रात में बिस्तर पर लेटने के कुछ ही देर बाद जब आंखें बंद होने लगती हैं और शरीर धीरे-धीरे नींद की ओर बढ़ता है, तभी अचानक पैर में तेज झटका लगता है या पूरा शरीर एक पल के लिए उछल जाता है। कई बार यह हरकत इतनी तेज होती है कि व्यक्ति पूरी तरह जाग जाता है। कुछ लोगों को इस दौरान ऐसा भी महसूस होता है जैसे वे अचानक ऊंचाई से नीचे गिर रहे हों। इसके साथ क्षणभर के लिए डर या घबराहट भी महसूस हो सकती है।
नींद आने के ठीक पहले होने वाली इस अचानक और अनैच्छिक शारीरिक हरकत को चिकित्सकीय भाषा में निद्राप्रारंभ झटका या निद्रा आरंभिक झटका कहा जाता है। यह घटना बहुत सामान्य मानी जाती है और अधिकांश मामलों में इसके पीछे किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। यह मुख्य रूप से उस समय दिखाई देती है जब शरीर जागने की अवस्था से नींद की अवस्था में प्रवेश कर रहा होता है।
नींद आने के समय शरीर में क्या होता है?
नींद में जाना कोई ऐसा बदलाव नहीं है जिसमें शरीर एक पल में पूरी तरह निष्क्रिय हो जाए। वास्तव में, जागने से सोने तक पहुंचने के दौरान मस्तिष्क, तंत्रिकाएं, मांसपेशियां और चेतना लगातार अपनी गतिविधियों में बदलाव करती हैं।
जब व्यक्ति नींद की ओर बढ़ता है, तब मस्तिष्क की सक्रियता धीरे-धीरे कम होने लगती है। शरीर की मांसपेशियां भी आराम की अवस्था में जाने लगती हैं। इसी परिवर्तन के बीच तंत्रिका तंत्र की गतिविधियों में कुछ क्षणों के लिए अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसी दौरान किसी मांसपेशी या शरीर के कई हिस्सों में अचानक अनैच्छिक संकुचन हो सकता है।
यही अचानक होने वाली हरकत निद्रा आरंभिक झटके के रूप में दिखाई देती है।
अचानक पैर या पूरा शरीर क्यों हिल जाता है?
इस घटना का एक ही निश्चित कारण अभी तक पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई संभावित कारण बताए हैं। सबसे प्रमुख विचार यह है कि जागने और सोने के बीच होने वाले परिवर्तन के दौरान शरीर की गति नियंत्रित करने वाली तंत्रिका प्रणालियां कुछ समय के लिए अस्थिर हो सकती हैं।
जब मस्तिष्क जागरूकता कम करने और शरीर को विश्राम की स्थिति में ले जाने की प्रक्रिया में होता है, तब मांसपेशियों की गतिविधि में अचानक बदलाव हो सकता है। इसका परिणाम एक तेज और बहुत कम समय तक रहने वाला संकुचन हो सकता है।
कभी यह केवल पैर में दिखाई देता है, कभी हाथ में और कभी पूरे शरीर में एक साथ झटका महसूस हो सकता है। अलग-अलग लोगों में इसकी तीव्रता भी अलग हो सकती है।
गिरने जैसा एहसास क्यों होता है?
निद्रा आरंभिक झटके के साथ कुछ लोगों को अचानक गिरने जैसा अनुभव होता है। ऐसा महसूस हो सकता है कि बिस्तर के नीचे जमीन खिसक गई या व्यक्ति किसी ऊंचाई से नीचे जा रहा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अनुभव भी जागने से नींद की ओर जाने वाली जटिल प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है। जब शरीर की मांसपेशियां तेजी से ढीली पड़ रही होती हैं और मस्तिष्क अपनी जागरूकता कम कर रहा होता है, तब शरीर की स्थिति और गति से संबंधित संकेतों में क्षणिक बदलाव हो सकता है। मस्तिष्क इस बदलाव को कभी-कभी गिरने जैसी अनुभूति के रूप में महसूस कर सकता है।
हालांकि, हर व्यक्ति को इस तरह का अनुभव नहीं होता। कुछ लोगों को केवल शरीर में हल्का झटका महसूस होता है, जबकि कुछ लोगों में हरकत इतनी तेज होती है कि वे तुरंत जाग जाते हैं।
तनाव और थकान से बढ़ सकती है समस्या
कई लोगों ने देखा है कि जब वे अत्यधिक तनाव में होते हैं या लगातार कम सो रहे होते हैं, तब सोते समय शरीर के झटके अधिक दिखाई देते हैं। मानसिक तनाव और नींद की कमी शरीर की सामान्य नींद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
दिनभर की थकान के बाद जब शरीर आराम की अवस्था में जाने की कोशिश करता है, तब जागने और सोने के बीच का परिवर्तन अधिक स्पष्ट महसूस हो सकता है। इसी वजह से कुछ लोगों में ऐसे झटके कभी-कभी अधिक तीव्र या बार-बार महसूस हो सकते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर तनावग्रस्त व्यक्ति को निश्चित रूप से ऐसा झटका आएगा। अलग-अलग लोगों का तंत्रिका तंत्र नींद में बदलाव के प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है।
चाय-कॉफी और अन्य उत्तेजक पदार्थों का प्रभाव
अत्यधिक मात्रा में चाय या कॉफी जैसे उत्तेजक पेय पदार्थों का सेवन भी कुछ लोगों में नींद आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह तंबाकू में मौजूद उत्तेजक पदार्थ भी शरीर की तंत्रिका गतिविधियों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति शाम या रात में अधिक मात्रा में उत्तेजक पदार्थों का सेवन करता है, तो उसके लिए शांत होकर सोना कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में जागने से नींद की ओर जाने वाली प्रक्रिया अधिक अस्थिर महसूस हो सकती है।
हालांकि, केवल एक कप चाय या कॉफी पीने से हर व्यक्ति में शरीर का झटका शुरू हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा। इसके पीछे कई कारकों की भूमिका हो सकती है, जिनमें नींद की मात्रा, थकान, तनाव और व्यक्तिगत शारीरिक प्रतिक्रिया शामिल हैं।
अचानक झटका लगने पर नींद क्यों टूट जाती है?
नींद की शुरुआत के दौरान चेतना धीरे-धीरे कम हो रही होती है। इसी समय यदि शरीर में अचानक तेज मांसपेशीय संकुचन होता है, तो यह मस्तिष्क के लिए एक बहुत शक्तिशाली संवेदनात्मक संकेत बन सकता है।
अचानक होने वाली हरकत से मस्तिष्क कुछ क्षणों के लिए फिर से जागरूकता की अवस्था में लौट सकता है। यही कारण है कि कई बार व्यक्ति को लगता है कि वह सो ही रहा था और अचानक किसी ने उसे जगा दिया।
कुछ मामलों में व्यक्ति केवल हल्का सा झटका महसूस करता है और दोबारा तुरंत सो जाता है। दूसरी ओर, तेज झटके के साथ डर या गिरने जैसी अनुभूति होने पर पूरी नींद टूट सकती है।
क्या हर बार चिंता करने की जरूरत है?
अधिकांश लोगों में कभी-कभार होने वाला निद्रा आरंभिक झटका सामान्य घटना माना जाता है। यदि यह केवल सोते समय कभी-कभी होता है और दिन के समय किसी अन्य समस्या के साथ नहीं जुड़ा है, तो आमतौर पर घबराने की आवश्यकता नहीं होती।
फिर भी यदि शरीर में असामान्य हरकतें बहुत बार होने लगें, नींद लगातार प्रभावित हो, हरकतें लंबे समय तक चलें या उनके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित हो सकता है। विशेष रूप से तब ध्यान देना जरूरी है जब व्यक्ति को लगे कि ये हरकतें सामान्य नींद आने वाले झटकों से अलग हैं।
इसलिए कभी-कभार सोते समय पैर या शरीर का अचानक झटका खाना अपने आप में किसी गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है।
नींद की प्रक्रिया को समझना क्यों जरूरी है?
सोते समय शरीर का अचानक झटका हमें यह समझाता है कि नींद वास्तव में शरीर के पूरी तरह बंद हो जाने की प्रक्रिया नहीं है। जागरूकता से नींद की ओर जाते समय मस्तिष्क और शरीर के कई हिस्सों में लगातार बदलाव होते रहते हैं।
इस परिवर्तन के दौरान कभी-कभी तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों की गतिविधियों में क्षणिक असंगति दिखाई दे सकती है। उसका परिणाम एक छोटा लेकिन अचानक महसूस होने वाला झटका हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने इस घटना के बारे में काफी जानकारी हासिल की है, लेकिन इसके पीछे मौजूद सभी प्रक्रियाओं को अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है। यही कारण है कि निद्रा आरंभिक झटका आज भी नींद से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन का एक दिलचस्प विषय बना हुआ है।
कुल मिलाकर, सोते समय अचानक शरीर का झटका खाना एक सामान्य और आम घटना है। तनाव, थकान, नींद की कमी और उत्तेजक पदार्थों का सेवन कुछ लोगों में इसकी संभावना या तीव्रता को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, कभी-कभार होने वाली इस हरकत को लेकर अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है। यह अक्सर शरीर के जागने से नींद में प्रवेश करने की जटिल प्रक्रिया का एक छोटा और सामान्य हिस्सा होता है।


