भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट में भारत के सुनहरे दौर का श्रेय पूर्व कप्तान विराट कोहली और पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री को दिया है। रहाणे का मानना है कि इन दोनों की जोड़ी ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट की सोच को पूरी तरह बदल दिया। उनकी आक्रामक रणनीति, खिलाड़ियों पर भरोसा और विदेशी परिस्थितियों में जीत हासिल करने की मानसिकता ने टीम इंडिया को दुनिया की सबसे मजबूत टेस्ट टीमों में शामिल कर दिया।
38 वर्षीय रहाणे हाल ही में ‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में शामिल हुए। इस दौरान उनके साथ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलिस्टेयर कुक, माइकल वॉन, डेविड लॉयड और फिल टफनेल भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान रहाणे ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट के बदलाव, विराट कोहली की कप्तानी और मौजूदा समय में टेस्ट क्रिकेट की स्थिति पर खुलकर अपनी राय रखी।
धोनी के संन्यास के बाद आया बड़ा बदलाव
रहाणे ने बताया कि जब महेंद्र सिंह धोनी ने वर्ष 2014 में मेलबर्न टेस्ट के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया, तब भारतीय टीम एक संक्रमण के दौर से गुजर रही थी। इसके बाद विराट कोहली ने 2015 में टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली और रवि शास्त्री के साथ मिलकर टीम की मानसिकता को पूरी तरह बदल दिया।
रहाणे ने कहा कि विराट और रवि शास्त्री ने खिलाड़ियों के भीतर यह विश्वास पैदा किया कि भारत केवल घरेलू मैदानों पर ही नहीं बल्कि विदेशी सरजमीं पर भी मुकाबला जीत सकता है। पहले जहां टीम कई बार रक्षात्मक क्रिकेट खेलती थी, वहीं इस नई सोच ने खिलाड़ियों को आक्रामक और निडर क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया।
उनके अनुसार भारतीय टीम अब विरोधी टीम पर दबाव बनाने लगी और हर मैच जीतने के इरादे से मैदान पर उतरने लगी। यही मानसिकता आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी।
विदेशी धरती पर भारत की ऐतिहासिक सफलताएं
विराट कोहली और रवि शास्त्री की जोड़ी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। इनमें सबसे बड़ी उपलब्धि वर्ष 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतना रही। भारत ने चार मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की और इतिहास रच दिया।
इसके बाद 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम ने एक और अविश्वसनीय कहानी लिखी। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बावजूद टीम ने शानदार वापसी करते हुए सीरीज 2-1 से जीत ली।
उस समय विराट कोहली पहले टेस्ट के बाद स्वदेश लौट गए थे और अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी संभाली थी। रहाणे के नेतृत्व में भारत ने मेलबर्न में जीत दर्ज की, सिडनी टेस्ट ड्रॉ कराया और फिर गाबा में ऑस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरी बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की।
यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि गाबा में ऑस्ट्रेलिया पिछले तीन दशकों से कोई टेस्ट मैच नहीं हारा था।
खिलाड़ियों को निडर क्रिकेट खेलने की आजादी मिली
रहाणे ने विराट कोहली की कप्तानी की सबसे बड़ी विशेषता खिलाड़ियों पर उनका भरोसा बताया। उन्होंने कहा कि विराट हमेशा बल्लेबाजों को शुरुआत से ही सकारात्मक क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करते थे।
रहाणे ने कहा कि विराट का संदेश हमेशा साफ होता था कि पहली ही गेंद से विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाया जाए। वह खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की पूरी आजादी देते थे और असफल होने के डर से मुक्त रखते थे।
उनका मानना है कि जब कप्तान खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाता है तो खिलाड़ी भी मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करते हैं। यही कारण था कि उस दौर में भारतीय टीम लगातार शानदार प्रदर्शन करती रही।
फिटनेस और तेज गेंदबाजी पर भी दिया गया जोर
रहाणे के अनुसार विराट कोहली और रवि शास्त्री ने केवल बल्लेबाजी या कप्तानी की सोच ही नहीं बदली, बल्कि टीम की फिटनेस संस्कृति को भी नए स्तर पर पहुंचाया।
भारतीय टीम ने तेज गेंदबाजों के मजबूत आक्रमण पर विशेष ध्यान दिया। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा, मोहम्मद सिराज और उमेश यादव जैसे गेंदबाजों ने विदेशी परिस्थितियों में विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया।
बेहतर फिटनेस, आक्रामक रवैया और तेज गेंदबाजी के दम पर भारत ने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी कठिन परिस्थितियों में भी चुनौतीपूर्ण प्रदर्शन किया।
मौजूदा भारतीय टेस्ट टीम को लेकर जताई चिंता
रहाणे ने वर्तमान भारतीय टेस्ट टीम के प्रदर्शन पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में घर और विदेश दोनों जगह टीम के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली है।
उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में केवल प्रतिभा काफी नहीं होती, बल्कि मजबूत चरित्र, मानसिक दृढ़ता और कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक संघर्ष करने की क्षमता भी बेहद जरूरी होती है।
रहाणे के अनुसार आज के समय में ऐसे खिलाड़ी कम दिखाई देते हैं जो मुश्किल परिस्थितियों में लंबे समय तक टिककर टीम को संभाल सकें। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट की असली पहचान धैर्य, अनुशासन और मानसिक मजबूती है।
टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर रहाणे की राय
रहाणे ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम के लिए खड़े रह सकें। उन्होंने माना कि आधुनिक क्रिकेट में टी-20 और वनडे का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की अपनी अलग पहचान और महत्व है।
उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों में मानसिक मजबूती, प्रतिस्पर्धी भावना और लंबे प्रारूप के प्रति समर्पण विकसित किया जाए तो टेस्ट क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
रहाणे का मानना है कि विराट कोहली और रवि शास्त्री के दौर में भारतीय टीम ने जिस आक्रामक सोच, आत्मविश्वास और जीत की भूख को अपनाया था, वही मानसिकता भविष्य में भी भारतीय टेस्ट क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। उनके अनुसार भारतीय क्रिकेट को फिर से उसी जुझारू और निडर रवैये की आवश्यकता है जिसने एक समय दुनिया की सबसे मजबूत टीमों को भी चुनौती देने का साहस दिया था।


