का प्रस्ताव
योजना के तहत लगभग 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नियोजित शहरी विस्तार की परिकल्पना की गई है। भूमि एकत्रीकरण नीति के माध्यम से इस विस्तार को लगभग 600 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने का प्रस्ताव है।
शहरी विस्तार मार्ग-दो के आसपास 250 मीटर चौड़े उच्च घनत्व वाले विकास गलियारे की योजना बनाई गई है। इस क्षेत्र में अधिकतम 400 तक का भू-उपयोग अनुपात प्रस्तावित किया गया है। गढ़ी खासरो और इब्राहिमपुर को शामिल करने वाला क्षेत्र पी-दो क्षेत्र का सेक्टर आठ-बी पहला अधिसूचित क्षेत्र बताया गया है और इसे कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया है।
शहरी विस्तार मार्ग-एक और शहरी विस्तार मार्ग-दो के विकास से दिल्ली के भीतर तथा दिल्ली को दूसरे राज्यों से जोड़ने वाली परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
आनंद विहार, कश्मीरी गेट और सराय काले खां में परिवहन केंद्र
यात्रियों की सुविधा के लिए राजधानी में ऐसे बहु-माध्यम परिवहन केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है जहां मेट्रो, क्षेत्रीय तीव्र परिवहन, बस, स्थानीय सार्वजनिक परिवहन, पैदल मार्ग और साइकिल मार्ग एक-दूसरे से जुड़े होंगे।
आनंद विहार, कश्मीरी गेट और सराय काले खां को ऐसे प्रमुख परिवहन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही पूरे शहर में एकीकृत वाहन पार्किंग व्यवस्था लागू करने और विभिन्न श्रेणियों के विकास के लिए भू-उपयोग अनुपात संबंधी नियमों में राहत देने का प्रस्ताव है।
परिवहन की योजना, क्रियान्वयन, विकास और निगरानी के लिए एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण बनाने की भी परिकल्पना की गई है। इससे अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।
यमुना के बाढ़ क्षेत्र का होगा पर्यावरणीय पुनरुद्धार
योजना में यमुना के बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण और पर्यावरणीय पुनरुद्धार को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लगभग 1,700 हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए 13 प्रमुख परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा गया है।
यमुना के किनारे लगभग 52 किलोमीटर लंबे साइकिल मार्ग के विकास की योजना है। इसके अलावा हरित संपर्क तंत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें पर्यावरणीय गलियारे, शहरी वन, जैव विविधता उद्यान और स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण शामिल होगा।
यमुना के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए सीवेज उपचार संयंत्रों और सीवेज ढांचे का विस्तार भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य नदी में प्रदूषित जल के प्रवाह को कम करना और बाढ़ क्षेत्र की प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करना है।
व्यापारिक क्षेत्रों और मंजूरी व्यवस्था में बदलाव
मास्टर प्लान के तहत कम से कम 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले व्यापारिक केंद्रों के पुनर्विकास की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ऐसे विकास को प्रोत्साहन देने के लिए अधिक भू-उपयोग अनुपात की सुविधा दी जा सकती है। 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे मिश्रित भूमि उपयोग को भी बढ़ावा देने की योजना है।
नियमों को सरल बनाने के लिए वर्तमान में अलग-अलग उपयोग वाली भूमि की 133 श्रेणियों को घटाकर 45 करने का प्रस्ताव है। साथ ही मंजूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने और भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित नियोजन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे निर्माण और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, योजना में आवासीय कॉलोनियों, कम घनत्व वाले क्षेत्रों, शिक्षा संबंधी ढांचे, बढ़ती परिवहन जरूरतों और प्रदूषण जैसी प्रमुख चुनौतियों को ध्यान में रखा गया है। अधिक भू-उपयोग अनुपात की सुविधा से पुराने क्षेत्रों के पुनर्विकास और बेहतर भूमि उपयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली मास्टर प्लान 2047 राजधानी के भविष्य को परिवहन, शिक्षा, निवेश, विरासत संरक्षण, पर्यावरण और शहरी पुनर्विकास के व्यापक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास है। यदि प्रस्तावित परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा और प्रभावी निगरानी के साथ लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की परिवहन व्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों, सार्वजनिक सुविधाओं और हरित ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। योजना का वास्तविक प्रभाव हालांकि इसके चरणबद्ध क्रियान्वयन, भूमि उपलब्धता, प्रशासनिक समन्वय और पर्यावरणीय मानकों के प्रभावी पालन पर निर्भर करेगा।


