सूरत में एक निजी आवासीय विद्यालय के छात्रावास में भोजन करने के बाद कम से कम 75 विद्यार्थियों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शनिवार रात से विद्यार्थियों में उल्टी और दस्त सहित कई स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने लगे। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और नगर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल विद्यालय के छात्रावास का निरीक्षण शुरू किया और विद्यार्थियों की चिकित्सकीय जांच कराई।
यह घटना सूरत शहर के अब्रामा क्षेत्र स्थित पी पी सावाणी विद्यालय के छात्रावास में हुई। सूरत नगर निगम के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी पी. एच. उमरीगर के अनुसार, शनिवार रात से छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों में अचानक उल्टी और दस्त की शिकायत सामने आने लगी। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर अधिकारियों को भोजन से होने वाली विषाक्तता की आशंका है। हालांकि, बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
बीमार हुए 75 विद्यार्थियों में से 12 को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती विद्यार्थियों में नौ छात्राएं शामिल हैं। इन विद्यार्थियों की आयु 15 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती सभी विद्यार्थियों की स्थिति अब स्थिर है और किसी की हालत गंभीर नहीं है। उपचार के बाद चार विद्यार्थियों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है, जबकि बाकी विद्यार्थियों का चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि सभी प्रभावित विद्यार्थियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार विद्यार्थियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलता सामने आने पर तत्काल उपचार दिया जा सके। घटना के बाद छात्रावास में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
सूरत नगर निगम को जैसे ही विद्यार्थियों के बीमार पड़ने की सूचना मिली, उसके स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। नगर निगम की ओर से खाद्य, स्वास्थ्य और स्वच्छता विभाग की अलग-अलग टीमों को विद्यालय के छात्रावास में भेजा गया। इन टीमों ने वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और भोजन तथा स्वच्छता से संबंधित परिस्थितियों की जानकारी जुटाई।
निरीक्षण के दौरान भोजन के चार नमूने एकत्र किए गए हैं। इन नमूनों को आवश्यक जांच के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नमूनों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विद्यार्थियों के बीमार पड़ने के पीछे भोजन की गुणवत्ता, दूषित खाद्य सामग्री या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था या नहीं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
नगर निगम की ओर से छात्रावास में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। इसके लिए एक चलित चिकित्सा दल छात्रावास में मौजूद है और विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच कर रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी अन्य विद्यार्थी में भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसका समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
बताया गया है कि इस आवासीय विद्यालय में लगभग 2,200 विद्यार्थी छात्रावास में रहते हैं। इसके अलावा विद्यालय में करीब 300 कर्मचारी भी कार्यरत हैं। घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिवार को विद्यालय के विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने एक ही भोजन किया था। इसके बाद कुछ विद्यार्थियों में उल्टी और दस्त की शिकायत सामने आई। इसी कारण भोजन की गुणवत्ता और संभावित खाद्य विषाक्तता की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पताल में भर्ती विद्यार्थियों की हालत स्थिर होने और कुछ विद्यार्थियों को उपचार के बाद छुट्टी मिलने से राहत की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन की जांच अब भोजन के नमूनों की प्रयोगशाला जांच पर केंद्रित है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि बीमारी का वास्तविक कारण क्या था और क्या छात्रावास में परोसे गए भोजन में किसी प्रकार की समस्या थी। यदि जांच में भोजन से संबंधित लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल विद्यालय प्रशासन, नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा दल विद्यार्थियों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी विद्यार्थी खतरे से बाहर हैं। साथ ही छात्रावास में मौजूद अन्य विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच जारी है, ताकि किसी संभावित संक्रमण या बीमारी के लक्षणों की जल्द पहचान की जा सके।
यह घटना बड़े आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की आवश्यकता को भी सामने लाती है। हालांकि, वर्तमान मामले में खाद्य विषाक्तता की पुष्टि अभी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।


