Tuesday, August 25, 2026

Creating liberating content

দার্জিলিঙে রোপওয়ে, সুন্দরবনে প্রমোদতরী!...

পাহাড় থেকে সমুদ্র, জঙ্গল থেকে নদী—পশ্চিমবঙ্গের পর্যটনকে নতুন করে সাজাতে একগুচ্ছ বড় পরিকল্পনা...

ক্রিকেটে ফিরছেন অনয়া বাঙ্গার!...

দীর্ঘ বিরতির পর ফের ক্রিকেট মাঠে ফিরতে চলেছেন অনয়া বাঙ্গার। প্রাক্তন ভারতীয় ক্রিকেটার...

স্ত্রীর কামড়ে স্বামী SSKM-এ!...

কলকাতার SSKM Hospital-এর একটি OPD টিকিট ঘিরে সোশ্যাল মিডিয়ায় শুরু হয়েছে তুমুল চর্চা।...

সাত বছর পর ভারতে...

চিনের প্রেসিডেন্ট শি জিনপিংকে ঘিরে ফের বড় কূটনৈতিক জল্পনা। আগামী ১২ ও ১৩...
Homeराष्ट्रीयस्वास्थ्यहृदय रोग विशेषज्ञ...

हृदय रोग विशेषज्ञ ने परिष्कृत तेल से सावधानी की सलाह दी

रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेल और वसा को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कौन-सा तेल हृदय के लिए बेहतर है, किस वसा का इस्तेमाल सीमित करना चाहिए और खाना पकाने के लिए किस विकल्प को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, इन सवालों को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। इसी बीच दिल्ली के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक चोपड़ा ने परिष्कृत तेलों के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर लोगों को सावधान किया है और कुछ ऐसे विकल्प बताए हैं जिन्हें वे रोजमर्रा के भोजन में बेहतर मानते हैं।

डॉ. चोपड़ा ने 24 अगस्त को साझा किए गए एक सामाजिक माध्यम के वीडियो में परिष्कृत तेलों से बचने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि लंबे समय तक इनका इस्तेमाल शरीर के ऊर्जा उत्पादन से जुड़े कोशिकीय तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्होंने इन्हें बेहद हानिकारक बताया। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक चिकित्सक की राय को सभी लोगों के लिए अंतिम चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

हृदय स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक मार्गदर्शन अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देता है। अमेरिकी हृदय संघ की वर्ष 2026 की आहार संबंधी सलाह में संपूर्ण भोजन, कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और असंतृप्त वसा वाले स्रोतों को प्राथमिकता देने तथा संतृप्त वसा को सीमित करने पर जोर दिया गया है।

परिष्कृत तेल को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा

परिष्कृत तेलों को लेकर स्वास्थ्य जगत में बहस का एक कारण यह है कि बाजार में उपलब्ध कई तेल औद्योगिक प्रसंस्करण से गुजरते हैं। दूसरी ओर, हृदय स्वास्थ्य के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि तेल परिष्कृत है या नहीं। उसमें मौजूद वसा का प्रकार, उसकी मात्रा, खाना पकाने का तरीका, कुल आहार और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।

अमेरिकी हृदय संघ के अनुसार, संतृप्त और कृत्रिम वसा की जगह एकल-असंतृप्त तथा बहुअसंतृप्त वसा वाले स्रोतों को चुनना हृदय के लिए अधिक अनुकूल हो सकता है। जैतून, सरसों, तिल और कुछ अन्य वनस्पति तेलों में असंतृप्त वसा की मात्रा महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन प्रत्येक तेल की पोषण संरचना अलग होती है।

इसलिए किसी एक तेल को पूरी तरह अच्छा या खराब बताने के बजाय, पूरे भोजन और वसा के प्रकार को समझना अधिक उपयोगी है।

घी को बताया प्रमुख विकल्प

डॉ. चोपड़ा ने घी को अपने पसंदीदा खाना पकाने वाले वसा विकल्पों में सबसे ऊपर रखा है। भारतीय भोजन में घी का इस्तेमाल सदियों से होता आया है और यह कई पारंपरिक व्यंजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

घी में वसा में घुलने वाले कुछ विटामिन पाए जाते हैं और इसमें मक्खन की तुलना में दूध के ठोस अंश बहुत कम होते हैं। इसके बावजूद घी मुख्य रूप से संतृप्त वसा का स्रोत है। इसलिए इसे असीमित मात्रा में खाना हृदय स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

अमेरिकी हृदय संघ संतृप्त वसा का सेवन सीमित रखने की सलाह देता है, क्योंकि अधिक मात्रा में संतृप्त वसा रक्त में कम घनत्व वाले हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकती है। यही कारण है कि घी को भोजन में शामिल करते समय मात्रा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

मक्खन को लेकर भी दी सलाह

डॉ. चोपड़ा ने मक्खन को भी खाना पकाने के विकल्प के रूप में बताया, लेकिन उन्होंने बाजार में मिलने वाले अत्यधिक प्रसंस्कृत मक्खन के बजाय घर पर तैयार मक्खन को प्राथमिकता देने की बात कही।

मक्खन भारतीय भोजन में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। इससे भोजन में स्वाद और ऊर्जा मिलती है, लेकिन इसमें संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है। इसलिए हृदय रोग, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या अन्य चयापचय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए इसकी मात्रा को लेकर चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हो सकती है।

हृदय स्वास्थ्य के आधुनिक दिशानिर्देशों में मक्खन को सामान्यतः असंतृप्त वसा वाले तरल वनस्पति तेलों से बेहतर विकल्प नहीं माना जाता। इसलिए केवल यह तथ्य कि कोई वसा पारंपरिक है, उसे हर व्यक्ति के लिए अधिक स्वास्थ्यकर साबित नहीं करता।

सरसों और तिल का तेल

डॉ. चोपड़ा ने सरसों और तिल के तेल को भी खाना पकाने के लिए उपयोगी विकल्प बताया है। दोनों तेल भारतीय रसोई की पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में इनका व्यापक इस्तेमाल होता है।

सरसों के तेल का इस्तेमाल विशेष रूप से उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में किया जाता है, जबकि तिल का तेल भी भारतीय भोजन और पारंपरिक पकवानों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

तिल का तेल असंतृप्त वसा का स्रोत हो सकता है और अमेरिकी हृदय संघ इसे संभावित स्वस्थ विकल्पों में शामिल करता है। हालांकि किसी भी तेल की मात्रा महत्वपूर्ण रहती है। अधिक तेल का सेवन कुल ऊर्जा सेवन बढ़ा सकता है, इसलिए स्वस्थ तेल का अर्थ यह नहीं है कि उसे बिना सीमा के इस्तेमाल किया जाए।

जैतून और एवोकाडो के तेल भी विकल्प

डॉ. चोपड़ा ने जैतून और एवोकाडो के तेल का भी उल्लेख किया। जैतून का तेल विशेष रूप से हृदय के अनुकूल भोजन पद्धतियों में काफी लोकप्रिय है।

अमेरिकी हृदय संघ भी जैतून के तेल को उन तरल वनस्पति तेलों में शामिल करता है जिनमें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी असंतृप्त वसा होती है। एवोकाडो का तेल भी कुछ परिस्थितियों में विकल्प हो सकता है।

हालांकि इन तेलों की कीमत कई पारंपरिक विकल्पों से अधिक हो सकती है। इसके अलावा हर तेल का स्वाद और खाना पकाने के लिए उपयोग अलग हो सकता है। इसलिए किसी तेल का चुनाव केवल उसके प्रचार या लोकप्रियता के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

भांग के बीज से बने तेल का भी उल्लेख

डॉ. चोपड़ा ने भांग के बीज से बने तेल का भी उल्लेख संभावित विकल्प के रूप में किया है। इसमें कुछ आवश्यक वसीय अम्ल पाए जाते हैं, लेकिन यह आम भारतीय रसोई में सरसों, तिल या मूंगफली जैसे तेलों की तुलना में कम प्रचलित है।

ऐसे कम प्रचलित तेलों का उपयोग करने से पहले उनके पोषण गुण, भंडारण की जरूरत और खाना पकाने के लिए उपयुक्तता को समझना आवश्यक है। प्रत्येक तेल को हर प्रकार के भोजन या अत्यधिक तापमान पर इस्तेमाल करना उचित नहीं होता।

क्या सभी परिष्कृत तेल वास्तव में जहरीले हैं?

यहां सावधानी जरूरी है। किसी भी खाद्य तेल को सीधे विष कहना वैज्ञानिक रूप से बहुत व्यापक दावा होगा। उपलब्ध हृदय स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश केवल तेल के प्रसंस्करण स्तर के आधार पर फैसला नहीं करते, बल्कि वसा के प्रकार और पूरे आहार को महत्व देते हैं।

अमेरिकी हृदय संघ स्वस्थ खाना पकाने के लिए कई तरल गैर-उष्णकटिबंधीय वनस्पति तेलों की सलाह देता है। इनमें जैतून, कैनोला, सोयाबीन, सूरजमुखी, मूंगफली और अन्य तेल शामिल हैं। साथ ही संतृप्त वसा और कृत्रिम वसा को सीमित करने की सलाह दी जाती है।

इसलिए यह कहना कि हर परिष्कृत तेल हर व्यक्ति के लिए विष के समान है, उपलब्ध वैज्ञानिक मार्गदर्शन से मेल नहीं खाता। तेल का प्रकार, मात्रा और पूरे भोजन की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण हैं।

तेल का इस्तेमाल कैसे करें

स्वास्थ्यकर तेल चुनना महत्वपूर्ण है, लेकिन खाना पकाने का तरीका भी उतना ही अहम है। अमेरिकी हृदय संघ के अनुसार तेल को इतना गर्म नहीं करना चाहिए कि वह धुआं छोड़ने लगे। अत्यधिक गर्म होने पर तेल में अवांछित रासायनिक बदलाव हो सकते हैं।

पुराने तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करना भी उचित नहीं माना जाता। खाना पकाने के लिए तेल को लंबे समय तक अत्यधिक गर्म करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। तेल को ठंडी और अंधेरी जगह पर रखना भी उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है।

मात्रा सबसे महत्वपूर्ण है

किसी भी तेल या वसा को पूरी तरह स्वस्थ मानकर अत्यधिक मात्रा में खाना सही रणनीति नहीं है। घी, मक्खन और विभिन्न वनस्पति तेल सभी ऊर्जा से भरपूर होते हैं। इसलिए वजन, रक्त में कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और हृदय संबंधी जोखिम को ध्यान में रखते हुए कुल वसा की मात्रा पर नजर रखना जरूरी है।

विशेष रूप से जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल या मधुमेह है, उन्हें अपने भोजन में वसा की मात्रा और प्रकार के बारे में चिकित्सक या योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

हृदय स्वास्थ्य के लिए पूरी भोजन पद्धति जरूरी

हृदय की सेहत केवल खाना पकाने के तेल से तय नहीं होती। वर्ष 2026 के अमेरिकी हृदय संघ के दिशानिर्देशों में सब्जियों और फलों की पर्याप्त मात्रा, साबुत अनाज, स्वस्थ प्रोटीन स्रोत, कम प्रसंस्कृत भोजन, कम अतिरिक्त चीनी और कम नमक वाले संपूर्ण भोजन पर जोर दिया गया है। साथ ही संतृप्त वसा की जगह असंतृप्त वसा वाले स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

इसका मतलब है कि केवल तेल बदल लेने से हृदय संबंधी जोखिम खत्म नहीं हो जाता। भोजन की पूरी गुणवत्ता, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि, नींद और अन्य जीवनशैली संबंधी आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डॉ. चोपड़ा की सलाह ने रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेलों को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है। घी, घर का मक्खन, सरसों, तिल, जैतून और एवोकाडो जैसे विकल्पों का उन्होंने उल्लेख किया है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी एक तेल को सभी लोगों के लिए सर्वोत्तम नहीं माना जा सकता।

सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि संतृप्त और कृत्रिम वसा को सीमित किया जाए, असंतृप्त वसा वाले उपयुक्त तेलों को प्राथमिकता दी जाए, तेल की मात्रा नियंत्रित रखी जाए और उसे बार-बार गर्म न किया जाए। हृदय स्वास्थ्य के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ के बजाय पूरे भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Create a website from scratch

Just drag and drop elements in a page to get started with Newspaper Theme.

Continue reading

कोलंबो में सिर टकराने पर यशस्वी जायसवाल पर जुर्माना

भारत के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मैदान पर हुए विवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने दंडित किया है। जायसवाल पर उनकी मैच फीस...

डाकघर आरडी में हर महीने तीन हजार जमा करें, दस साल में पांच लाख से अधिक

बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच बहुत से निवेशक ऐसे विकल्प तलाशते हैं, जहां नियमित रूप से छोटी रकम जमा करके भविष्य के लिए एक बड़ा कोष तैयार किया जा सके। शेयर बाजार, सोना और चांदी जैसी संपत्तियों में...

नाश्ते से पहले सुबह की ये पांच गलतियां बढ़ा सकती हैं रक्त शर्करा

कई लोगों को यह देखकर हैरानी होती है कि सुबह खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर पिछली रात के भोजन के बाद की तुलना में अधिक क्यों दिखाई देता है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि जब सुबह...

Enjoy exclusive access to all of our content

Get an online subscription and you can unlock any article you come across.