Monday, November 2, 2026

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कम NEET अंक से निराश छात्रा ने दी जान, महाराष्ट्र में दर्दनाक घटना ने बढ़ाई छात्रों के मानसिक दबाव की चिंता

अहिल्यानगर (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पुनर्परीक्षा (Re-Exam) में अपेक्षा से कम अंक आने के बाद 19 वर्षीय छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल परिवार के लिए असहनीय त्रासदी बन गई है, बल्कि एक बार फिर देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते मानसिक दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान अंकिता सांगले के रूप में हुई है, जो अहिल्यानगर जिले के करजत तालुका स्थित जलालपुर गांव की रहने वाली थी। अंकिता पिछले काफी समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी और ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थी। उसका सपना डॉक्टर बनने का था, जिसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही थी।

घर में अकेली थी छात्रा

करजत पुलिस स्टेशन के निरीक्षक हनुमान गायकवाड़ ने जानकारी दी कि घटना शनिवार शाम की है। उस समय अंकिता घर में अकेली थी क्योंकि उसके माता-पिता और बड़ा भाई आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर गए हुए थे। शाम लगभग 5:30 बजे पास में रहने वाले रिश्तेदार जब घर पहुंचे तो उन्होंने अंकिता को कमरे में पंखे से लटका हुआ पाया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच के दौरान घर से एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।

सुसाइड नोट में जताई निराशा

पुलिस अधिकारी के अनुसार, बरामद नोट में अंकिता ने लिखा था कि वह NEET पुनर्परीक्षा के परिणाम से बेहद निराश थी। उसने अपने माता-पिता और भाई से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। नोट में उसने स्वयं को “एक औसत छात्रा” बताया और लिखा कि वह परिवार की अपेक्षाओं को पूरा करने में असफल रही।

जांच में सामने आया कि अंकिता को NEET पुनर्परीक्षा में 166 अंक प्राप्त हुए थे, जबकि चयन के लिए निर्धारित कटऑफ 177 अंक था। मात्र 11 अंकों से पीछे रह जाने के कारण वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी।

पुलिस ने दर्ज किया आकस्मिक मृत्यु का मामला

करजत पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु (Accidental Death) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं अन्य कोई कारण तो इस घटना के पीछे नहीं था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने

इस दुखद घटना पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दिल्ली में छात्रों के आंदोलन की सफलता की खबर के बीच महाराष्ट्र से यह दुखद समाचार मिला है। उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और लगातार बनी अनिश्चितता के कारण कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं।

रोहित पवार ने छात्रों से अपील की कि किसी भी असफलता को जीवन का अंत न समझें। उन्होंने कहा कि सफलता पाने के लिए संघर्ष का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने छात्रों से अपने परिवार के बारे में सोचने और कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की अपील की।

पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी घटना

यह पहली घटना नहीं है जब NEET परीक्षा से जुड़ी निराशा ने किसी छात्र की जान ले ली हो। इससे पहले 20 जून को महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड़ तालुका के करंजी गांव के रहने वाले 21 वर्षीय यश गोसावी ने भी कथित तौर पर NEET पुनर्परीक्षा से एक दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ती चिंता

शिक्षा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता और असफलता जीवन का अंतिम सत्य नहीं होती। परिवार, शिक्षकों और समाज की यह जिम्मेदारी है कि वे छात्रों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का बोझ न डालें और कठिन समय में उनका भावनात्मक सहयोग करें। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परीक्षा परिणामों से अधिक महत्वपूर्ण छात्रों का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य है।

अंकिता की यह दुखद घटना पूरे समाज के लिए एक गंभीर संदेश छोड़ती है कि छात्रों के सपनों के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कोई छात्र निराशा, तनाव या असहनीय दबाव महसूस कर रहा हो, तो समय रहते परिवार, मित्रों, शिक्षकों या किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। जीवन किसी भी परीक्षा या परिणाम से कहीं अधिक मूल्यवान है।

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