Thursday, September 10, 2026

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फैटी लिवर के 8 चेतावनी संकेत, जिन्हें नजरअंदाज न करें

फैटी लिवर यानी यकृत में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होना एक ऐसी समस्या है, जो शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। कई लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनके यकृत में अतिरिक्त वसा जमा हो रही है। यही कारण है कि इसे कई बार एक “मूक” स्वास्थ्य समस्या माना जाता है। हालांकि, बीमारी बढ़ने पर कुछ ऐसे संकेत दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

यकृत शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के प्रसंस्करण, ऊर्जा के भंडारण और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने जैसे कई जरूरी कार्य करता है। जब यकृत की कोशिकाओं में अत्यधिक वसा जमा होने लगती है, तो इसे यकृत में वसा जमना या फैटी लिवर कहा जाता है।

फैटी लिवर के कई कारण हो सकते हैं। अधिक वजन, पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी, रक्त में शर्करा का बढ़ना, मधुमेह, शरीर में इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशीलता, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और रक्त में वसा की अधिक मात्रा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। शराब का अधिक सेवन भी यकृत में वसा जमा होने का कारण बन सकता है।

फैटी लिवर क्या है?

फैटी लिवर उस स्थिति को कहा जाता है, जब यकृत की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक वसा जमा हो जाती है। चयापचय संबंधी कारणों से होने वाली इस बीमारी को पहले गैर-मादक वसायुक्त यकृत रोग कहा जाता था, जबकि अब इसे चयापचय संबंधी विकार से जुड़ा वसायुक्त यकृत रोग कहा जाता है।

शुरुआती अवस्था में केवल वसा जमा होने से गंभीर परेशानी जरूरी नहीं होती। लेकिन कुछ लोगों में समय के साथ यकृत में सूजन शुरू हो सकती है। इसके बाद रेशेदार ऊतक बनने, यकृत में स्थायी क्षति और गंभीर अवस्था में यकृत के सिकुड़ने जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।

इसलिए संभावित संकेतों को समझना और जोखिम होने पर समय पर चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है।

1. लगातार थकान महसूस होना

बिना अधिक मेहनत किए लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। यकृत में सूजन या अन्य परिवर्तन होने पर भी व्यक्ति को लंबे समय तक ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।

यदि पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद थकान बनी रहती है तथा इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

2. पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता

यकृत पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में स्थित होता है। कुछ लोगों को इस क्षेत्र में हल्का दर्द, दबाव, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है।

हालांकि, इस तरह की परेशानी केवल फैटी लिवर का संकेत नहीं है। पाचन तंत्र से जुड़ी कई अन्य समस्याएं भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए लगातार रहने वाली असहजता की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

3. वजन में अचानक या अनपेक्षित बदलाव

फैटी लिवर का संबंध अक्सर अधिक वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त वसा से होता है। लेकिन यह समस्या सामान्य वजन वाले लोगों में भी हो सकती है।

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन तेजी से घट रहा है या वजन में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है, तो इसके पीछे मौजूद कारण का पता लगाना जरूरी है। केवल वजन देखकर फैटी लिवर की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

4. भूख कम लगना या मितली

भूख में कमी, मितली, भोजन के बाद असामान्य रूप से जल्दी पेट भर जाना या खाने की इच्छा कम होना कई कारणों से हो सकता है। इनमें पाचन संबंधी समस्याएं और यकृत से जुड़ी परेशानियां भी शामिल हो सकती हैं।

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, बार-बार दिखाई दें या इनके साथ कमजोरी तथा अन्य बदलाव भी महसूस हों, तो चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

5. त्वचा या आंखों का पीला पड़ना

त्वचा या आंखों के सफेद हिस्से का पीला होना पीलिया कहलाता है। यह सामान्य फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था का सामान्य लक्षण नहीं माना जाता, लेकिन यह यकृत या पित्त के प्रवाह से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

यदि आंखों या त्वचा में अचानक पीलापन दिखाई दे, तो चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

6. पेट या पैरों में सूजन

बीमारी के गंभीर और उन्नत चरण में यकृत की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसके कारण पेट में असामान्य सूजन या पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है।

पेट में तरल पदार्थ जमा होने की स्थिति को जलोदर कहा जाता है। ऐसी सूजन को सामान्य वजन बढ़ने या साधारण पानी जमा होने की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

7. पेशाब का रंग गहरा होना

पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा दिखाई देना कई कारणों से हो सकता है, जैसे शरीर में पानी की कमी। लेकिन यदि इसके साथ आंखों या त्वचा में पीलापन, कमजोरी या अन्य यकृत संबंधी संकेत दिखाई दें, तो इसकी जांच जरूरी है।

यकृत और पित्त के सामान्य कार्य में बाधा आने पर शरीर से निकलने वाले द्रवों के रंग में बदलाव हो सकता है।

8. मल का रंग असामान्य रूप से हल्का होना

मल का बहुत हल्का या फीका रंग पित्त के सामान्य प्रवाह में रुकावट से संबंधित हो सकता है। यदि मल के रंग में लगातार बदलाव हो और साथ में गहरे रंग का पेशाब या पीलापन भी दिखाई दे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

ध्यान रखना चाहिए कि इनमें से कोई भी लक्षण अकेले फैटी लिवर की पुष्टि नहीं करता। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक जांच की जरूरत पड़ सकती है।

फैटी लिवर से बचाव कैसे करें?

फैटी लिवर के जोखिम को कम करने में स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से वजन कम करना लाभकारी हो सकता है।

भोजन में हरी और अन्य सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, फलियां, मेवे और कम संसाधित खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जा सकती है। अधिक चीनी वाले पेय, अतिरिक्त चीनी से बने खाद्य पदार्थ, अत्यधिक परिष्कृत अनाज और बहुत अधिक प्रसंस्कृत भोजन का सेवन सीमित करना उपयोगी है।

नियमित शारीरिक गतिविधि भी यकृत और शरीर के चयापचय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैरना और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम नियमित रूप से किए जा सकते हैं।

इसके अलावा, रक्त में शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और वसा की मात्रा को नियंत्रित रखना जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें मधुमेह या इंसुलिन संबंधी समस्या है।

शराब का सेवन यकृत को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से यकृत संबंधी बीमारी है, तो शराब के सेवन के बारे में चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

फैटी लिवर कई बार बिना लक्षण के रहता है, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को पहचानना मुश्किल हो सकता है। यदि व्यक्ति में अधिक वजन, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, पेट की अतिरिक्त चर्बी या अन्य चयापचय संबंधी जोखिम मौजूद हैं, तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच उपयोगी हो सकती है।

यदि पीलिया, पेट या पैरों में अचानक सूजन, लगातार पेट की परेशानी, लंबे समय तक भूख न लगना, असामान्य वजन घटना या अन्य चिंताजनक बदलाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

समय पर पहचान और जीवनशैली में उचित बदलाव कई लोगों में यकृत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। किसी भी लक्षण के आधार पर स्वयं बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

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