फुकेत (थाईलैंड) से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई भीषण टर्बुलेंस का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब इस घटना से जुड़े नए वीडियो और तस्वीरें सामने आए हैं, जिन्होंने विमान के अंदर मौजूद यात्रियों के लिए उस पल की भयावहता को उजागर कर दिया है। वायरल हो रहे इन वीडियो में देखा जा सकता है कि तेज झटकों के कारण विमान के केबिन की छत के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ पैनल अपनी जगह से निकल गए। वहीं, यात्री घबराए हुए नजर आए और कई लोग अपनी सीटों से उछल गए।
जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया का एयरबस A320neo विमान मंगलवार सुबह फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरकर अपने निर्धारित मार्ग पर था। उड़ान के दौरान अचानक विमान बेहद तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गया, जिसके कारण विमान लगभग 300 फीट तक नीचे गिर गया। हालांकि कुछ ही क्षणों बाद पायलट ने विमान को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया और सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह 11:07 बजे लैंड कराया।
विमान के अंदर मचा हड़कंप
घटना के बाद सामने आए वीडियो में केबिन के अंदर का दृश्य बेहद चिंताजनक दिखाई देता है। कई यात्रियों के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा है। विमान के अंदर सामान इधर-उधर बिखरा हुआ था और छत के कई हिस्सों में दरारें एवं क्षति दिखाई दी। कुछ वीडियो में यात्री एक-दूसरे की मदद करते हुए और हालात को समझने की कोशिश करते नजर आए।
यात्रियों के अनुसार, विमान अचानक इतनी तेजी से नीचे आया कि कई लोग अपनी सीटों से उछलकर ऊपर के हिस्से से टकरा गए। कुछ यात्रियों ने बताया कि विमान एक तरफ झुक गया था, जिससे अंदर बैठे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। एक यात्री ने दावा किया कि अचानक आए तेज झटके के कारण एक व्यक्ति का कान का पर्दा भी फट गया।
17 लोग हुए घायल
एयर इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि उड़ान के दौरान अचानक ऊंचाई में गिरावट आई थी, लेकिन कुछ ही देर में विमान स्थिर हो गया और यात्रा सामान्य रूप से जारी रही। विमान में कुल 137 यात्री और 8 चालक दल के सदस्य मौजूद थे।
इस घटना में कुल 17 लोग घायल हुए, जिनमें 13 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य शामिल हैं। विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया। एयर इंडिया ने बताया कि इनमें से पांच यात्रियों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि अन्य का उपचार जारी है।
वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जानकारी दी कि आठ यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों को विस्तृत चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंत्रालय के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है।
केबिन की छत को हुआ नुकसान
घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में विमान की छत पर लगे ओवरहेड पैनल क्षतिग्रस्त दिखाई दिए। कुछ हिस्से अपनी जगह से निकल गए थे, जबकि कई स्थानों पर स्पष्ट प्रभाव के निशान देखे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी क्षति यह दर्शाती है कि टर्बुलेंस की तीव्रता काफी अधिक थी।
यात्रियों ने बताया कि कई लोगों के सिर विमान की छत से टकरा गए, जिससे उन्हें चोटें आईं। कुछ लोग सीट बेल्ट लगाए हुए थे, इसलिए वे गंभीर चोटों से बच गए, जबकि जो यात्री उस समय सीट बेल्ट नहीं लगाए थे, उन्हें ज्यादा झटके लगे।
DGCA ने शुरू की विस्तृत जांच
घटना के बाद भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के तहत विमान को हैंगर में ले जाकर उसकी तकनीकी जांच की जा रही है। साथ ही विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) को सुरक्षित कर लिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अचानक ऊंचाई में गिरावट किस कारण हुई।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। मंत्रालय और DGCA दोनों इस पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
घायलों से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू, नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा और DGCA के महानिदेशक वीर विक्रम यादव दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल यात्रियों और उनके परिजनों से मुलाकात कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों ने मेदांता अस्पताल का भी दौरा किया और अस्पताल प्रशासन तथा एयर इंडिया के अधिकारियों के साथ समन्वय कर घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
एयर इंडिया ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया
एयर इंडिया ने कहा है कि घटना की जानकारी सभी संबंधित नियामक एजेंसियों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत दे दी गई है। कंपनी पूरी तरह से DGCA की जांच में सहयोग कर रही है। एयरलाइन ने यह भी बताया कि विमान निर्माता एयरबस को भी घटना की सूचना भेज दी गई है। कंपनी की विशेष टीमें अस्पतालों में मौजूद हैं और घायल यात्रियों व उनके परिवारों के लगातार संपर्क में हैं ताकि उन्हें आवश्यक सहायता और देखभाल मिलती रहे।


