Tuesday, September 22, 2026

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रोज़ 15 मिनट नंगे पैर चलना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद, जानिए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा की सलाह

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग बेहतर स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए कई तरह के प्राकृतिक उपाय अपनाने की कोशिश करते हैं। इन्हीं उपायों में से एक है नंगे पैर धरती पर चलना, जिसे कई लोग “ग्राउंडिंग” या “अर्थिंग” (Grounding/Earthing) भी कहते हैं। दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक चोपड़ा का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति रोज़ाना केवल 15 से 30 मिनट तक घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पैर चलता है, तो यह उसकी दिनचर्या में एक सकारात्मक और स्वास्थ्यवर्धक आदत बन सकती है।

डॉ. चोपड़ा ने 6 अगस्त को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों को प्रकृति से दोबारा जुड़ने का संदेश देते हुए लिखा कि धरती के सीधे संपर्क में आना शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक हो सकता है। उनके अनुसार, यह अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि ग्राउंडिंग से जुड़े कुछ दावों, विशेष रूप से शरीर के विद्युत संतुलन या कोशिकाओं पर इसके प्रभाव, को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में अभी भी शोध जारी है। कुछ छोटे अध्ययनों में संभावित लाभों का उल्लेख किया गया है, लेकिन इन दावों की व्यापक और निर्णायक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

नंगे पैर धरती पर चलने से क्या होता है?

डॉ. आलोक चोपड़ा के अनुसार, जब हमारे नंगे पैर सीधे धरती के संपर्क में आते हैं, तो शरीर में मौजूद अतिरिक्त विद्युत आवेश (Electrical Charge) धरती की ओर स्थानांतरित हो सकता है। उनका कहना है कि इससे शरीर के प्राकृतिक विद्युत संतुलन को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया कोशिकाओं के री-पोलराइजेशन (Re-polarisation) में सहायक होने का दावा करती है। री-पोलराइजेशन वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं अपनी सामान्य विद्युत अवस्था में लौटती हैं। डॉ. चोपड़ा का मानना है कि इससे शरीर की कुछ जैविक प्रक्रियाओं को समर्थन मिल सकता है।

हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच इस विषय पर अभी एकमत राय नहीं है। इसलिए इन दावों को संभावित लाभ के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित चिकित्सीय तथ्य के रूप में।

रक्त संचार पर संभावित प्रभाव

डॉ. चोपड़ा का कहना है कि री-पोलराइजेशन की प्रक्रिया लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) की गतिशीलता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है, जिससे रक्त संचार को समर्थन मिल सकता है।

फिर भी, इस विषय पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। वर्तमान में यह स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि केवल नंगे पैर चलने से रक्त संचार में चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार होता है। यदि किसी व्यक्ति को रक्त संचार या हृदय संबंधी समस्या है, तो उसे केवल इस अभ्यास पर निर्भर रहने के बजाय अपने चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए।

नंगे पैर चलने के संभावित फायदे

डॉ. आलोक चोपड़ा के अनुसार, नियमित रूप से प्राकृतिक सतह पर नंगे पैर चलने से निम्नलिखित संभावित लाभ मिल सकते हैं—

  1. तनाव कम करने में मदद

प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना मानसिक तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। घास, मिट्टी या रेत पर चलने से मन को शांति मिल सकती है और व्यक्ति अधिक रिलैक्स महसूस कर सकता है।

  1. मानसिक स्वास्थ्य को समर्थन

प्रकृति के साथ समय बिताने से मानसिक स्पष्टता (Mental Clarity), भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिल सकती है। कई लोगों को इससे बेहतर मूड और मानसिक सुकून का अनुभव होता है।

  1. बेहतर नींद में सहायक

डॉ. चोपड़ा का मानना है कि नियमित ग्राउंडिंग करने वाले कुछ लोगों को नींद की गुणवत्ता में सुधार महसूस हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर और अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

  1. प्रकृति से जुड़ाव

आज अधिकांश लोग अपना समय घर, ऑफिस या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बीच बिताते हैं। ऐसे में रोज़ कुछ समय प्राकृतिक वातावरण में बिताना मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली के लिए लाभकारी माना जाता है।

  1. माइंडफुलनेस को बढ़ावा

नंगे पैर चलने के दौरान व्यक्ति अपने आसपास के वातावरण, धरती की बनावट और शरीर की गतिविधियों पर अधिक ध्यान देता है। इससे वर्तमान क्षण में रहने (Mindfulness) की आदत विकसित हो सकती है।

नंगे पैर चलने का सही तरीका

डॉ. आलोक चोपड़ा के अनुसार यदि आप इस अभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए—

घास, मिट्टी, रेत या किसी अन्य प्राकृतिक सतह पर नंगे पैर चलें।
प्रतिदिन 15 से 30 मिनट तक धरती के सीधे संपर्क में रहने का प्रयास करें।
यदि संभव हो तो सुबह के समय यह अभ्यास करें, क्योंकि उस समय वातावरण अपेक्षाकृत शांत और ताज़ा होता है।
इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
चलते समय आसपास की सतह पर कांच, पत्थर, कील या अन्य नुकीली वस्तुओं की जांच अवश्य करें ताकि पैरों में चोट न लगे।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए घास या सुरक्षित प्राकृतिक सतह पर थोड़ी देर नंगे पैर चलना सामान्यतः सुरक्षित हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—

मधुमेह (Diabetes) के मरीज, जिनके पैरों की संवेदना कम हो गई हो।
जिन लोगों के पैरों में घाव, संक्रमण या त्वचा संबंधी समस्या हो।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति।
ऐसे लोग जिन्हें डॉक्टर ने पैरों की विशेष देखभाल की सलाह दी हो।

ऐसे मामलों में किसी भी नई स्वास्थ्य आदत को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।

डॉ. आलोक चोपड़ा कौन हैं?

डॉ. आलोक चोपड़ा दिल्ली के एक वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट हैं और उन्हें हृदय रोगों के उपचार का लगभग 40 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से एमबीबीएस और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वह रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस, लंदन के सदस्य भी हैं। इसके अलावा उन्होंने जी.बी. पंत अस्पताल में रेजिडेंसी पूरी करने के बाद लंदन के रॉयल पोस्टग्रेजुएट मेडिकल स्कूल, हैमरस्मिथ हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग में लेक्चरर के रूप में भी कार्य किया। उनकी विशेषज्ञता हृदय और रक्त संचार संबंधी रोगों के उपचार में मानी जाती है।

महत्वपूर्ण बात

यह जानकारी डॉ. आलोक चोपड़ा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विचारों और उपलब्ध सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। ग्राउंडिंग या अर्थिंग से जुड़े कई दावों पर वैज्ञानिक शोध अभी जारी है और सभी दावे स्थापित चिकित्सीय तथ्य नहीं हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको हृदय रोग, मधुमेह, रक्त संचार, या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो किसी भी नई स्वास्थ्य आदत को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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