ऑनलाइन भोजन मंगाने वाले एक ग्राहक का अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ग्राहक ने दावा किया कि देर रात जोमैटो के माध्यम से मंगाया गया उसका भोजन लंबे समय तक नहीं पहुंचा। जब उसने भोजन की स्थिति जानने के लिए आवेदन में उपलब्ध स्थान देखने की सुविधा का इस्तेमाल किया, तो कथित तौर पर उसे भोजन पहुंचाने वाले व्यक्ति की स्थिति दिखाई दी। ग्राहक का आरोप है कि वह व्यक्ति करीब 40 मिनट तक एक ही स्थान पर रुका रहा और वहां दो लोग उसके द्वारा मंगाया गया भोजन खाते हुए दिखाई दिए।
यह मामला सोशल मीडिया मंच एक्स पर उपयोगकर्ता ऋषभ कौशिक की ओर से साझा किए गए एक संदेश के बाद सामने आया। ऋषभ के अनुसार, उन्होंने रात 10 बजकर 58 मिनट पर खड़क सिंह का ढाबा से जोमैटो के जरिए भोजन मंगाया था। उनका कहना है कि काफी समय बीतने के बाद भी भोजन उनके पास नहीं पहुंचा, जबकि आवेदन में भोजन पहुंचाने वाला व्यक्ति उनके आसपास ही दिखाई दे रहा था।
भोजन की स्थिति जानने पर चौंकाने वाला दृश्य
ग्राहक के मुताबिक, जब उन्होंने अपने भोजन की स्थिति जानने के लिए स्थान देखने की सुविधा खोली, तो उन्हें भोजन पहुंचाने वाले व्यक्ति की स्थिति एक ही जगह पर काफी देर से दिखाई दी। उनका दावा है कि इस दौरान उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि दो लोग उनके द्वारा मंगाए गए भोजन का सेवन कर रहे हैं।
ऋषभ ने इस दावे के समर्थन में कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। तस्वीरों में कथित रूप से एक लाल रंग का दोपहिया वाहन सीढ़ियों के पास खड़ा दिखाई दे रहा था। उसके आसपास भोजन रखने वाले डिब्बे, पन्नी और भोजन के बचे हुए हिस्से नजर आ रहे थे। तस्वीर में एक हेलमेट भी दिखाई देने की बात कही गई।
ग्राहक का कहना है कि भोजन पहुंचाने वाले व्यक्ति की स्थिति लगभग 40 मिनट तक उसी स्थान पर बनी रही। इस कारण उन्हें संदेह हुआ कि उनके भोजन के साथ कुछ असामान्य हुआ है। हालांकि, तस्वीरों और ग्राहक द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्राहक सेवा से बातचीत का भी किया दावा
इस घटना को लेकर ऋषभ ने जोमैटो की ग्राहक सेवा से हुई कथित बातचीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उन्हें बताया गया कि उनका भोजन कथित रूप से 100 रुपये में बेच दिया गया था। हालांकि, इस बातचीत का पूरा संदर्भ और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।
ग्राहक ने अपनी शिकायत के दौरान जोमैटो की ग्राहक सेवा व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि वहां एक स्वचालित प्रणाली भी मौजूद है। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल को संबोधित करते हुए व्यंग्य किया कि यह अब केवल भोजन पहुंचाने की सेवा नहीं रह गई है, बल्कि पूरी तरह भोजन बांटने वाली व्यवस्था बन गई है।
उनकी यह टिप्पणी तेजी से फैल गई और बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कई लोगों ने जहां ग्राहक के दावे को गंभीर बताया, वहीं कुछ लोगों ने अपने साथ हुई कथित ऐसी ही घटनाएं साझा कीं।
उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
एक उपयोगकर्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए भोजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उसका कहना था कि यदि भोजन पहुंचाने वाला व्यक्ति उसे रास्ते में ले जाकर खा सकता है, तो भोजन में किसी अन्य पदार्थ की मिलावट की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उपयोगकर्ता ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए ऐसी सेवाओं के बहिष्कार की अपील तक कर दी।
एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि उसके साथ भी कई बार इसी तरह की समस्या हुई है। उसने कहा कि कुछ कर्मचारियों की कथित धोखाधड़ी के कारण पूरी कंपनी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। उसने कंपनी के संचालकों से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और शिकायतों की जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।
देर रात भोजन मंगाने को लेकर ग्राहक ने बताया अनुभव
एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि वह रात 10 बजे के बाद भोजन मंगाने पर अक्सर नकद भुगतान करना पसंद करता है। उसके अनुसार, ऐसा करने से उसे मानसिक रूप से अधिक संतुष्टि मिलती है और भोजन की स्थिति को लेकर चिंता कम रहती है।
एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि कुछ दिन पहले उसने दो डोसा मंगाए थे, लेकिन उसे केवल एक ही डोसा मिला। उसने ग्राहक सेवा से शिकायत की तो उसे एक ई-मेल पता दिया गया। उपयोगकर्ता के अनुसार, शिकायत भेजने के चार दिन बाद जवाब आया और पर्याप्त प्रमाण नहीं होने का हवाला देकर उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई।
कुछ उपयोगकर्ताओं ने ग्राहकों को सलाह दी कि ऐसी स्थिति में केवल ऑनलाइन मंच की ग्राहक सेवा पर निर्भर रहने के बजाय सीधे भोजनालय से संपर्क करना चाहिए। हालांकि, ऐसी सलाह व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है और इसे सभी मामलों के लिए आधिकारिक समाधान नहीं माना जा सकता।
जोमैटो ने मांगी आदेश की जानकारी
सोशल मीडिया पर मामला तेजी से फैलने के बाद जोमैटो की ग्राहक सहायता टीम ने ऋषभ कौशिक के संदेश पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी की ओर से उनसे निजी संदेश के माध्यम से आदेश संख्या साझा करने को कहा गया, ताकि मामले की जांच की जा सके।
कंपनी की यह प्रतिक्रिया सामने आने के बाद अब पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है। यदि ग्राहक के आरोप सही पाए जाते हैं, तो भोजन की सुरक्षित आपूर्ति, वितरण कर्मचारियों की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल यह पूरा मामला एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता के दावे और उसके द्वारा साझा की गई तस्वीरों पर आधारित है। घटना, कथित भोजन चोरी और ग्राहक सेवा से हुई बातचीत के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भोजन के साथ वास्तव में क्या हुआ था और इस पूरे घटनाक्रम में किसकी भूमिका थी।


