एप्पल के आगामी आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स को लेकर भारत के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। कंपनी ने सितंबर में होने वाले वैश्विक बाजार प्रवेश से पहले भारत में इन दोनों उच्च श्रेणी के फोन का निर्माण शुरू कर दिया है। इस घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात केवल यह नहीं है कि आईफोन का निर्माण भारत में हो रहा है, बल्कि यह है कि इस बार भारत में उत्पादन फोन की वैश्विक शुरुआत के साथ ही किया जा रहा है।
दो वर्ष पहले जब एप्पल ने पहली बार अपने उच्च श्रेणी वाले प्रो संस्करणों का भारत में निर्माण शुरू किया था, तब यहां उत्पादन वैश्विक बाजार में फोन आने के कई सप्ताह बाद शुरू हुआ था। उस समय भारत में बने फोन का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करने के लिए इस्तेमाल होता था। लेकिन इस बार स्थिति काफी अलग है।
आईफोन 18 प्रो मैक्स के भारत में बने शुरुआती फोन का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप भेजे जाने की संभावना है। इसका अर्थ यह है कि 18 सितंबर को अमेरिका में खरीदा जाने वाला आईफोन संभवतः तमिलनाडु या कर्नाटक की किसी फैक्टरी में तैयार हुआ हो सकता है।
भारत में पांच निर्माण केंद्र सक्रिय
भारत में एप्पल के आईफोन निर्माण का विस्तार लगातार बढ़ रहा है। तमिलनाडु और कर्नाटक में कुल पांच प्रमुख निर्माण केंद्रों पर उत्पादन गतिविधियां चल रही हैं। इनमें फॉक्सकॉन सबसे बड़ा निर्माण साझेदार बना हुआ है।
तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में स्थित फॉक्सकॉन का केंद्र आईफोन उत्पादन का महत्वपूर्ण आधार है। इसके अलावा बेंगलुरु हवाई अड्डे के पास भी कंपनी का एक बड़ा निर्माण केंद्र है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का होसुर स्थित केंद्र भी आईफोन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत में बनने वाले कुल आईफोन में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई बताई जा रही है। वहीं उत्पादन की मात्रा के मामले में फॉक्सकॉन अभी भी सबसे आगे है।
फॉक्सकॉन ने आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स का बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू कर दिया है। आने वाले सप्ताहों में उत्पादन को और बढ़ाए जाने की संभावना है। उत्पादन की गति भारत, अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों से मिलने वाले अग्रिम आदेशों के अनुसार तय की जाएगी।
निर्यात मूल्य में टाटा ने बनाई बढ़त
भारत के आईफोन निर्माण क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। निर्यात के कुल मूल्य के मामले में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने फॉक्सकॉन को पीछे छोड़ दिया है।
सरकार को दी गई विक्रेता कंपनियों की जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत से टाटा द्वारा निर्यात किए गए आईफोन का कुल मूल्य लगभग 26.3 अरब डॉलर रहा। इसी अवधि में फॉक्सकॉन के निर्यात का मूल्य करीब 25.6 अरब डॉलर बताया गया है।
यह उपलब्धि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी ने आईफोन निर्माण के क्षेत्र में अपेक्षाकृत हाल में प्रवेश किया था। कंपनी ने पहले विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के संचालन से जुड़े कारोबार को अपने अधीन किया और इसके बाद आईफोन के उच्च श्रेणी वाले प्रो संस्करणों का निर्माण शुरू किया।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, फॉक्सकॉन जहां उत्पादन की संख्या में आगे है, वहीं टाटा अधिक मूल्य वाले उत्पादों के निर्यात में मजबूत स्थिति बना रहा है। इसका संकेत यह भी माना जा रहा है कि कंपनी को अधिक जटिल और महंगे उपकरणों के निर्माण की जिम्मेदारी मिल रही है।
चार वर्षों में भारत की हिस्सेदारी चार गुना
भारत में आईफोन निर्माण का विस्तार बेहद तेज गति से हुआ है। अनुमान के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में बनने वाले कुल आईफोन में भारत की हिस्सेदारी करीब छह प्रतिशत थी। वर्ष 2026 में यह हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो केवल चार वर्षों में वैश्विक आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग चार गुना बढ़ जाएगी।
भारत से स्मार्टफोन निर्यात के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश से स्मार्टफोन का निर्यात लगभग 9.84 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 23.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अमेरिका भारत से स्मार्टफोन निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
चीन से बाहर उत्पादन की एप्पल को रणनीतिक मदद
भारत में प्रो श्रेणी के आईफोन का निर्माण केवल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति नहीं है। इसके पीछे एप्पल की वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की योजना भी दिखाई देती है।
चीन से बाहर अधिक जटिल आईफोन का निर्माण करने से कंपनी को किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, विभिन्न देशों में आयात शुल्क और व्यापार संबंधी दबावों के बीच उत्पादन को अलग-अलग स्थानों पर फैलाना एप्पल के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत इस रणनीति में तेजी से महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर रहा है। अब देश केवल कम कीमत वाले या पुराने मॉडल बनाने का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि अधिक महंगे और तकनीकी रूप से जटिल फोन के निर्माण में भी उसकी भूमिका बढ़ रही है।
पहला मोड़दार आईफोन अभी भारत में नहीं
एप्पल का पहला मोड़कर इस्तेमाल किया जाने वाला फोन, जिसे संभावित रूप से आईफोन अल्ट्रा नाम दिया जा सकता है, शुरुआती उत्पादन चरण में भारत में बनने की संभावना नहीं है।
यह एप्पल की अब तक की निर्माण रणनीति से मेल खाता है। किसी बिल्कुल नए उपकरण में नए जोड़ तंत्र, नई प्रदर्शन तकनीक और उत्पादन की गुणवत्ता से जुड़े कई जोखिम होते हैं। ऐसे उत्पादों का निर्माण आमतौर पर पहले उन केंद्रों में किया जाता है जहां कंपनी के पास वर्षों का अनुभव और स्थापित उत्पादन व्यवस्था मौजूद है।
इसलिए माना जा रहा है कि शुरुआती पीढ़ी के मोड़दार फोन का उत्पादन चीन में ही केंद्रित रह सकता है। यदि निर्माण प्रक्रिया सफल और स्थिर होती है, तो अगली पीढ़ी के संस्करणों के लिए भारत को अधिक महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है।
भारत में बनने से आईफोन सस्ता होगा?
स्थानीय निर्माण से सामान्य तौर पर आयात शुल्क से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिलती है। अतीत में इसी कारण भारत में कुछ आईफोन मॉडल की कीमतों को नियंत्रित रखने में एप्पल को लाभ मिला है। लेकिन आईफोन 18 प्रो मैक्स के मामले में इस बार तस्वीर इतनी सरल नहीं है।
फोन के प्रमुख घटकों की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ रहा है। खास तौर पर स्मृति संबंधी घटकों की लागत में तेज वृद्धि बताई जा रही है।
आईफोन 17 प्रो मैक्स के 256 जीबी संस्करण की भारत में शुरुआती कीमत लगभग 1,49,900 रुपये रही थी। आईफोन 18 प्रो मैक्स के लिए लगभग 1,69,990 रुपये की कीमत का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि यह केवल बाजार में चल रहा अनुमान है और एप्पल की आधिकारिक कीमत इससे अलग हो सकती है।
कुछ आकलनों के अनुसार कीमत लगभग 1,49,900 रुपये के आसपास रखी जा सकती है, जबकि दूसरे अनुमान 1,54,900 से 1,59,900 रुपये के बीच कीमत की संभावना बताते हैं। अधिक आक्रामक अनुमान 1,69,990 रुपये से लेकर लगभग 1,79,900 रुपये तक की कीमत का संकेत देते हैं।
स्मृति घटकों की बढ़ती लागत बड़ा कारण
आईफोन 18 प्रो मैक्स की संभावित महंगी कीमत के पीछे सबसे बड़ा कारण स्मृति और भंडारण से जुड़े घटकों की बढ़ती लागत मानी जा रही है। उद्योग के कुछ आकलनों में इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख घटकों की कुल लागत में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 300 डॉलर तक की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
एक टेराबाइट क्षमता वाले संस्करण में भंडारण स्मृति की लागत अकेले 250 डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। वहीं मुख्य स्मृति घटक की कीमत भी पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक बताई जा रही है।
हालांकि अलग-अलग विश्लेषकों के अनुमान एक जैसे नहीं हैं। इसलिए 1,69,990 रुपये की संभावित कीमत को अंतिम कीमत मानना उचित नहीं होगा। एप्पल की आधिकारिक घोषणा के बाद ही वास्तविक कीमत स्पष्ट होगी।
आईफोन 18 प्रो मैक्स में क्या मिल सकता है
आगामी फोन में नई पीढ़ी की प्रोसेसर तकनीक इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। इसमें लगभग 6.9 इंच का उन्नत प्रदर्शन, 4.8 करोड़ पिक्सेल वाला मुख्य कैमरा और परिवर्तनीय छिद्र वाली कैमरा प्रणाली मिलने की बात कही जा रही है।
मुख्य कैमरे का परिवर्तनीय छिद्र इस फोन की सबसे महत्वपूर्ण संभावित नई विशेषताओं में से एक हो सकता है। यह कैमरे के भीतर वास्तविक यांत्रिक पत्तियों वाले छिद्र की मदद से कम रोशनी में अधिक प्रकाश अंदर आने दे सकता है। वहीं तेज रोशनी में छिद्र को छोटा करके दृश्य की गहराई को बेहतर नियंत्रित किया जा सकता है।
दूर की वस्तुओं की तस्वीरों के लिए भी बेहतर कैमरा प्रणाली मिलने की संभावना है। कुछ नियामकीय दस्तावेजों के आधार पर बैटरी क्षमता लगभग 5,567 मिलीएम्पियर घंटा होने का अनुमान लगाया गया है।
फोन का वजन 240 ग्राम से अधिक होने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे यह अब तक के सबसे भारी आईफोन में शामिल हो सकता है। गहरे लाल रंग को भी नए विशेष रंग के रूप में पेश किए जाने की चर्चा है।
इस बार सामान्य आईफोन 18 सितंबर में नहीं आएगा
आईफोन 18 श्रृंखला को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि सभी नए मॉडल एक साथ सितंबर में पेश नहीं किए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आईफोन 18, आईफोन 18ई और दूसरी पीढ़ी का आईफोन एयर वर्ष 2027 के आसपास अलग चरण में पेश किया जा सकता है।
इसका अर्थ यह होगा कि सितंबर में मुख्य रूप से प्रो श्रेणी के मॉडल पर ध्यान रहेगा। यदि यह रणनीति लागू होती है, तो वर्ष 2007 में मूल आईफोन आने के बाद पहली बार ऐसा होगा जब सितंबर में नया सामान्य श्रेणी वाला आईफोन पेश नहीं किया जाएगा।
सितंबर में बिक्री शुरू होने की संभावना
संभावित कार्यक्रम के अनुसार एप्पल अगस्त के अंतिम सप्ताह के आसपास अपने कार्यक्रम के निमंत्रण जारी कर सकती है। मुख्य प्रस्तुति नौ सितंबर को होने की संभावना बताई जा रही है। इसके बाद 11 या 12 सितंबर के आसपास अग्रिम बुकिंग शुरू हो सकती है।
भारत में बिक्री 18 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। आईफोन 14 के बाद से भारत को शुरुआती वैश्विक बाजारों में शामिल किया जाता रहा है। इस बार भारत में प्रो मॉडल का उत्पादन भी निर्माण चक्र की शुरुआत से हो रहा है, इसलिए भारत में शुरुआती बिक्री को लेकर मजबूत आपूर्ति बनाए रखना कंपनी के लिए पहले की तुलना में आसान हो सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव
भारत का आईफोन निर्माण क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। कभी जहां देश में मुख्य रूप से कम कीमत वाले आईफोन या घरेलू बाजार के लिए उपकरण तैयार किए जाते थे, वहीं अब यहां एप्पल के सबसे महंगे और जटिल फोन का निर्माण किया जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि भारत में बने आईफोन केवल भारतीय ग्राहकों तक सीमित नहीं रहेंगे। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े वैश्विक बाजारों में भेजे जाने वाले फोन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी भारत में तैयार हो सकता है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात मूल्य के मामले में फॉक्सकॉन से आगे निकलना और वैश्विक आईफोन उत्पादन में भारत की संभावित 26 प्रतिशत हिस्सेदारी इस बदलाव की व्यापकता को दर्शाती है।
आईफोन 18 प्रो मैक्स की भारत में अंतिम कीमत चाहे 1,49,900 रुपये हो या 1,69,990 रुपये, वह अंतर समय के साथ भुलाया जा सकता है। लेकिन भारत का एप्पल के वैश्विक उत्पादन केंद्रों में एक प्रमुख स्थान हासिल करना देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र के लिए कहीं अधिक बड़ा और दीर्घकालिक बदलाव साबित हो सकता है।


