महाराष्ट्र के नागपुर में एक 16 वर्षीय किशोरी के कथित अपहरण और दुष्कर्म मामले में पुलिस को बड़ी सफलता एक ऐसे सुराग से मिली, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जांच के दौरान एक साधारण सा पिज्जा ऑर्डर इस पूरे मामले का सबसे अहम सुराग बन गया। इसी ऑर्डर की मदद से पुलिस उस होटल तक पहुंची, जहां आरोपी कथित रूप से किशोरी को बंधक बनाकर रखा हुआ था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किशोरी को सुरक्षित बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी 19 वर्षीय युवक है, जो महाराष्ट्र के ठाणे का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि उसने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की नाबालिग बेटी को लगभग 24 घंटे तक बंधक बनाकर रखा और इस दौरान उसके साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया।
कैसे शुरू हुई पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, किशोरी फ्रेंडशिप डे के दिन अपने घर से यह कहकर निकली थी कि वह एक दोस्त से मॉल में मिलने जा रही है। काफी देर तक घर वापस नहीं लौटने और उसका मोबाइल फोन बंद मिलने पर परिवार की चिंता बढ़ गई। इसके बाद लड़की के पिता ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की, लेकिन शुरुआती प्रयासों में न तो किशोरी का पता चल सका और न ही संदिग्ध युवक का। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी और डिजिटल जांच भी शुरू कर दी।
सोशल मीडिया से जुड़े थे दोनों
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि किशोरी और आरोपी पिछले लगभग तीन वर्षों से इंस्टाग्राम के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसके अलावा दोनों ने अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बातचीत की थी। पुलिस ने दोनों की ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की ताकि उनकी लोकेशन और बातचीत से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकें।
पिज्जा ऑर्डर बना सबसे बड़ा सुराग
जांच के दौरान पुलिस को सबसे महत्वपूर्ण जानकारी तब मिली जब आरोपी ने उस होटल में पिज्जा ऑर्डर किया, जहां वह कथित रूप से किशोरी को लेकर रुका हुआ था। पुलिस ने इस ऑर्डर की डिलीवरी लोकेशन को ट्रैक किया और सीधे संबंधित होटल पहुंच गई।
होटल के कमरे में पहुंचकर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह सुराग समय पर नहीं मिलता, तो जांच में और अधिक समय लग सकता था।
पुलिस का दावा- धमकियों के जरिए बना रखा था दबाव
प्रारंभिक जांच में पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी किशोरी को मानसिक रूप से लगातार धमका रहा था। अधिकारियों के अनुसार, उसने कथित तौर पर निजी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उस पर दबाव बनाया और उसे अपने नियंत्रण में रखा।
पुलिस का कहना है कि इसी मानसिक दबाव और डर का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित अपराध को अंजाम दिया। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगे।
मोबाइल फोन पर भी रखता था नजर
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी कथित रूप से किशोरी के मोबाइल फोन पर भी नियंत्रण रखता था। पुलिस को संदेह है कि उसने पैरेंटल कंट्रोल जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर उसकी गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखी।
इस मामले में किशोरी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ उसके फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी जुटाई जा सके।
पूछताछ में नहीं कर रहा सहयोग
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं कर रहा है। शुरुआत में उसने अपनी पहचान “आकाश मेहरा” बताई थी, लेकिन बाद में जांच में उसकी वास्तविक पहचान निर्मय उर्फ आकाश माधव पाखरे के रूप में सामने आई।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अपने मोबाइल फोन का पासवर्ड बताने से भी इनकार कर दिया है। ऐसे में मोबाइल से डेटा प्राप्त करने के लिए साइबर विशेषज्ञों और फोरेंसिक टीम की मदद ली जा रही है।
हथकड़ी और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से हथकड़ी, कुछ हथियार और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद किए हैं। इन सभी वस्तुओं को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन वस्तुओं की रिपोर्ट से मामले की जांच में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
हिरासत में विशेष सुविधाओं की खबरों पर पुलिस का जवाब
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि आरोपी ने पुलिस हिरासत में पिज्जा और आरामदायक बिस्तर की मांग की थी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आरोपी को किसी प्रकार की विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और आरोपी के साथ नियमों के अनुसार व्यवहार किया जा रहा है।
जांच अभी जारी
पुलिस ने बताया कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्ट की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।


