जयपुर: राजस्थान में सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश के 611 सरकारी विद्यालय अपने स्वयं के भवन के बिना संचालित हो रहे हैं। सरकार ने यह जानकारी शुक्रवार को विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में दी। इस खुलासे के बाद राजस्थान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं।
सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए उपलब्ध एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली के आंकड़ों में प्रदेश के 611 सरकारी विद्यालय ऐसे दर्ज हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में विद्यालयों की इमारतों की सुरक्षा और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है।
झलावाड़ हादसे के बाद हुई जांच का हवाला
सरकार ने विद्यालयों की खराब स्थिति के संदर्भ में झलावाड़ में हुए दर्दनाक हादसे का भी उल्लेख किया। पिछले वर्ष जुलाई में झलावाड़ जिले में एक विद्यालय की छत गिरने से कम से कम सात विद्यार्थियों की मौत हो गई थी, जबकि 28 अन्य विद्यार्थी घायल हुए थे। बताया गया था कि विद्यार्थी सुबह की प्रार्थना के लिए एकत्र हो रहे थे, तभी विद्यालय भवन की छत का हिस्सा गिर गया।
इस हादसे के बाद राज्य में सरकारी विद्यालयों की इमारतों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए जांच की गई। सरकार का कहना है कि इस जांच में कई विद्यालयों में बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति सामने आई।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार ने विधानसभा में इस स्थिति के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सरकार का तर्क है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और वर्तमान सरकार अब उन कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, 611 विद्यालयों का बिना अपने भवन के संचालित होना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती को दर्शाता है। विद्यालय भवन केवल पढ़ाई के लिए स्थान उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वच्छता, मौसम से बचाव और बेहतर शैक्षणिक वातावरण से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
विपक्ष के सवाल के बीच सामने आया आंकड़ा
यह आंकड़ा विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आया। विपक्ष लंबे समय से राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगता रहा है।
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब विद्यालयों की वास्तविक स्थिति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज है। विपक्ष सरकार से यह भी सवाल उठा सकता है कि बिना भवन वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किस प्रकार की गई है और इन विद्यालयों को स्थायी भवन कब तक उपलब्ध कराए जाएंगे।
निरीक्षण अभियान के बीच बढ़ा विवाद
राज्य में सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर यह खुलासा उस समय हुआ है जब कथित रूप से मुहिम चला रहे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ विवाद की घटना भी सामने आई है। कॉकरेच जनता पार्टी के स्वयंसेवक जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में एक सरकारी विद्यालय का निरीक्षण करने के लिए जा रहे थे।
पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका के अनुसार, रामपुरा कंवरपुरा गांव के निकट उनकी टीम को कुछ लोगों ने रोककर कथित तौर पर हमला किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में उनके एक स्वयंसेवक की बांह में चोट आई और हड्डी टूट गई।
इस घटना को लेकर पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि हमले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
कथित घटना का एक चलचित्र भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोगों को निरीक्षण दल के साथ बहस करते हुए देखा जा सकता है। दृश्य में धार्मिक नारे सुनाई देने का भी दावा किया गया है। घटना के संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों और प्रशासन की विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
विद्यालयों की स्थिति जांचने का दावा
कॉकरेच जनता पार्टी के अनुसार, उसके स्वयंसेवकों द्वारा सरकारी विद्यालयों का दौरा करने का उद्देश्य भवनों की स्थिति, विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था का आकलन करना है। पार्टी का दावा है कि ऐसे निरीक्षणों के माध्यम से उन विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
आशुतोष रांका ने इससे पहले रामपुरा कंवरपुरा के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति को लेकर भी जानकारी साझा की थी। उनके अनुसार, विद्यालय का मुख्य भवन असुरक्षित हो चुका है और छत तथा लकड़ी या अन्य सहायक हिस्सों के खराब होने के कारण उसे बंद कर दिया गया है।
उन्होंने दावा किया कि भवन को लोहे के कोणों के सहारे टिकाया गया है। मुख्य भवन के असुरक्षित होने के बाद विद्यार्थियों को लगभग 50 मीटर दूर स्थित एक टीन की छत वाले अस्थायी ढांचे में पढ़ाया जा रहा है।
रांका के अनुसार, इस अस्थायी स्थान पर पशुओं का चारा भी रखा हुआ था और भवन के कुछ हिस्सों से ईंटें गिर चुकी थीं। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह विद्यार्थियों की सुरक्षा और विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
राजस्थान में 611 सरकारी विद्यालयों का बिना अपने भवन के संचालित होना केवल भवन निर्माण का मुद्दा नहीं है। इससे यह सवाल भी उठता है कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण किस तरह उपलब्ध कराया जा रहा है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विद्यालय भवन की कमी का प्रभाव विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की कार्यक्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। बरसात, गर्मी और सर्दी के दौरान अस्थायी स्थानों पर पढ़ाई करना विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए कठिन हो सकता है।
इसके अलावा, पुराने या जर्जर भवनों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। झलावाड़ जैसे हादसे यह स्पष्ट करते हैं कि विद्यालय भवनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत कितनी महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे बिना भवन वाले 611 विद्यालयों के लिए स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था करनी होगी, वहीं दूसरी ओर मौजूदा विद्यालय भवनों की स्थिति की नियमित जांच भी सुनिश्चित करनी होगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, विद्यार्थियों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इस पूरे मुद्दे का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है।


