जम्मू-कश्मीर में लगातार बिगड़ते मौसम और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने देश की दो प्रमुख धार्मिक यात्राओं—श्री माता वैष्णो देवी यात्रा और श्री अमरनाथ जी यात्रा—को एहतियातन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मौसम सामान्य होने और मार्गों की सुरक्षा का विस्तृत आकलन करने के बाद ही यात्राएं दोबारा शुरू की जाएंगी।
कटरा और त्रिकुटा पर्वत क्षेत्र में लगातार खराब मौसम, बारिश और फिसलन भरे रास्तों के कारण श्री माता वैष्णो देवी यात्रा फिलहाल रोक दी गई है। प्रशासन के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में यात्रा जारी रखना श्रद्धालुओं के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए एहतियात के तौर पर यात्रा को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और यात्रा शुरू होने से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक माध्यमों से ही प्राप्त करें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम में सुधार होने और मार्ग सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद यात्रा फिर से शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में आने वाले दिनों के दौरान व्यापक वर्षा, गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसी पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा उपायों को और मजबूत कर दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इसी बीच, श्री अमरनाथ जी यात्रा को भी आज से पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा अगले कुछ दिनों तक प्रतिकूल मौसम की चेतावनी जारी किए जाने के बाद यह फैसला लिया गया। प्रशासन का मानना है कि कठिन पर्वतीय मार्गों पर भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान यात्रा जारी रखना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उचित नहीं होगा।
अधिकारियों के अनुसार, अगले आदेश तक बालटाल और नुनवान/चंदनवाड़ी बेस कैंपों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौसम की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने और यात्रा मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं की आवाजाही फिर से शुरू होगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा रोकने का निर्णय केवल सुरक्षा कारणों से लिया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी संभावित दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा से श्रद्धालुओं की रक्षा करना है। पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने, भूस्खलन, पत्थर गिरने और तेज बारिश जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए यह कदम आवश्यक माना गया।
इस वर्ष की श्री अमरनाथ जी यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और अब तक 3.7 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से इस कठिन लेकिन अत्यंत श्रद्धापूर्ण यात्रा में शामिल होते हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस बार अमरनाथ यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा तथा रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियां लगातार समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं।
श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे मौसम सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखें और यात्रा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही, जो श्रद्धालु पहले से जम्मू-कश्मीर में मौजूद हैं, उन्हें प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बेहद तेजी से बदल सकता है। ऐसे में समय रहते यात्रा को रोकना भविष्य में होने वाले संभावित हादसों को टालने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है और जैसे ही हालात अनुकूल होंगे, दोनों यात्राओं को पुनः शुरू करने की घोषणा की जाएगी।


