दमन में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने एक अनोखी पहल की है। दमन जिला प्रशासन ने महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसे बड़े वाहनों के मालिकों और चालकों को सुरक्षित वाहन चलाने की शपथ दिलाई। बुधवार, नौ सितंबर की शाम आयोजित सड़क सुरक्षा अभियान के दौरान दमन के जिला कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने थार मालिकों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह वाहन सड़क पर भाईगिरी या रफूगिरी दिखाने के लिए नहीं है।
कलेक्टर ने थार शब्द को जिम्मेदारी से जोड़ते हुए वाहन मालिकों से अपील की कि वे सड़क पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने और दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने वाले जिम्मेदार नागरिक बनें। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य बड़े और शक्तिशाली वाहनों को लेकर समाज में बन रही नकारात्मक धारणा को बदलना और सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना है।
सैकड़ों थार और फॉर्च्यूनर एक जगह जुटे
सड़क सुरक्षा अभियान के तहत दमन के एक खुले मैदान में सैकड़ों थार और फॉर्च्यूनर वाहनों को व्यवस्थित तरीके से कतारों में खड़ा किया गया। इनके मालिक और चालक भी वाहनों के सामने कतारबद्ध होकर खड़े हुए।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर के अलावा कई पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। वाहन मालिकों और चालकों को मैदान में वाहनों के चारों ओर घूमने के लिए कहा गया। इस दौरान उनके हाथों में सड़क सुरक्षा से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां थीं।
इसके बाद सभी लोगों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। शपथ में तेज गति से वाहन नहीं चलाने, लापरवाही से वाहन नहीं चलाने और सड़क पर किसी भी तरह के खतरनाक करतब से बचने का संकल्प लिया गया।
नशे में वाहन चलाने से भी किया तौबा
शपथ के दौरान वाहन मालिकों और चालकों ने यह संकल्प लिया कि वे नशे की हालत में वाहन नहीं चलाएंगे। उन्होंने सड़क पर दौड़ लगाने, वाहन को खतरनाक तरीके से मोड़ने या जान जोखिम में डालने वाले करतब करने से भी दूर रहने की बात कही।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे अपने वाहन से किसी दूसरे व्यक्ति को ऐसे खतरनाक काम करने की अनुमति नहीं देंगे।
प्रशासन ने इस पहल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि वाहन की शक्ति उसके मालिक को सड़क के नियमों से ऊपर नहीं बनाती। बड़े वाहन चलाने वालों की जिम्मेदारी और भी अधिक होती है, क्योंकि उनकी लापरवाही से दूसरे लोगों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
अनधिकृत बदलावों पर भी प्रशासन सख्त
कार्यक्रम के दौरान वाहन मालिकों को अपने वाहनों में बिना अनुमति किए गए बदलावों से बचने की सलाह दी गई। इनमें काले परदे या शीशों पर अनधिकृत परत लगाना, नियमों के विरुद्ध पहिए बदलना, आवाज बढ़ाने वाले उपकरण लगाना और अन्य गैरकानूनी बदलाव शामिल हैं।
वाहन मालिकों ने ऐसे बदलाव नहीं करने की शपथ भी ली। उन्होंने अनावश्यक रूप से वाहन का ध्वनि संकेत नहीं बजाने और यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प लिया।
दमन के उपजिलाधिकारी प्रियंशु सिंह ने बताया कि दमन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पंजीकृत सभी थार और फॉर्च्यूनर वाहनों के मालिकों को इस अभियान में आमंत्रित किया गया था।
उन्होंने कहा कि लोगों को वाहनों से अनधिकृत वस्तुएं हटाने के लिए कहा गया है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
थार को लेकर देशभर में चल रही बहस
पिछले कुछ समय से देश के विभिन्न हिस्सों में थार जैसे बड़े वाहनों को तेज और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाओं से जोड़कर चर्चा की जा रही है। सामाजिक माध्यमों पर ऐसे कई दृश्य प्रसारित होते रहे हैं जिनमें वाहन तेज गति से चलते, अचानक दिशा बदलते या खतरनाक तरीके से घूमते दिखाई देते हैं।
इन दृश्यों के कारण कुछ लोगों के बीच यह धारणा बनी है कि कुछ वाहन मालिक अपनी गाड़ी की ताकत का प्रदर्शन सड़क पर करते हैं। हालांकि, किसी विशेष वाहन को लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाओं से सीधे जोड़ने वाला कोई बड़ा भारतीय अध्ययन उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के दुर्घटना संबंधी आंकड़ों में भी वाहन के प्रकार को आधार बनाकर ऐसी कोई व्यापक सूची नहीं दी जाती। इसलिए किसी एक वाहन को सड़क दुर्घटनाओं या लापरवाही से वाहन चलाने का कारण मानना उचित नहीं होगा।
कलेक्टर ने आनंद महिंद्रा को संदेश देने को कहा
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने थार मालिकों से सामाजिक माध्यमों पर अभियान का संदेश साझा करने और महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा को भी इससे जोड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वाहन बनाने वाली कंपनी को भी देशभर में सड़क सुरक्षा के लिए अभियान चलाना चाहिए। उनके अनुसार, थार को देखकर सड़क किनारे चलने वाली किसी महिला को डर नहीं, बल्कि सुरक्षा का एहसास होना चाहिए।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि यदि सड़क पर दुर्घटना हो जाए और वहां से कोई थार या फॉर्च्यूनर गुजर रही हो, तो वाहन में मौजूद लोग घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में मदद करें।
उनका संदेश स्पष्ट था कि शक्तिशाली वाहन का इस्तेमाल दूसरों को डराने के बजाय जरूरतमंदों की सहायता के लिए होना चाहिए।
पुराने वाहन अभियान से जुड़ा विवाद
दमन प्रशासन की इस पहल की पृष्ठभूमि में हाल की एक वाहन रैली भी चर्चा में है। दमन में 27 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी जिग्नेश पटेल की अगुवाई में सौ से अधिक थार वाहनों की रैली निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
स्थानीय पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह रैली केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल पटेल के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित की गई थी। उनका जन्मदिन 28 अगस्त को था।
सूत्रों के मुताबिक, रैली में शामिल कई वाहनों का रंग काला था और कुछ वाहनों में शीशों पर गहरे रंग की परत तथा बदले हुए ध्वनि उपकरण लगे हुए थे। रैली के कारण दमन में काफी यातायात बाधित होने की बात भी सामने आई।
रैली के दृश्य सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हुए और उन्हें लेकर आलोचना भी हुई। बताया गया कि प्रफुल पटेल उस समय दमन में मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर इस तरह के जन्मदिन आयोजन को लेकर नाराजगी जताई।
प्रशासन का संदेश स्पष्ट
दमन जिला प्रशासन की नई पहल को इसी व्यापक चर्चा के बीच देखा जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य किसी विशेष वाहन या उसके मालिकों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना बताया गया है।
बड़े और शक्तिशाली वाहन चलाने वालों को नियमों का पालन करने, दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखने और सड़क पर किसी तरह का भय पैदा नहीं करने का संदेश दिया गया है।
कलेक्टर की पहल का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि वाहन की पहचान उसके मालिक के व्यवहार से बनती है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का पालन करता है, दुर्घटना में मदद करता है और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखता है, तो वही वाहन जिम्मेदारी और नागरिक भावना का प्रतीक बन सकता है।
दमन प्रशासन ने साफ किया है कि सड़क पर भाईगिरी या माफियागिरी जैसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वाहन चाहे कितना भी बड़ा या शक्तिशाली क्यों न हो, सड़क पर सभी के लिए नियम समान हैं। सुरक्षित यातायात के लिए वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


