भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार को मजबूत करने और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने गुरुवार को कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के तहत भारत के सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors – FIIs) को ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर आयकर छूट देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत के सरकारी प्रतिभूति बाजार (Government Securities Market) में विदेशी निवेश बढ़ेगा और लंबी अवधि के स्थिर निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
विदेशी निवेशकों को किन आय पर मिलेगी छूट?
नए प्रावधान के अनुसार, भारत सरकार द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों को मिलने वाली दो प्रमुख आय पर टैक्स छूट दी जाएगी—
सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय
सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, हस्तांतरण या विनिमय से होने वाला पूंजीगत लाभ
यह छूट आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची-4 (Schedule IV) में किए गए संशोधनों के तहत लागू होगी।
हालांकि, इस टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए विदेशी निवेशकों को सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप और प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
पहले कितना टैक्स देना पड़ता था?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से पहले भारत सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों की आय पर अलग-अलग दरों से कर लगाया जाता था।
पहले—
सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता था।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर सामान्यतः 30 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाता था।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लागू था।
सरकार ने बाद में 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद अर्जित होने वाली सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़ी ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से मुक्त करने का निर्णय लिया।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य भारत की कर व्यवस्था को उन देशों के समान बनाना है जहां सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल टैक्स नियम मौजूद हैं।
सरकार के अनुसार, टैक्स राहत से भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश का आधार व्यापक होगा और लंबे समय के निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा।
इससे विशेष रूप से निम्नलिखित संस्थाओं को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है—
पेंशन फंड
बीमा कंपनियां
सॉवरेन वेल्थ फंड
बड़े वैश्विक निवेश संस्थान
इन संस्थाओं को आमतौर पर स्थिर और दीर्घकालिक निवेशक माना जाता है।
सरकारी बॉन्ड बाजार को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से भारत के सरकारी प्रतिभूति बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ सकती है। अधिक निवेशकों की मौजूदगी से बॉन्ड बाजार का विस्तार होगा और सरकार के लिए धन जुटाने के विकल्प भी मजबूत होंगे।
सरकारी बॉन्ड किसी भी देश की वित्तीय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इनमें विदेशी निवेश बढ़ने से वैश्विक निवेश समुदाय में भारत की वित्तीय बाजारों की विश्वसनीयता भी मजबूत हो सकती है।
पहले अध्यादेश के जरिए लाई गई थी राहत
यह टैक्स छूट पहले सरकार द्वारा आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से लागू की गई थी। अब लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद इसे कानूनी आधार मिल गया है।
नए कानून के लागू होने के बाद 2026 के अध्यादेश को समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, अध्यादेश के तहत पहले से किए गए सभी कार्य नए कानून के तहत वैध माने जाएंगे।
राज्यसभा की भूमिका सीमित
यह विधेयक मनी बिल (Money Bill) के रूप में पेश किया गया है। संविधान के अनुसार, मनी बिल में राज्यसभा की भूमिका केवल सुझाव देने तक सीमित होती है।
राज्यसभा विधेयक पर सिफारिशें दे सकती है, लेकिन लोकसभा उन सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार रखती है। उच्च सदन इस प्रकार के विधेयक को संशोधित या रोक नहीं सकता।
विदेशी संस्थागत निवेशक और सरकारी प्रतिभूति की परिभाषा
विधेयक में “Foreign Institutional Investor” की परिभाषा आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 210(6)(a) के अनुसार निर्धारित की गई है।
वहीं, “Government Security” का अर्थ सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 में दी गई परिभाषा के अनुसार होगा।
इसके अलावा, विधेयक में बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (Bank for International Settlements) को भी सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर समान टैक्स छूट देने का प्रावधान किया गया है।
1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे प्रावधान
जहां अलग से कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है, वहां इस कानून के प्रावधानों को 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि यह सुधार भारत के बॉन्ड बाजार को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाएगा और देश में विदेशी पूंजी के स्थायी प्रवाह को बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष
लोकसभा द्वारा पारित यह विधेयक भारत के वित्तीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ से संबंधित टैक्स छूट देने से भारत वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बाजार बन सकता है।
सरकार का लक्ष्य केवल विदेशी निवेश बढ़ाना नहीं, बल्कि सरकारी प्रतिभूति बाजार को अधिक गहरा, स्थिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक बनाना है। आने वाले समय में इस नीति का प्रभाव भारत के बॉन्ड बाजार और विदेशी पूंजी प्रवाह पर दिखाई दे सकता है।


