Saturday, August 15, 2026

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पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी हो सकती है यह आदत

पेट में जलन, खट्टी डकार, गैस, पेट फूलना, भारीपन और पाचन से जुड़ी दूसरी परेशानियां आज कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गई हैं। ऐसी समस्याओं से राहत पाने के लिए लोग अक्सर अलग-अलग तरह के आहार, पेय पदार्थ और पोषक तत्वों का सहारा लेते हैं। हालांकि, एक पोषण विशेषज्ञ के अनुसार, अपनी दिनचर्या में किया गया एक छोटा बदलाव भी पाचन से जुड़ी कुछ परेशानियों में मदद कर सकता है।

पोषण विशेषज्ञ पारिधि ने हाल ही में साझा की गई जानकारी में रात का खाना जल्दी खाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस समय केवल एक आदत में बदलाव कर सकता है, तो उसे सबसे पहले रात के भोजन का समय आगे करने पर ध्यान देना चाहिए।

उनके अनुसार, रात का खाना सोने के काफी करीब खाने के बजाय सोने से लगभग तीन से चार घंटे पहले पूरा कर लेना बेहतर हो सकता है।

देर से भोजन करने पर क्यों बढ़ सकती है परेशानी

पोषण विशेषज्ञ के मुताबिक, पाचन तंत्र की गतिविधि और पेट में अम्ल का निर्माण दिन के अलग-अलग समय पर बदलता रहता है। शाम और रात के समय शरीर धीरे-धीरे विश्राम की अवस्था में जाने लगता है।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति देर रात भोजन करता है और उसके कुछ ही समय बाद बिस्तर पर चला जाता है, तो भोजन को पचाने के लिए शरीर को पर्याप्त समय नहीं मिल सकता। भोजन के तुरंत बाद लेटने से कुछ लोगों में पेट की सामग्री और अम्ल ऊपर की ओर आने की समस्या भी बढ़ सकती है।

इसी वजह से कुछ लोग सुबह उठने पर पेट में जलन, खटास या गले के पिछले हिस्से में खराश जैसा अनुभव कर सकते हैं। कई बार लोग इसे गले के संक्रमण से जोड़ लेते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह पेट के अम्ल के ऊपर आने से संबंधित हो सकता है।

हालांकि, हर व्यक्ति में इसके कारण अलग हो सकते हैं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

सोने से कितने घंटे पहले करें रात का भोजन

पोषण विशेषज्ञ ने रात के भोजन और सोने के समय के बीच पर्याप्त अंतर रखने की सलाह दी है। उनके अनुसार, रात का भोजन सोने से लगभग तीन से चार घंटे पहले कर लेना एक उपयोगी आदत हो सकती है।

इसके साथ ही भोजन करने के तुरंत बाद लेटने से बचना चाहिए। भोजन और सोने के बीच पर्याप्त समय रखने से शरीर को पाचन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिक अवसर मिल सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रात में लगभग ग्यारह बजे सोता है, तो उसे रात का भोजन लगभग सात से आठ बजे के बीच पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि, भोजन का सही समय हर व्यक्ति की दिनचर्या, काम के समय और सोने-जागने की आदत पर निर्भर करता है।

पेट फूलने और भारीपन में भी मिल सकती है मदद

जल्दी रात का भोजन केवल पेट की जलन से जुड़ी समस्या तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पोषण विशेषज्ञ के अनुसार, भोजन के समय में बदलाव कुछ लोगों में पेट फूलने, भोजन के बाद भारीपन और मल त्याग से जुड़ी अनियमितताओं को कम करने में भी मदद कर सकता है।

देर रात भारी भोजन करने से कुछ लोगों को पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। यदि इसके तुरंत बाद सोने की आदत हो, तो यह असहजता और बढ़ सकती है।

इसलिए रात में हल्का और संतुलित भोजन करना तथा सोने से पहले पर्याप्त अंतर रखना पाचन के लिए बेहतर दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

आंतों की प्राकृतिक गतिविधि भी है महत्वपूर्ण

पाचन तंत्र में भोजन के बीच एक विशेष प्रकार की प्राकृतिक गतिशीलता होती है, जिसे प्रवासी मोटर जटिलता कहा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तब सक्रिय होती है, जब पेट अपेक्षाकृत खाली होता है। इसका संबंध पाचन तंत्र में बची सामग्री को आगे बढ़ाने वाली गतिविधियों से है।

रात में देर से भोजन करने की आदत इस प्राकृतिक खाली अवधि को कम कर सकती है। यदि कोई व्यक्ति भोजन करने के तुरंत बाद सो जाता है और लगातार देर रात खाना खाता है, तो पाचन तंत्र को भोजन के बीच मिलने वाला खाली समय कम हो सकता है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को केवल पेट की सफाई करने वाली व्यवस्था के रूप में समझना सही नहीं होगा। पाचन तंत्र की गतिविधियां कई जटिल प्रक्रियाओं से मिलकर बनी होती हैं।

रात में पाचन की गति बदलती है

शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार दिन और रात के दौरान पाचन तंत्र की गतिविधियों में बदलाव होता रहता है। देर रात भारी भोजन करने पर कुछ लोगों को इसे पचाने में असहजता महसूस हो सकती है।

विशेष रूप से तला हुआ, बहुत मसालेदार या अत्यधिक मात्रा में भोजन करने के बाद तुरंत सोने से पेट में भारीपन, जलन या खट्टी डकार जैसी शिकायत हो सकती है।

इसलिए केवल भोजन का समय ही नहीं, बल्कि भोजन की मात्रा और प्रकृति भी महत्वपूर्ण है। रात में हल्का भोजन और उचित मात्रा लेना पाचन संबंधी परेशानी से बचने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम हो सकता है।

जल्दी रात का भोजन शुरू करने के आसान तरीके

जिन लोगों की आदत देर से भोजन करने की है, उनके लिए अचानक बहुत जल्दी खाना शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में दिनचर्या में छोटे बदलाव किए जा सकते हैं।

सबसे पहले रात के भोजन का समय प्रतिदिन लगभग पंद्रह से तीस मिनट पहले करने की कोशिश की जा सकती है। कुछ दिनों में शरीर नई दिनचर्या के अनुकूल हो सकता है।

यदि संभव हो तो रात का भोजन सोने से कम से कम तीन घंटे पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा जा सकता है। भोजन के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने के बजाय कुछ समय सामान्य गतिविधियों में बिताया जा सकता है।

इसके अलावा, रात में बहुत अधिक मात्रा में भोजन करने से बचना और अपनी व्यक्तिगत सहनशीलता के अनुसार मसालेदार तथा बहुत वसायुक्त भोजन को सीमित करना भी उपयोगी हो सकता है।

रात आठ बजे तक भोजन करना जरूरी नहीं

पोषण विशेषज्ञ की सलाह में जहां संभव हो, रात आठ बजे से पहले भोजन पूरा करने का सुझाव दिया गया है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए रात आठ बजे ही भोजन का अंतिम समय होना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति का काम देर रात तक चलता है या उसकी नींद का समय अलग है, तो भोजन का समय भी उसी के अनुसार तय किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना है।

इसलिए किसी निश्चित घड़ी के समय को नियम बनाने के बजाय अपनी दिनचर्या के अनुसार भोजन और नींद के बीच तीन से चार घंटे का अंतर रखना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

केवल जल्दी भोजन करना हर समस्या का इलाज नहीं

पेट की जलन, अम्ल के ऊपर आने, लगातार पेट फूलने या मल त्याग में परेशानी के कई कारण हो सकते हैं। भोजन का समय उनमें से केवल एक संभावित कारक हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार या लंबे समय तक पेट में जलन रहती है, निगलने में परेशानी होती है, लगातार उल्टी होती है, बिना कारण वजन कम हो रहा है, मल में खून दिखाई देता है या तेज दर्द रहता है, तो चिकित्सक से परामर्श करना जरूरी है।

इसी तरह पहले से किसी पाचन संबंधी बीमारी का उपचार चल रहा हो तो केवल भोजन का समय बदलकर दवाओं या चिकित्सकीय सलाह को बंद नहीं करना चाहिए।

दो सप्ताह तक आदत आजमाने की सलाह

पोषण विशेषज्ञ ने इस बदलाव को कुछ समय तक लगातार अपनाकर उसके प्रभाव को देखने की सलाह दी है। दो सप्ताह तक रात का भोजन पहले करने, भोजन के बाद तुरंत न लेटने और सोने से पर्याप्त अंतर रखने से व्यक्ति यह देख सकता है कि उसकी व्यक्तिगत पाचन संबंधी शिकायतों में कोई बदलाव आता है या नहीं।

हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। किसी को जल्दी भोजन करने से लाभ महसूस हो सकता है, जबकि किसी अन्य व्यक्ति को अपनी समस्या के लिए भोजन की मात्रा, खाद्य पदार्थों या अन्य जीवनशैली संबंधी आदतों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

कुल मिलाकर, रात का भोजन जल्दी करना एक सरल और कम खर्च वाला जीवनशैली बदलाव है, जिसे कई लोग आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। पेट की जलन, अम्ल के ऊपर आने और पेट फूलने जैसी समस्याओं में इससे कुछ लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षणों के लिए चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह सबसे महत्वपूर्ण है।

पाठकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यह किसी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, लगातार लक्षण या पहले से चल रहे उपचार के संबंध में योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।

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