टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेब्रेमारियम को कंपनी का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब एयर इंडिया कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। कंपनी लगातार वित्तीय दबाव, परिचालन संबंधी समस्याओं और नियामकीय निगरानी के बीच अपने कारोबार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
बुधवार को एयर इंडिया ने आधिकारिक रूप से इस नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा की। नए सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमारियम विमानन उद्योग में लंबे अनुभव के साथ एयर इंडिया की कमान संभाल रहे हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे कंपनी के पुनर्गठन और विस्तार की रणनीति को नई दिशा देंगे तथा एयर इंडिया को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने एयर इंडिया के पूर्व सीईओ कैंपबेल विल्सन का स्थान लिया है। न्यूजीलैंड के रहने वाले कैंपबेल विल्सन वर्ष 2022 में एयर इंडिया से जुड़े थे। उन्हें टाटा समूह द्वारा एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद कंपनी को नई पहचान देने और उसके पुनरुद्धार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले वह सिंगापुर एयरलाइंस समूह में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके थे।
एयर इंडिया ने पहले ही जानकारी दी थी कि कैंपबेल विल्सन ने वर्ष 2024 में कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को अपने पद से हटने के फैसले की सूचना दे दी थी। तय योजना के अनुसार अब उन्होंने पद छोड़ दिया है और उनकी जगह टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने कार्यभार संभाल लिया है।
नए सीईओ ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब एयर इंडिया कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। वर्ष 2025 में हुई एक विमान दुर्घटना के बाद एयरलाइन की सुरक्षा और संचालन प्रक्रियाओं पर नियामक एजेंसियों की निगरानी काफी बढ़ गई है। इस दुर्घटना के बाद विमानन नियामकों ने एयर इंडिया के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा शुरू की थी।
इसके अलावा कंपनी को लगातार वित्तीय घाटे का भी सामना करना पड़ रहा है। हालांकि टाटा समूह एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और बेड़े के आधुनिकीकरण, नई उड़ानों तथा यात्री सेवाओं में सुधार पर काम कर रहा है, लेकिन बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा के कारण लाभप्रदता हासिल करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एयर इंडिया की परिचालन चुनौतियों में एक और महत्वपूर्ण कारण पाकिस्तान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग पर लगाया गया प्रतिबंध भी है। इस प्रतिबंध के चलते एयर इंडिया की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान समय बढ़ने के साथ ईंधन की खपत और परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर कंपनी के व्यावसायिक प्रदर्शन पर पड़ रहा है।
इन सभी परिस्थितियों के बीच टेवोल्डे गेब्रेमारियम का अनुभव एयर इंडिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस को अफ्रीका की सबसे सफल और तेजी से बढ़ती एयरलाइंस में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके नेतृत्व में एयरलाइन ने अपने बेड़े का विस्तार किया, नए अंतरराष्ट्रीय मार्ग शुरू किए और वैश्विक विमानन बाजार में मजबूत पहचान बनाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया को भी अब ऐसे ही अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है, जो कंपनी की परिचालन दक्षता बढ़ाने, वित्तीय प्रदर्शन सुधारने और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सके। टाटा समूह पहले से ही एयर इंडिया के आधुनिकीकरण, नई पीढ़ी के विमानों की खरीद, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है।
नए सीईओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को सुधारना, नियामकीय मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों का भरोसा और अधिक मजबूत करना होगी। साथ ही उन्हें बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एयर इंडिया को एक विश्वस्तरीय एयरलाइन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी।
एयर इंडिया का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन के साथ कंपनी अपने परिवर्तन कार्यक्रम को और गति देगी। टाटा समूह के दीर्घकालिक विजन के तहत एयर इंडिया को आधुनिक, सुरक्षित, लाभदायक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरलाइन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में टेवोल्डे गेब्रेमारियम की नियुक्ति को एयर इंडिया के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


