Monday, November 2, 2026

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असम बाढ़ संकट: 68 मौतें, लाखों लोग अब भी प्रभावित

असम में बाढ़ की स्थिति में सोमवार को कुछ हद तक सुधार देखने को मिला है, लेकिन राज्य के हजारों परिवारों के लिए संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ से किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली, जिससे इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 68 पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के छह जिलों में अब भी 4,45,495 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों को तेज़ी से जारी रखे हुए है ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

ASDMA द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार इस समय शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। रविवार तक राज्य में प्रभावित लोगों की संख्या 5.24 लाख से अधिक थी, जबकि सोमवार को इसमें कुछ कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद लाखों लोग अब भी अपने घरों से विस्थापित हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है।

इस वर्ष की बाढ़ में सबसे अधिक प्रभावित जिला चराइदेव है, जहां 1,88,404 लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। इसके बाद शिवसागर जिले में 1,44,461 लोग प्रभावित हैं, जबकि जोरहाट में 74,458 लोगों पर बाढ़ का असर बना हुआ है। अन्य प्रभावित जिलों में भी हजारों परिवार राहत और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता के लिए लगातार राहत कार्य चला रहे हैं। वर्तमान में राज्यभर में 90 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 28,695 विस्थापित लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 94 राहत वितरण केंद्र भी सक्रिय हैं, जहां जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाया जा रहा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान के लिए कई एजेंसियां मिलकर कार्य कर रही हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा सिविल डिफेंस के जवान लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने बचाव कार्यों के लिए 67 नावों की तैनाती की है, जिनकी मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है और आवश्यक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।

हालांकि जलस्तर में कुछ कमी आई है, लेकिन कई नदियां अब भी खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं। ASDMA के अनुसार धनसिरी (दक्षिण) नदी गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ क्षेत्र में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 37,139.52 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है। खेतों में पानी भरे रहने के कारण किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

पशुपालन क्षेत्र को भी बाढ़ ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। ASDMA के आंकड़ों के अनुसार अब तक 26,679 पशु बाढ़ के पानी में बह चुके हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों में पशुधन किसानों की आय का प्रमुख स्रोत होता है, इसलिए इस नुकसान से हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

बाढ़ ने केवल लोगों और कृषि को ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। विभिन्न जिलों से सड़कें, पुल, मकान और अन्य सार्वजनिक ढांचे क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन इन क्षतिग्रस्त मार्गों को जल्द से जल्द बहाल करने का प्रयास कर रहा है।

राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और सभी जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी राहत शिविरों में लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण रखा जा सके। स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जलस्तर में कमी आने से स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह सामान्य हालात बनने में अभी समय लगेगा। यदि आने वाले दिनों में भारी बारिश नहीं होती है तो राहत कार्यों में और तेजी आएगी तथा प्रभावित लोग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट सकेंगे।

फिलहाल असम के लाखों लोगों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरक्षित आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका की बहाली है। प्रशासन, आपदा राहत एजेंसियां और स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने में जुटे हुए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित लोगों को राहत नहीं मिल जाती और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते, तब तक राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।

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