लद्दाख में Census 2027 की दूसरे चरण की जनसंख्या गणना शुरू हो गई है। देश के अधिकांश हिस्सों की तुलना में लद्दाख में यह प्रक्रिया पहले पूरी की जा रही है, क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों, दुर्गम क्षेत्रों और कड़ाके की सर्दियों के कारण बाद के महीनों में आवाजाही और घर-घर पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। केंद्र सरकार ने लद्दाख समेत कुछ बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों के लिए सामान्य राष्ट्रीय कार्यक्रम से अलग समय-सारणी तय की है।
लद्दाख में Self-Enumeration यानी स्वयं गणना की प्रक्रिया 17 अगस्त से शुरू हुई, जो 31 अगस्त तक जारी रहेगी। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक घर-घर जाकर Population Enumeration की जाएगी। Census अधिकारियों ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश को कवर करने के लिए लगभग 637 Enumeration Blocks बनाए जाने का अनुमान लगाया है।
सामान्य परिस्थितियों में देश के अधिकांश हिस्सों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में निर्धारित है। लेकिन लद्दाख जैसे बर्फ से प्रभावित और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए सितंबर 2026 में ही यह प्रक्रिया पूरी करने का फैसला किया गया है। इस तरह लद्दाख Census 2027 के दूसरे चरण को पूरा करने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश बनने जा रहा है।
सर्दियों से पहले गणना पूरी करने की चुनौती
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति Census अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। यहां कई इलाके समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं और सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कई स्थानों तक पहुंच मुश्किल हो जाती है। सड़क संपर्क प्रभावित होने के साथ-साथ तापमान में भारी गिरावट भी सरकारी कर्मचारियों के लिए घर-घर जाकर डेटा जुटाने की प्रक्रिया को कठिन बना सकती है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के Chief Principal Census Officer तथा Director of Census Operations अमित शर्मा ने बताया कि लद्दाख में समय से पहले Population Enumeration कराने का फैसला वहां की कठोर सर्दियों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित पहुंच को ध्यान में रखकर लिया गया है।
लद्दाख के लिए इस जनगणना की reference date 1 अक्टूबर 2026 की रात 00:00 बजे निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि जनसंख्या से संबंधित गणना और आंकड़ों को तय संदर्भ समय के आधार पर दर्ज किया जाएगा।
सेना और ITBP प्रतिष्ठान भी होंगे शामिल
इस बार लद्दाख की जनगणना केवल आम नागरिकों के घरों तक सीमित नहीं रहेगी। Census अधिकारियों के अनुसार, Army, Indo-Tibetan Border Police (ITBP) और Air Force establishments को भी Population Enumeration के दौरान शामिल किया जाएगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि House Listing Operation के दौरान मुख्य रूप से घरेलू और आवासीय इकाइयों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। उस चरण में सैन्य और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को household-focused exercise के तहत शामिल नहीं किया गया था। हालांकि, दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के दौरान इन प्रतिष्ठानों को भी कवर किया जाएगा।
लद्दाख की रणनीतिक और सीमावर्ती स्थिति को देखते हुए सेना और ITBP की बड़ी मौजूदगी है। इसलिए पूरे केंद्र शासित प्रदेश की वास्तविक और व्यापक जनसंख्या तस्वीर तैयार करने के लिए इन प्रतिष्ठानों को Population Enumeration में शामिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब 40 प्रकार की जानकारी होगी दर्ज
Census 2027 के Population Enumeration चरण में लोगों से लगभग 40 अलग-अलग श्रेणियों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें जनसांख्यिकीय विवरण के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय, प्रवास, दिव्यांगता, भाषा तथा प्रजनन से संबंधित जानकारी शामिल होगी।
इस बार की Census exercise में जाति की गणना यानी Caste Enumeration भी की जा रही है। इससे देश में विभिन्न सामाजिक और जनसांख्यिकीय समूहों की स्थिति से संबंधित नए आंकड़े सामने आने की संभावना है।
Census अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। लद्दाख में Census का पहला चरण यानी House Listing Operation 1 जून से 30 जून के बीच पूरा किया गया था। Census Directorate के अनुसार, इस चरण में 100 प्रतिशत डिजिटल डेटा कलेक्शन दर्ज किया गया।
डिजिटल जनगणना से बढ़ा डेटा को लेकर सवाल
Census प्रक्रिया के डिजिटल होने के साथ नागरिकों द्वारा डेटा की प्रकृति और गोपनीयता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लोगों से केवल अधिसूचित questionnaires के तहत निर्धारित जानकारी ही मांगी जा रही है।
Census अधिकारियों ने यह भी जोर दिया है कि Census के दौरान एकत्र किया गया डेटा गोपनीय रखा जाता है। यानी जनगणना प्रक्रिया में दी गई जानकारी को सामान्य रूप से सार्वजनिक नहीं किया जाता और इसकी सुरक्षा के लिए निर्धारित नियम लागू होते हैं।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि Aadhaar और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों की जानकारी जहां लागू या उपलब्ध हो, वहां notified exercise के तहत मांगी जा सकती है। इस संबंध में लोगों को यह समझना जरूरी है कि Census कर्मचारियों द्वारा मांगी जाने वाली जानकारी आधिकारिक प्रश्नावली और प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।
2011 के बाद पहली बड़ी राष्ट्रीय जनगणना
Census 2027 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2011 के बाद देश की अगली पूर्ण राष्ट्रीय जनगणना होगी। वर्ष 2011 में आखिरी बार देशव्यापी जनसंख्या गणना पूरी हुई थी। इसके बाद विभिन्न कारणों से अगली जनगणना निर्धारित समय पर नहीं हो सकी।
लद्दाख के लिए इसका महत्व और अधिक है। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसलिए Census 2027 इस नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण नया demographic baseline उपलब्ध कराएगी।
इससे लद्दाख की आबादी, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास, परिवारों और अन्य सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं को लेकर अधिक अद्यतन और व्यापक आंकड़े उपलब्ध होंगे। ये आंकड़े भविष्य में प्रशासनिक योजना, सार्वजनिक सेवाओं और विकास संबंधी नीतियां तैयार करने में उपयोगी हो सकते हैं।
लगभग एक महीने में पूरा करना होगा बड़ा अभियान
लद्दाख में Census authorities के सामने अब समय की बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के पास सितंबर के दौरान विशाल और पहाड़ी क्षेत्र में घर-घर पहुंचकर Population Enumeration पूरी करने का सीमित समय है।
दूरदराज के गांवों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने के लिए कर्मचारियों को स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार काम करना होगा। सितंबर के बाद मौसम तेजी से बदल सकता है और बर्फबारी शुरू होने के साथ कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की संभावना रहती है।
इसी वजह से लद्दाख के लिए तय की गई समय-सारणी केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भौगोलिक और मौसम संबंधी जरूरत भी है। 17 से 31 अगस्त तक Self-Enumeration और 1 से 30 सितंबर तक Door-to-Door Enumeration का क्रम इस तरह बनाया गया है कि सर्दियों के गंभीर होने से पहले अधिकांश प्रक्रिया पूरी की जा सके।
कुल मिलाकर, Census 2027 का लद्दाख चरण देश की आगामी जनगणना के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। इसमें नागरिक आबादी के साथ सैन्य और सीमा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को भी Population Enumeration में शामिल किया जाएगा। डिजिटल डेटा संग्रह, जाति गणना और व्यापक सामाजिक-आर्थिक जानकारी के कारण इस Census से लद्दाख की वर्तमान जनसांख्यिकीय तस्वीर पहले की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।


