Saturday, September 26, 2026

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आईआईटी मद्रास के छह प्रोफेसरों को मिला प्रतिष्ठित एएनआरएफ जे.सी. बोस ग्रांट, शोध उत्कृष्टता को मिली नई पहचान

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने एक बार फिर शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान साबित की है। संस्थान के छह प्रतिष्ठित फैकल्टी सदस्यों को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) जे.सी. बोस ग्रांट से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान देश के उन वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दिया जाता है, जिन्होंने विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध, तकनीकी नवाचार और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले कार्य किए हैं।

इस उपलब्धि को आईआईटी मद्रास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। संस्थान लंबे समय से विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और अत्याधुनिक शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देता रहा है। इस सम्मान के माध्यम से न केवल इन वैज्ञानिकों के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, बल्कि भविष्य के अनुसंधान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

क्या है ANRF जे.सी. बोस ग्रांट?

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) द्वारा प्रदान किया जाने वाला जे.सी. बोस ग्रांट देश के सबसे प्रतिष्ठित शोध सम्मानों में से एक है। यह ग्रांट उन वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रदान की जाती है जो सक्रिय रूप से उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों में लगे हुए हैं और जिनके शोध का समाज, उद्योग तथा विज्ञान की प्रगति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।

इस ग्रांट का उद्देश्य उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को दीर्घकालिक और प्रभावशाली अनुसंधान जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे नई तकनीकों और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे सकें।

हर वर्ष 25 लाख रुपये, पांच वर्षों तक सहायता

इस प्रतिष्ठित ग्रांट के तहत प्रत्येक चयनित वैज्ञानिक को लगातार पांच वर्षों तक प्रति वर्ष 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस प्रकार एक शोधकर्ता को कुल 1.25 करोड़ रुपये तक का शोध अनुदान प्राप्त होगा।

इस राशि का उपयोग विभिन्न शोध गतिविधियों में किया जा सकेगा, जिनमें शामिल हैं—

शोध सहयोगियों और तकनीकी कर्मचारियों का वेतन
अत्याधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों की खरीद
अनुसंधान में उपयोग होने वाली सामग्री
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध यात्राएं
आकस्मिक शोध व्यय
संस्थागत ओवरहेड और अन्य परिचालन खर्च

इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य वैज्ञानिकों को वित्तीय चिंताओं से मुक्त रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करना है।

आईआईटी मद्रास के ये छह प्रोफेसर हुए सम्मानित

इस वर्ष आईआईटी मद्रास के जिन छह प्रतिष्ठित प्रोफेसरों को ANRF जे.सी. बोस ग्रांट से सम्मानित किया गया है, वे विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में लंबे समय से उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

  1. प्रो. सुजाता श्रीनिवासन (मैकेनिकल इंजीनियरिंग)

प्रो. सुजाता श्रीनिवासन सहायक तकनीक और पुनर्वास उपकरणों के विकास के क्षेत्र में अग्रणी शोधकर्ता हैं। उन्होंने कम लागत वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण विकसित किए हैं, जिनमें स्टैंडिंग व्हीलचेयर, NeoFly-NeoBolt और कदम प्रोस्थेटिक घुटना जैसे नवाचार शामिल हैं। उनके शोध का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन को अधिक सुविधाजनक और आत्मनिर्भर बनाना है।

  1. पद्मश्री प्रो. थालप्पिल प्रदीप (रसायन विज्ञान)

प्रो. थालप्पिल प्रदीप नैनोमैटेरियल आधारित स्वच्छ जल शोधन तकनीक के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। उनके शोध के माध्यम से लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिली है। उन्हें इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगातार तीसरी बार पांच वर्षीय कार्यकाल प्राप्त हुआ है, जो उनके शोध की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

  1. प्रो. दीपा वेंकितेश (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)

प्रो. दीपा वेंकितेश भारत के पहले मल्टीकोर ऑप्टिकल फाइबर फील्ड टेस्टबेड का नेतृत्व कर रही हैं। उनका शोध उच्च क्षमता वाली ऑप्टिकल संचार प्रणाली, माइक्रोवेव फोटोनिक्स और आधुनिक सिग्नल प्रोसेसिंग तकनीकों पर केंद्रित है। यह कार्य भविष्य की तेज और अधिक विश्वसनीय संचार प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  1. प्रो. जितेंद्र एस. सांगवाई (केमिकल इंजीनियरिंग)

प्रो. सांगवाई का शोध कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS), गैस हाइड्रेट और तेल एवं गैस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों पर आधारित है। उन्होंने 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं तथा उनके नाम 43 पेटेंट भी दर्ज हैं। उनका शोध पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

  1. प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन (एप्लाइड मैकेनिक्स एवं बायोमेडिकल इंजीनियरिंग)

प्रो. स्वामीनाथन बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन और चिकित्सा उपकरणों के विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनका शोध मस्तिष्क और मांसपेशियों की गतिविधियों का विश्लेषण कर रोगों की पहचान और बेहतर चिकित्सा तकनीकों के विकास पर केंद्रित है।

  1. प्रो. सुंदरगोपाल घोष (रसायन विज्ञान)

प्रो. सुंदरगोपाल घोष का शोध ट्रांजिशन मेटल बोरॉन केमिस्ट्री, कैटलिसिस, इलेक्ट्रॉनिक बॉन्डिंग और छोटे अणुओं की सक्रियता जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में है। उनका कार्य आधुनिक रसायन विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन आधारों पर मिलता है यह सम्मान?

ANRF जे.सी. बोस ग्रांट के लिए वैज्ञानिकों का चयन अत्यंत कठोर प्रक्रिया के तहत किया जाता है। चयन में निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है—

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध पत्र
पेटेंट और तकनीकी नवाचार
उद्योगों में तकनीक का सफल हस्तांतरण
समाज पर शोध का सकारात्मक प्रभाव
विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दीर्घकालिक योगदान
कौन कर सकता है आवेदन?

इस प्रतिष्ठित ग्रांट के लिए भारत में कार्यरत स्थापित वैज्ञानिक और इंजीनियर आवेदन कर सकते हैं। पात्रता के अनुसार आवेदक की आयु सामान्यतः 45 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका शोध कार्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होना चाहिए।

भारत के अनुसंधान क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

आईआईटी मद्रास के छह वैज्ञानिकों को एक साथ यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलना भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल संस्थान की वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत होगी, बल्कि स्वच्छ जल, स्वास्थ्य तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, संचार तकनीक और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए अनुसंधान को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शोध अनुदान भारत को वैज्ञानिक नवाचार, आत्मनिर्भर तकनीक और वैश्विक अनुसंधान नेतृत्व की दिशा में और मजबूत बनाएंगे। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं से विकसित होने वाली नई तकनीकों का लाभ उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और आम नागरिकों तक पहुंचने की उम्मीद है।

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