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ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान की गुहार पर भारत ने दिखाई रणनीतिक सख्ती

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। सैन्य अभियान के लगभग 15 महीने बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पहली बार सार्वजनिक मंच से उस महत्वपूर्ण घटनाक्रम का उल्लेख किया, जब पाकिस्तान ने भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए संपर्क किया था। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान ने युद्धविराम (Ceasefire) की मांग करते हुए भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) हॉटलाइन पर फोन किया था, लेकिन भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय रणनीतिक रूप से कुछ समय तक इंतजार किया।

उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय सेना की आधी सैन्य योजना भी पूरी तरह लागू नहीं हुई थी और भारत अपनी रणनीतिक बढ़त को छोड़ने के मूड में नहीं था। इस खुलासे ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य रणनीति और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें दो दर्जन से अधिक निर्दोष पर्यटकों की मौत हो गई थी।

भारत ने इस हमले के बाद पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का फैसला लिया। शुरुआती चरण में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इन ठिकानों का संबंध कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से बताया गया।

भारतीय सेना का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि भारत अपनी सुरक्षा और नागरिकों पर हुए हमलों का प्रभावी जवाब देने में सक्षम है।

पाकिस्तान ने किया ड्रोन और मिसाइल हमला

भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कई सैन्य ठिकानों के अलावा स्कूलों और धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।

हालांकि भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली पूरी तरह सक्रिय थी। भारतीय सेना और वायुसेना ने अधिकांश ड्रोन और मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया।

भारतीय रक्षा तंत्र की इस सफलता ने पाकिस्तान की रणनीति को काफी हद तक विफल कर दिया और भारत को आगे की कार्रवाई के लिए मजबूत स्थिति प्रदान की।

भारत के पास थी बेहतर Battlefield Transparency

जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी “बेहतर बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी” थी।

उनके अनुसार भारतीय सेना को वास्तविक समय (Real-Time) में यह जानकारी मिल रही थी कि भारत के हमलों का क्या प्रभाव पड़ा है और पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों का कितना नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण होती है।

जनरल चौहान के शब्दों में, जब सेना के पास युद्धक्षेत्र की स्पष्ट तस्वीर होती है, तब निर्णय तेजी से लिए जा सकते हैं और विरोधी पक्ष लगातार दबाव में रहता है।

10 मई की सुबह पाकिस्तान ने मांगी बातचीत

जनरल चौहान ने खुलासा किया कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से बेहद आक्रामक बयान दिए जा रहे थे। वहां के अधिकारियों का दावा था कि वे 48 घंटे के भीतर भारत को जवाब दे देंगे।

लेकिन स्थिति तेजी से बदल गई।

उन्होंने बताया कि 10 मई की सुबह लगभग 9 से 9:30 बजे के बीच पाकिस्तान ने DGMO हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया और तत्काल बातचीत तथा युद्धविराम की इच्छा जताई।

जनरल चौहान के अनुसार, यह भारत के लिए भी अप्रत्याशित था क्योंकि उस समय तक भारतीय सैन्य अभियान का केवल एक हिस्सा ही पूरा हुआ था।

भारत ने तुरंत नहीं उठाया फोन

जनरल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पहल होने के बावजूद भारत ने तुरंत जवाब नहीं दिया।

इसके पीछे उद्देश्य यह था कि पहले युद्धक्षेत्र की स्थिति का पूरा आकलन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भारतीय सैन्य लक्ष्य पर्याप्त रूप से पूरे हो चुके हैं।

भारत का मानना था कि यदि उस समय सैन्य अभियान रोक दिया जाता, तो रणनीतिक बढ़त अधूरी रह सकती थी।

इसी कारण भारतीय सेना ने पहले से तय सैन्य योजना के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रखी।

पाकिस्तानी एयरबेस बने अगले निशाने

जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय सेना ने शुरुआती चरण में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया था, लेकिन एयरफील्ड्स पर व्यापक कार्रवाई अभी बाकी थी।

भारत ने बाद में पाकिस्तान के महत्वपूर्ण एयरबेसों को निशाना बनाया। इनमें भोलारी और जैकोबाबाद एयरबेस प्रमुख बताए गए।

उनके अनुसार, पाकिस्तान को यह एहसास हो गया था कि यदि भारत ने अपने अगले चरण की कार्रवाई पूरी कर ली, तो सैन्य क्षति और अधिक बढ़ सकती है।

इसी आशंका के कारण पाकिस्तान ने जल्द से जल्द बातचीत की पहल की।

निर्णायक बढ़त चाहता था भारत

जनरल चौहान ने कहा कि भारत केवल सीमित जवाबी कार्रवाई करके रुकना नहीं चाहता था।

भारतीय सेना का उद्देश्य ऐसी सैन्य सफलता हासिल करना था जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की आतंकी या सैन्य उकसावे की कीमत विरोधी पक्ष को स्पष्ट रूप से समझ में आए।

उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय नेतृत्व और सैन्य कमान एक “निर्णायक बढ़त” (Decisive Advantage) सुनिश्चित करना चाहते थे, इसलिए कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई गई।

ऑपरेशन सिंदूर से मिली कई रणनीतिक सीख

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी उजागर किया। ड्रोन, मिसाइल, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, एयर डिफेंस सिस्टम और तेज निर्णय क्षमता आज किसी भी सैन्य अभियान की सफलता के प्रमुख आधार बन चुके हैं।

जनरल चौहान के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की ताकत का नहीं, बल्कि सूचना, तकनीक, समन्वय और रणनीतिक धैर्य का भी खेल है।

भारत की रणनीति पर फिर बढ़ी चर्चा

जनरल अनिल चौहान के ताजा खुलासे के बाद ऑपरेशन सिंदूर एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

हालांकि इस सैन्य अभियान से जुड़े कई पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है, लेकिन अब सामने आए इन नए विवरणों से यह संकेत मिलता है कि भारत ने पूरे अभियान के दौरान सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर बेहद सोच-समझकर फैसले लिए।

ऑपरेशन सिंदूर आज भी भारत की हालिया सैन्य रणनीतियों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा, त्वरित निर्णय क्षमता और आधुनिक युद्धक कौशल को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

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