देश में बढ़ते फर्जी फोन कॉल, पहचान की नकल कर की जाने वाली ठगी और दूरसंचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राधिकरण ने सोमवार को दूरसंचार कंपनियों को गैर-वित्तीय क्षेत्र की पात्र संस्थाओं को 1601 क्रम वाली विशेष दूरभाष संख्या व्यवस्था में शामिल करने का निर्देश दिया है।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों के लिए वास्तविक सेवा और लेनदेन से जुड़े फोन कॉल की पहचान आसान बनाना है। अभी तक विशेष क्रम वाली दूरभाष संख्याओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी संस्थाओं और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं द्वारा किया जाता रहा है। अब इस व्यवस्था का विस्तार बिजली, पानी, गैस, रसोई गैस वितरण, डाक और पार्सल वितरण तथा माल ढुलाई जैसी सेवाओं तक किया जाएगा।
इस बदलाव से उपभोक्ताओं को सामान्य दस अंकों वाली मोबाइल संख्या से आने वाले संदिग्ध सेवा संबंधी फोन और वास्तविक संस्थागत फोन के बीच अंतर समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1601 क्रम की संख्या क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में फोन के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के कई मामलों में ठग किसी बैंक, सरकारी विभाग, सेवा कंपनी या अन्य संस्था का कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। सामान्य मोबाइल संख्या का इस्तेमाल करके वे उपभोक्ताओं को विश्वास में लेने की कोशिश करते हैं।
ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उपभोक्ता के पास फोन करने वाले की वास्तविक पहचान जांचने का आसान तरीका नहीं होता। नई 1601 क्रम वाली संख्या व्यवस्था इसी समस्या को कम करने का प्रयास है।
इस विशेष क्रम की संख्या से आने वाले फोन को देखकर उपभोक्ता यह समझ सकेगा कि फोन किसी सत्यापित सेवा प्रदाता या संबंधित संस्था की ओर से किया गया है। इससे वास्तविक और संदिग्ध फोन के बीच अंतर करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
हालांकि केवल विशेष संख्या देखकर किसी भी संदेश या मांग को पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं होगा। उपभोक्ताओं को फिर भी किसी से अपनी गोपनीय जानकारी, गुप्त संख्या या बैंक संबंधी विवरण साझा करने से बचना चाहिए।
गैर-वित्तीय क्षेत्रों में होगा विस्तार
1600 क्रम वाली विशेष दूरभाष व्यवस्था का उपयोग पहले से वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं में किया जा रहा है। इस व्यवस्था से मिले अनुभव के आधार पर अब इसका विस्तार अन्य महत्वपूर्ण सेवा क्षेत्रों तक किया जा रहा है।
पहले चरण में उपयोगिता सेवाओं और माल वितरण से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया है। उपयोगिता सेवाओं में बिजली वितरण कंपनियां, जल आपूर्ति संस्थाएं, नगर गैस वितरण कंपनियां, रसोई गैस वितरक और अन्य आवश्यक सेवा प्रदाता शामिल होंगे।
इन संस्थाओं की ओर से उपभोक्ताओं को बिल, सेवा अनुरोध, कनेक्शन, आपूर्ति, शिकायत या अन्य वैध सेवा संबंधी मामलों के लिए फोन किया जा सकता है। नई संख्या व्यवस्था से ऐसे फोन की पहचान पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है।
पार्सल और माल ढुलाई कंपनियां भी दायरे में
पहले चरण में डाक, पार्सल और माल ढुलाई से जुड़े क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। इसमें पार्सल पहुंचाने वाली कंपनियां, शीघ्र वितरण सेवाएं, माल भेजने वाली संस्थाएं और अन्य संबंधित सेवा प्रदाता शामिल हैं।
आज बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, दस्तावेज भेजने और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए वितरण सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से पार्सल और वितरण से जुड़े फोन ठगी के लिए भी आकर्षण का माध्यम बन सकते हैं।
ठग अक्सर लोगों को यह बताकर फोन करते हैं कि उनका पार्सल अटक गया है, पता गलत है या किसी शुल्क का भुगतान करना बाकी है। इसके बाद वे व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में सत्यापित 1601 क्रम वाली संख्या से आने वाले वास्तविक सेवा फोन की पहचान करना उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी हो सकता है।
दूरसंचार कंपनियों को 90 दिन की समयसीमा
दूरसंचार नियामक ने सेवा प्रदाताओं को पहले चरण में शामिल पात्र संस्थाओं को नई संख्या व्यवस्था में शामिल करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है। दूरसंचार कंपनियों को संबंधित संस्थाओं की जांच और सत्यापन के बाद उन्हें इस व्यवस्था में शामिल करना होगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 1601 क्रम वाली संख्या किसी ऐसी संस्था को न मिल जाए जिसकी वास्तविक पहचान या व्यावसायिक गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है।
इस तरह नई संख्या व्यवस्था केवल एक अलग पहचान देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे सत्यापन की प्रक्रिया भी होगी।
संस्थाओं का सत्यापन जरूरी
नई व्यवस्था में दूरसंचार कंपनियों को किसी संस्था को विशेष संख्या आवंटित करने से पहले उसकी पहचान और पात्रता की जांच करनी होगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था आसानी से इस विशेष संख्या का उपयोग करने लगे, तो व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही कमजोर हो सकता है।
नियामक के अनुसार विशेष संख्या सीधे पात्र संस्थाओं को दी जाएगी। इसके लिए किसी बिचौलिये या समूह संचालक के माध्यम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सत्यापन के बाद सीधे संबंधित संस्था को संख्या आवंटित करने से जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।
प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं होगी 1601 संख्या
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1601 क्रम वाली दूरभाष संख्याओं का इस्तेमाल प्रचार संबंधी फोन करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
इसका मतलब है कि इन विशेष संख्याओं का उद्देश्य सेवा और लेनदेन से संबंधित वास्तविक संचार तक सीमित रखना है। किसी संस्था को अपने उत्पाद, योजना या सेवा का प्रचार करने के लिए इस विशेष क्रम का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
यह प्रावधान उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि विशेष संख्या का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर प्रचार फोन के लिए होने लगे, तो लोग इसे भी सामान्य प्रचार फोन की तरह नजरअंदाज करना शुरू कर सकते हैं।
ठगी और पहचान की नकल पर लग सकती है रोक
दूरसंचार माध्यमों के जरिए होने वाली ठगी में अक्सर अपराधी किसी प्रतिष्ठित संस्था का नाम लेकर लोगों से संपर्क करते हैं। वे खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, बिजली कंपनी का प्रतिनिधि या वितरण सेवा का कर्मचारी बताकर जानकारी मांग सकते हैं।
नई संख्या व्यवस्था ऐसे फर्जी फोन की पहचान करने में मदद कर सकती है, लेकिन यह अकेले सभी प्रकार की ठगी को समाप्त नहीं करेगी।
ठगी रोकने के लिए नेटवर्क स्तर पर संदिग्ध फोन की पहचान, सत्यापन व्यवस्था, शिकायत निवारण और उपभोक्ता जागरूकता को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
यदि वास्तविक सेवा फोन के लिए एक अलग और आसानी से पहचानी जाने वाली संख्या व्यवस्था बनती है, तो उपभोक्ताओं के लिए किसी फोन की विश्वसनीयता का शुरुआती आकलन करना आसान हो सकता है।
वित्तीय क्षेत्र से मिला अनुभव
नियामक ने बताया कि वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं द्वारा विशेष संख्या व्यवस्था के व्यापक इस्तेमाल से उपयोगी अनुभव प्राप्त हुआ है। इसी अनुभव को आधार बनाकर अब इसे गैर-वित्तीय क्षेत्रों तक बढ़ाया जा रहा है।
वित्तीय क्षेत्र में फोन के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को देखते हुए पहचान योग्य संस्थागत दूरभाष संख्या की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। अब बिजली, पानी, गैस और वितरण जैसी रोजमर्रा की सेवाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र सेवा संस्थाओं से आने वाले फोन एक अलग संख्या पहचान के साथ दिखाई दे सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को यह समझने में सहायता मिलेगी कि फोन किसी सत्यापित संस्था से संबंधित है या नहीं।
फिर भी उपभोक्ताओं को सावधानी बरतनी होगी। यदि कोई व्यक्ति विशेष संख्या से फोन करके भी गुप्त बैंक विवरण, पहचान संबंधी संवेदनशील जानकारी, धन हस्तांतरण या किसी संदिग्ध प्रक्रिया के लिए दबाव बनाए, तो केवल संख्या देखकर उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्था की आधिकारिक सेवा व्यवस्था के माध्यम से फोन की पुष्टि करना अधिक सुरक्षित तरीका होगा।
दूरसंचार क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने की कोशिश
नियामक का मानना है कि दूरसंचार व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए वास्तविक संस्थागत फोन और संदिग्ध फोन के बीच अंतर स्पष्ट होना जरूरी है।
1601 क्रम वाली व्यवस्था इसी दिशा में एक संरचित कदम है। यदि पात्र संस्थाओं का सही सत्यापन किया जाता है और इस संख्या का उपयोग केवल वास्तविक सेवा तथा लेनदेन संबंधी फोन के लिए सीमित रखा जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।
इसके साथ ही नेटवर्क स्तर पर फर्जी फोन की पहचान और रोकथाम को मजबूत करना भी आवश्यक होगा।
आगे क्या होगा?
अब दूरसंचार कंपनियों को पहले चरण में शामिल उपयोगिता और वितरण क्षेत्र की पात्र संस्थाओं को सत्यापित करके 1601 क्रम में शामिल करना होगा। इसके लिए 90 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।
आने वाले समय में इस व्यवस्था का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी संस्थाएं सफलतापूर्वक इसमें शामिल होती हैं और उपभोक्ता विशेष संख्या की पहचान को कितनी आसानी से समझ पाते हैं।
कुल मिलाकर, 1601 क्रम वाली विशेष दूरभाष संख्या व्यवस्था फर्जी फोन, पहचान की नकल और दूरसंचार माध्यम से होने वाली ठगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि आम उपभोक्ता को वास्तविक सेवा फोन की पहचान के लिए एक अतिरिक्त संकेत मिल सके।
हालांकि ठगी से पूरी सुरक्षा के लिए केवल विशेष संख्या पर्याप्त नहीं होगी। सत्यापन, निगरानी, शिकायत व्यवस्था और उपभोक्ता जागरूकता के साथ यह पहल अधिक प्रभावी हो सकती है। यदि व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो यह देश में विश्वसनीय दूरभाष संचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


