भारतीय पुरुष हॉकी टीम मंगलवार शाम जापान के लिए रवाना हो गई। टीम का लक्ष्य आगामी एशियाई खेलों में अपने महाद्वीपीय खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करना है। एशियाई खेल 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची-नागोया में आयोजित किए जाएंगे। हॉकी मुकाबले नागोया से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित काकामिगाहारा में खेले जाएंगे।
भारतीय टीम की कमान अनुभवी कप्तान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। टीम के सामने इस बार बेहद महत्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को आगामी लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों में सीधे प्रवेश का अवसर मिलेगा। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह प्रतियोगिता केवल एशियाई वर्चस्व बनाए रखने की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि ओलंपिक टिकट हासिल करने का भी महत्वपूर्ण अभियान होगी।
भारतीय टीम पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित विश्व कप में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। टीम को प्रतियोगिता में आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों ने कई मुकाबलों में अपनी क्षमता की झलक दिखाई, लेकिन महत्वपूर्ण क्षणों में निरंतरता बनाए रखने में उन्हें परेशानी हुई। करीबी मुकाबलों में मिली निराशा ने टीम की कमियों को उजागर किया।
अब भारतीय दल उस अनुभव से सीख लेकर जापान में अधिक संयमित, अनुशासित और निरंतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा। टीम प्रबंधन की कोशिश होगी कि खिलाड़ी पिछले प्रदर्शन का दबाव अपने ऊपर न रखें और प्रत्येक मुकाबले को नए अवसर के रूप में देखें।
कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी प्रतियोगिता को लेकर स्पष्ट रणनीति बताई है। उनका मानना है कि टीम को भविष्य के परिणाम के बारे में बहुत अधिक सोचने के बजाय एक समय में केवल एक मुकाबले पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एशियाई स्तर पर कोई भी मुकाबला आसान नहीं होगा और लगातार अच्छे प्रदर्शन की आवश्यकता होगी।
भारतीय टीम पिछले एक दशक से एशियाई हॉकी में मजबूत स्थिति में रही है। उसने हांगझोऊ एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा एशिया कप में भी भारतीय टीम ने अपना दबदबा कायम रखा है। इस प्रदर्शन के कारण भारत को इस प्रतियोगिता में प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है।
भारतीय टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य अपने खिताब को बरकरार रखना होगा। यदि टीम लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतती है, तो इससे उसका एशियाई हॉकी पर प्रभाव और मजबूत होगा। साथ ही स्वर्ण पदक भारत को आगामी ओलंपिक खेलों के लिए गया है। इस समूह में मेजबान जापान के अलावा दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया की टीमें शामिल हैं। भारतीय टीम अपने सीधा प्रवेश दिलाएगा, जिससे इस प्रतियोगिता का महत्व और बढ़ जाता है।
भारत को प्रतियोगिता के लिए पूल ए में रखा गया है। इस समूह में मेजबान जापान के अलावा दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया की टीमें शामिल हैं। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगी।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों को लगातार मजबूत टीमों के खिलाफ अपनी क्षमता साबित करनी होगी। पूल चरण में भारत का अंतिम मुकाबला 28 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ होगा। पूल चरण में बेहतर प्रदर्शन करना इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे टीम खिताबी मुकाबला 3 अक्टूबर को निर्धारित है। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह पूल चरण से लेकर अंतिम मुकाब को आगे के चरण में आत्मविश्वास और मजबूत स्थिति हासिल करने में मदद मिलेगी।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में सेमीफाइनल मुकाबले 1 अक्टूबर को खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला 3 अक्टूबर को निर्धारित है। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह पूल चरण से लेकर अंतिम मुकाबले तक अपनी लय बनाए रखे।
मुख्य प्रशिक्षक क्रेग फुल्टन के लिए भी यह प्रतियोगिता काफी महत्वपूर्ण होगी। विश्व कप में सामने आई कमजोरियों पर काम करने के बाद वह चाहते होंगे कि खिलाड़ी मैदान पर तय रणनीति को बेहतर ढंग से लागू करें। मुकाबले के परिणाम के बारे में पहले से सोचने के बजाय खिलाड़ियों का ध्यान अपनी भूमिका, पासिंग, विरोधी टीमों को हल्के में न ले। एशिय रक्षात्मक संगठन और गोल करने के अवसरों के सही इस्तेमाल पर रहे।
भारतीय टीम के सामने एक और चुनौती यह होगी कि वह विरोधी टीमों को हल्के में न ले। एशियाई हॉकी में कई टीमें पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रतिस्पर्धी हुई हैं। इसलिए प्रत्येक मुकाबले में एकाग्रता और अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके अनुभवी खिलाड़ियों और बड़े मुकाबलों में खेलने के अनुभव में है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम से उम्मीद की जा रही है कि वह विश्व कप की निराशा को पीछे छोड़कर एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
टीम का अंतिम लक्ष्य केवल स्वर्ण पदक जीतना नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में लगातार उच्च स्तर का खेल दिखाना होगा। यदि भारतीय खिलाड़ी दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखने और रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहे, तो टीम के पास खिताब बचाने का मजबूत अवसर होगा।
जापान के लिए रवाना भारतीय दल अब एशियाई खेलों के मंच पर अपने अभियान की तैयारी करेगा। स्वर्ण पदक के साथ मिलने वाला ओलंपिक प्रवेश इस अभियान को और विशेष बना रहा है। भारतीय हॉकी प्रशंसकों की नजरें अब 20 सितंबर को होने वाले पहले मुकाबले पर रहेंगी। टीम की कोशिश होगी कि वह एक-एक मुकाबले पर ध्यान देते हुए अंततः लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम करे।


