Monday, November 2, 2026

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दुर्गा प्रतिमाओं के पास मांसाहारी भोजन पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच धार्मिक परंपराओं और खान-पान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बागेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास मांसाहारी भोजन बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। हावड़ा में आयोजित हनुमान कथा कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा स्थलों के आसपास मांसाहारी भोजन तैयार किए जाने की प्रथा पर नाराजगी व्यक्त की।

धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से ऐसी गतिविधियों से दूर रहने और उनका बहिष्कार करने की अपील भी की। उनके बयान के बाद धार्मिक आस्था, खान-पान और सार्वजनिक पूजा आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में अक्टूबर में होने वाली दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं।

धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा को लेकर क्या कहा?

हावड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह दुर्गा पूजा पंडालों के पीछे या उनके आसपास मांसाहारी भोजन बनाए जाने को लेकर सहज नहीं हैं। उनके अनुसार, नवरात्र के दौरान धार्मिक स्थलों के आसपास इस तरह की गतिविधियों से धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

उन्होंने ऐसे लोगों को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की, जो धार्मिक स्थलों के आसपास इस प्रकार की गतिविधियां करते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने इसे धार्मिक आस्था और व्यवहार के बीच विरोधाभास के रूप में पेश किया।

धीरेंद्र शास्त्री ने पश्चिम बंगाल के हिंदुओं से नवरात्र के दौरान सतर्क रहने और ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों से दूरी बनाने की अपील की। उनके इस बयान के सामने आने के बाद सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई है।

हालांकि, उनके बयान को पूरे राज्य के खान-पान पर रोक लगाने की मांग के रूप में देखे जाने को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि किसी धार्मिक आयोजन के आसपास भोजन को लेकर स्थानीय आयोजकों और श्रद्धालुओं की परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।

विश्व हिंदू परिषद ने भोजन पर रोक से किया इनकार

धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब विश्व हिंदू परिषद को लेकर भी दुर्गा पूजा के दौरान भोजन से संबंधित कथित दिशा-निर्देशों की चर्चा चल रही थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि संगठन ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा आयोजनों के दौरान पूरी तरह सात्त्विक और शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की बात कही है।

हालांकि, विश्व हिंदू परिषद के पूर्वी क्षेत्र के सचिव अमिया सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से शाकाहारी या मांसाहारी भोजन पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाने का निर्देश जारी नहीं किया गया है।

अमिया सरकार के अनुसार, 26 अगस्त को पूजा आयोजकों के साथ हुई बैठक में भोजन पर प्रतिबंध का विषय चर्चा का हिस्सा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को लेकर सामने आई जानकारी को बैठक के वास्तविक विषय से अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू परिषद किसी प्रकार का ऐसा आदेश जारी नहीं करती, जिसके तहत लोगों के भोजन की आदतों पर रोक लगाई जाए। उनके बयान का उद्देश्य संगठन की स्थिति को लेकर पैदा हुई गलतफहमी को दूर करना था।

शाकाहारी या मांसाहारी भोजन पर कोई प्रतिबंध नहीं

अमिया सरकार ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शाकाहारी या मांसाहारी भोजन की आदतों पर रोक लगाना नहीं है। उनके अनुसार, पूजा स्थलों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना और भोजन की दुकानों में साफ-सफाई का ध्यान रखना अधिक महत्वपूर्ण विषय है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि विश्व हिंदू परिषद और धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को एक ही रुख के रूप में देखना उचित नहीं होगा। जहां धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक स्थलों के आसपास मांसाहारी भोजन बनाए जाने पर व्यक्तिगत रूप से आपत्ति जताते हुए लोगों से बहिष्कार की अपील की, वहीं विश्व हिंदू परिषद ने किसी प्रकार के भोजन प्रतिबंध से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।

इस अंतर के कारण पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से जुड़े भोजन और धार्मिक आचरण को लेकर चर्चा और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

26 अगस्त की बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

अमिया सरकार के अनुसार, 26 अगस्त को पूजा पंडाल आयोजकों के साथ हुई बैठक में मुख्य रूप से पूजा की सात्त्विक परंपराओं और पंडालों में प्रस्तुत किए जाने वाले विषयों पर चर्चा हुई थी। आयोजकों से कहा गया था कि पूजा के लिए चुने जाने वाले विषय भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय भावना के विपरीत नहीं होने चाहिए।

इसके साथ ही धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने पर भी जोर दिया गया था। इसका उद्देश्य पूजा आयोजनों के दौरान ऐसे विषयों से बचना बताया गया, जिनसे किसी समुदाय या श्रद्धालु की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

विश्व हिंदू परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विषय आधारित दुर्गा पूजा के खिलाफ नहीं है। इसका अर्थ है कि पूजा पंडालों को अलग-अलग सामाजिक, सांस्कृतिक या कलात्मक विषयों के आधार पर सजाने की परंपरा को संगठन ने अस्वीकार नहीं किया है।

दुर्गा पूजा से पहले बढ़ी बहस

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। लाखों लोग पूजा पंडालों में पहुंचते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की परंपराओं के साथ उत्सव मनाया जाता है।

ऐसे में भोजन और धार्मिक आयोजनों को लेकर कोई भी बयान व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है। धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ने इसी बहस को एक नया आयाम दिया है।

एक तरफ धार्मिक स्थलों की पवित्रता और पूजा की परंपराओं को लेकर श्रद्धालुओं की भावनाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ भोजन से जुड़ी सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता भी मौजूद है। इसलिए इस मुद्दे पर अलग-अलग लोगों की राय सामने आना स्वाभाविक है।

क्या मांसाहारी भोजन पर लगेगा प्रतिबंध?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन पर किसी व्यापक प्रतिबंध की घोषणा नहीं हुई है। विश्व हिंदू परिषद ने भी स्पष्ट किया है कि उसने शाकाहारी या मांसाहारी भोजन पर रोक लगाने संबंधी कोई निर्देश जारी नहीं किया है।

इसलिए धीरेंद्र शास्त्री की अपील और विश्व हिंदू परिषद की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों के आसपास मांसाहारी भोजन बनाए जाने पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है, जबकि विश्व हिंदू परिषद ने भोजन पर किसी प्रकार के प्रतिबंध से इनकार किया है।

आने वाले दिनों में जैसे-जैसे दुर्गा पूजा की तैयारियां आगे बढ़ेंगी, यह मुद्दा और चर्चा में आ सकता है। फिलहाल मुख्य विवाद धार्मिक स्थलों की मर्यादा, खान-पान की स्वतंत्रता और पूजा आयोजनों की परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर है।

दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग समुदायों और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए स्वच्छता, धार्मिक मर्यादा और शांतिपूर्ण आयोजन पर ध्यान देना इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है।

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