आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे रहना आम बात हो गई है। सुबह काम के लिए कुर्सी पर बैठने से लेकर घर लौटने के बाद कई घंटे सोफे पर बैठकर मोबाइल देखने या दूरदर्शन देखने तक, दिन का बड़ा हिस्सा बिना अधिक शारीरिक गतिविधि के बीत सकता है। लंबे समय तक बैठने की यह आदत केवल शरीर की मुद्रा को प्रभावित नहीं करती, बल्कि मांसपेशियों, रक्त संचार, वजन और हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखना जरूरी है। चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर के छोटे-मोटे काम करना और बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलना शरीर की गतिविधि को बनाए रखने में मदद करता है। इसके विपरीत, लगातार कई घंटों तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से शरीर की ऊर्जा खपत काफी कम हो जाती है।
लंबे समय बैठने पर शरीर में क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठा रहता है, तो शरीर की मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है। चलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधियों के दौरान शरीर लगातार ऊर्जा खर्च करता है, लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहने पर यह प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है।
शारीरिक गतिविधि कम होने का असर समय के साथ स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय जीवनशैली को हृदय संबंधी बीमारियों सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। इसलिए केवल कुछ समय व्यायाम कर लेना पर्याप्त नहीं माना जाता; पूरे दिन बैठे रहने के समय को कम करना भी महत्वपूर्ण है।
वजन बढ़ने का खतरा
लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान शरीर बहुत कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि भोजन से मिलने वाली ऊर्जा शरीर की जरूरत से अधिक हो और उसका पर्याप्त उपयोग न हो, तो अतिरिक्त ऊर्जा शरीर में वसा के रूप में जमा हो सकती है।
समय के साथ यह वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। बढ़ा हुआ वजन आगे चलकर उच्च रक्तचाप और दूसरे चयापचय संबंधी विकारों के खतरे को बढ़ा सकता है। मधुमेह का दूसरा प्रकार भी ऐसे जोखिमों से जुड़ा हुआ है।
इसलिए वजन नियंत्रित रखने के लिए केवल भोजन पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। दिनभर में नियमित रूप से शरीर को सक्रिय रखना भी जरूरी है।
कमर और गर्दन में दर्द की बड़ी वजह
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले लोगों में कमर, गर्दन और कंधों में दर्द आम समस्या बन सकती है। विशेष रूप से वे लोग जो लगातार कंप्यूटर या अन्य उपकरणों के सामने बैठे रहते हैं, उन्हें शरीर की मुद्रा पर ध्यान देना चाहिए।
गर्दन को लगातार आगे की ओर झुकाकर रखना, कंधों में तनाव बनाए रखना या पीठ को उचित सहारा न देना मांसपेशियों में खिंचाव और असहजता पैदा कर सकता है।
यदि व्यक्ति रोजाना कई घंटे गलत मुद्रा में बैठता है, तो धीरे-धीरे दर्द और अकड़न की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए काम करते समय पीठ को उचित सहारा देना, गर्दन को बहुत आगे न झुकाना और शरीर को यथासंभव संतुलित मुद्रा में रखना उपयोगी है।
पैरों में भारीपन और असहजता
लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से कुछ लोगों को पैरों में भारीपन, खिंचाव या असहजता महसूस हो सकती है। लंबे सफर के दौरान भी ऐसी परेशानी देखने को मिलती है, खासकर जब व्यक्ति लगातार कई घंटे तक अपनी स्थिति नहीं बदलता।
कार्यालय में काम करने वालों के लिए बीच-बीच में उठना और कुछ देर चलना उपयोगी आदत हो सकती है। लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय थोड़े अंतराल पर शरीर की स्थिति बदलने से मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिलती है।
यदि पैरों में लगातार या गंभीर सूजन, दर्द अथवा अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
क्या रोज व्यायाम करना पर्याप्त है?
कई लोगों का मानना है कि यदि वे प्रतिदिन व्यायाम करते हैं, तो दिनभर बैठे रहने से होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाती है। नियमित व्यायाम निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कम करना भी जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति का काम ऐसा है जिसमें उसे कई घंटे कुर्सी पर बैठना पड़ता है, तो वह हर घंटे कुछ मिनट के लिए उठकर चल सकता है। पानी लेने के लिए स्वयं उठकर जाना, फोन पर बातचीत करते समय कुछ देर खड़े रहना या कार्यालय में थोड़ी दूरी तक पैदल जाना आसान उपाय हो सकते हैं।
सीढ़ियों का इस्तेमाल करना भी दैनिक गतिविधि बढ़ाने का एक सरल तरीका हो सकता है, बशर्ते व्यक्ति की शारीरिक स्थिति इसकी अनुमति देती हो।
घर पर भी कम करें बैठने का समय
लंबे समय तक बैठने की समस्या केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है। घर पहुंचने के बाद कई लोग घंटों सोफे पर बैठकर मोबाइल चलाते हैं या दूरदर्शन देखते हैं। इससे दिनभर की निष्क्रियता और बढ़ सकती है।
घर पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर चलना अच्छी आदत हो सकती है। परिवार के किसी सदस्य से बातचीत करते समय कमरे में टहलना, फोन पर बात करते हुए चलना या छोटे घरेलू कामों में भाग लेना दैनिक गतिविधि बढ़ाने के आसान तरीके हैं।
घर के काम जैसे सामान व्यवस्थित करना, कपड़े तह करना, पौधों की देखभाल करना या कमरे की हल्की सफाई करना भी शरीर को कुछ अतिरिक्त गतिविधि दे सकते हैं।
हर घंटे कुछ कदम चलने की आदत
लंबे समय तक बैठने से बचने का एक सरल तरीका यह है कि व्यक्ति नियमित अंतराल पर अपनी कुर्सी से उठे। यदि काम की प्रकृति अनुमति देती है, तो हर घंटे कुछ मिनट चलने की आदत बनाई जा सकती है।
इसके लिए किसी कठिन व्यायाम की आवश्यकता नहीं होती। थोड़ी देर चलना, खड़ा होना या शरीर की स्थिति बदलना भी लगातार बैठे रहने को तोड़ सकता है।
जो लोग कार्यालय में लगातार काम करते हैं, वे अपने दिन की योजना इस तरह बना सकते हैं कि कुछ काम बैठकर और कुछ काम खड़े होकर किए जाएं। हालांकि यह व्यक्ति के कार्यस्थल और जिम्मेदारियों पर निर्भर करेगा।
छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा फर्क
स्वास्थ्य के लिए हर दिन घंटों कठिन व्यायाम करना ही एकमात्र उपाय नहीं है। दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव भी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, थोड़ी दूरी के लिए पैदल जाना, पानी पीने के लिए उठना, घर के छोटे काम स्वयं करना और लंबे समय तक एक ही स्थान पर न बैठना ऐसी सरल आदतें हैं जिन्हें दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबे समय तक बैठे रहने को सामान्य दिनचर्या का स्थायी हिस्सा न बनने दिया जाए। नियमित गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली मिलकर शरीर को बेहतर ढंग से काम करने में मदद करते हैं।
इसलिए यदि आपका दिन अधिकांश समय कुर्सी या सोफे पर बीतता है, तो आज से ही अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे सक्रिय अंतराल शामिल करना शुरू करें। लगातार बैठे रहने के बजाय थोड़ी देर उठना, चलना और शरीर को सक्रिय रखना लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए उपयोगी कदम हो सकता है।


